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Apravyakti episodes

  • प्यार से डर नहीं लगता साहब, चिमटे से लगता है!!!

    "एक था बचपन" सिरीज़ का दूसरा एपिसोड जहाँ आप सुनेंगे बचपन में मेरे चिमटे से खौफ और खौफ़ से पढ़ाई के सफ़र के बारे में।

    अगर आप भी अपने बचपन के ऐसे ही किसी किस्से को सभी लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं तो मुझे मेरे इंस्टा हंडेल aprajeetaasingh पर collab के लिए जरूर शेयर करें।  


    9 min
  • चटर - चटर या पटर - पटर

    "एक था बचपन" के पहले एपिसोड में आप मिलेंगे मेरे बचपन की कहानियों के मुख्य किरदारों से और मिलेंगे मेरे old version से जो latest version से काफ़ी हट कर है।


    Collab करने के लिए आप मुझसे जुड़ सकते हैं मेरे इंस्टा हैन्डल पर https://www.instagram.com/aprajeetaasingh/ और मेरी कहानियाँ व कविताएं पढ़ने के लिए आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं https://aprajeetasingh.com/।

    5 min
  • एक था बचपन
    बचपन में हर एक बच्चे को बड़े होने की लालसा रहती है और बड़े होने भी सभी लोगों को बचपन में लौट जाने की इच्छा। हालांकि दोनों में से किसी इच्छा को पूरा तो नहीं किया जा सकता, मगर एक कहानीकार होने के सौभाग्य से खुद के बचपन को कहानी में सहेज कर रखने का सुअवसर मिला तो सोचा सबसे साझा कर सभी को बचपन की यात्रा कराई जाए। मेरे साथ अपने बचपन की इस यात्रा के लिए सुनिए, मेरे बचपन की कहानी मेरी ज़ुबानी।
    4 min
  • प्रेम की स्वीकृति
    क्या प्रेम में स्वीकृति की आवश्कता है?
    क्या प्रेम के इज़हार को बिना किसी प्रश्नवाचक चिन्ह जोड़े केवल इज़हार रखा जा सकता है?
    आख़िर क्यों हम प्रेम के इज़हार के साथ अगले व्यक्ति को असमंजस की स्थिति में डाल देते हैं?
    प्रेम में स्वीकृति, अस्वीकृति, और उपेक्षा जैसी बातों पर मेरे विचार जानने को आतुर हैं तो ज़रूर सुने और अपने विचार मुझसे साझा करें।
    You can reach me on my insta handle @aprajeetaasingh.
    5 min
  • मैंने अपना घर बना लिया

    "अपना घर"

    घर बनाने का सपना तो हम सभी का ही होता है। हम में से कुछ अपने घर बना चुके हैं, कुछ बना रहे हैं, और कुछ के लिए ये पहाड़ चढ़ना अभी भी बाकी ही है।

    खेर, ये सिलसिला तो जारी रहेगा, मगर अपने घर के होने की आस कभी न छोड़ें। क्योंकि आपका घर आप में और आपके आसपास के ही लोगों में बसा है। बस उसे खोजने की ही देर है, खुद को वक्त दें और खुद के घर तक पहुँचने का रास्ता खोजें।

    6 min
  • क्या तुम रुकोगे???
    एक प्रश्न जो हर नए रिश्ते की शुरुआत में तुम करना तो चाहते हो, मगर हमेशा हिचकिचाते हो। एक प्रश्न जिसके उत्तर के साथ तुम आगे तो बढ़ना चाहते हो, मगर फिर अपने कदमों को पीछे खींच लेते हो।
    4 min
  • मुझे 'उससे' बेहतर चाहिए
    बेहतर, बेहतर और बहुत ही बेहतर!
    प्रतिस्पर्धा की होड़ कह लो या ज़िंदगी की दौड़ कह लो, हमें सब अच्छा ही नहीं सब कुछ सबसे अच्छा चाहिए। मगर क्या सबसे अच्छा कुछ होता भी है? मुझे तो नहीं लगता, क्योंकि अच्छा केवल तुलनात्मक शब्द है। शायद आप और हम जो जी रहे हैं वो भी बहुत अच्छा है, आपके लिए न सही किसी और के लिए जो आपकी ज़िंदगी को ideal मानता हो।
    अब इस बात पर शायद हँस दें की मेरी ज़िंदगी किस तरह से ideal है, बेहतर है, मगर किसी और ज़िंदगी की कठिनाई की तुलना में हो सकती है।
    तो क्या बेहतरी की होड़ में भागते रहना गलत है? लगता तो नहीं है, पर खुद की तुलना हमेशा किसी से करते हुए खुद को कमतर आंकना गलत है। आखिर तुम दुनिया में कितने ही बेहतर, मशहूर न हो जाओ, तुम किसी न किसी व्यक्ति से कम ही मशहूर होंगे। तो, आखिर खुद की खुशियों के साथ ये भेदभाव क्यों? क्या ये तुम्हें खुद के लिए वाज़ीफ लगता है? एक बार खुद से जरूर पूछ के देखना।
    3 min
  • साथ
    यूँ तो साथ बेईमानी है, मगर बिना साथ के कहाँ ही कोई कहानी है। मुझे "forever" में विश्वास नहीं मगर साथ में है। तुम मेरा साथ केवल तब तक देना, जब तक तुम्हें मेरा साथ बेहतर लगे, मगर जब तक लगे, तब तक साथ पूरा लगे...
    6 min
  • What's the plan?
    There is a lot of hype about planning, pre-planning, right execution of plans, and whatnot! I heard people saying that success is all about right planning. I partially agree, but it's not that you need to have a plan every time. Life is not a race! You can simply walk the extra mile without sticking to the plans.
    5 min

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