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कहानी फिर से कुलदीप को वहीं खींच लाई है, जहां से ये कहानी शुरू हुई थी। लेकिन क्या उसे वो मिलेगा, जिस चीज की तलाश में वो यहां आया था।
क्या कुलदीप लाल चांद के सम्मोहन से निकल पाया, या हमेशा के लिए उसमें ही खोकर रह गया।
कहानी काफी रोचक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
कुलदीप अपने भाई विशु से लाल चांद के बारे में बात करता है, लेकिन उसे जवाब नहीं मिलता है। क्योंकि कई बार जवाब सीधे सीधे नहीं मिला करते हैं, उन्हें ढूंढना पड़ता है।
20 सालों की छलांग लगाने कुलदीप अपने गांव पहुंच तो जाता है, लेकिन वहां कुछ और ही उसका इंतज़ार कर रहा था। क्योंकि कुदरत के खेल के अपने नियम होते हैं।
कई सवालों के जवाब केवल वक़्त के पास होते हैं, और उसके लिए सही वक़्त का इंतज़ार करना पड़ता है।
शायद कुलदीप के लिए वो वक़्त अब आ गया था, उसे लग रहा था कि मौजूदा वक़्त के सवालों का जवाब, 20 साल पहले उपजे एक सवाल में छिपा है।
फ़ोरैंसिक की रिपोर्ट ने कुलदीप को ग़लत साबित कर दिया। इसका मतलब लाल चांद जिसके वजूद को अभी तक कुलदीप नकार रहा था, क्या वो सच था।
किस दिशा में जाएगी, ये लाल चांद की गुत्थी।
कहानी एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है।
इंसान के यक़ीन ना करने से सच बदल नहीं जाता है।
कभी कभी कुछ ऐसे वाक़यात होते हैं, जो इंसान की सोच को झकझोर कर रख देते हैं।
कहानी जारी है।
रणबीर के कैमरा का विडियो एक अहम सुबूत है कि उसने लाल चांद देखा है, लेकिन कुलदीप का ध्यान उस पर नहीं गया था। आगे क्या होता है।
कहानी जारी है।
कुछ बातें जितनी सीधी दिखाई देती हैं... उतनी होती नहीं हैं।
कुछ चीज़ें हमारी आंखों के सामने होती हैं, लेकिन हमें उन्हें दिखाई देती हैं।
क्या होता है, उस लाल कार के साथ जो सुनसान रात में पहाड़ों के बीच से गुज़र रही है।
क्या ये भी लाल चांद से जुड़ी घटना है।
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