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कुदरत जब खेल खेलती है तो उसका मैदान वो खुद चुना करती है।
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कुछ लोग वहां जा रहे हैं, जहां अभिजीत को लाल चांद दिखाई दिया था।
फिर आगे क्या हुआ?
रात के साये में बैठे अभिजीत और संध्या, लेकिन ये रात उनकी ज़िंदगी बदलकर रख देती है।
इंस्पेक्टर कुलदीप जो कड़ियां जोड़ने की कोशिश में जुटा है, उसे शायद पता ही नहीं है कि कई कड़ियां जोड़ने के लिए लम्बी छलांग लगानी पड़ती है।
एक शांत शहर में पसरे सन्नाटे की अजीबोगरीब कहानी- ‘लाल’
पाॅडकास्ट- ‘वो कहानियां’
लेखन और आवाज- दीपक मेड़तवाल
‘लाल...’
पाॅडकास्ट ‘वो कहानियां’ पर अगली कहानी।
कई कहानियां ऐसे उलझ जाती हैं कि जैसे समय एक ही कहानी को बार बार दोहरा रहा हो, लेकिन समय भी कुछ कहानियों को पूरा करना चाहता है और शायद यही वजह थी कि कुलदीप को शहर से लापता हो रहे लोगों के केस पर लगाया गया।
लेकिन जल्द ही कुलदीप को कुछ ऐसी बातें पता लगीं, जिन पर यक़ीन करना नामुमकिन था, मगर नामुमक़िन शब्द इंसानों ने ही तो ईजाद किया है।
इंस्पेक्टर कुलदीप की ये खोज उसे कहां तक ले जाएगी ?
क्या वो इस राज़ को खोल सकेगा ?
जानने के लिए सुनिये कहानी ‘लाल...’
पाॅडकास्ट ‘वो कहानियां’ पर।
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