भारत में खुफिया एजेंसी रॉ विवादों में है, इसी तरह जर्मनी में घरेलू खुफिया एजेंसी पर भी बहस हो रही है. रॉ सूचना न देने की कोशिश कर रही है तो जर्मन एजेंसी पर सबूतों को नष्ट करने के आरोप हैं. पिछले सालों में विदेशी मूल के 9 लोगों की एक के बाद एक हत्या हुई थी. जब यह पता चला कि उन्हें एक ही नवनाजी गुट ने मारा है तो जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी दबाव में आ गई. लेकिन जब यह सामने आया कि इस कांड से जुडी़ फाइलों को नष्ट किया गया तो उसके अस्तित्व पर ही बहस छिड़ गई है. सवाल यह पूछा जा रहा है कि यदि एजेंसी इन हत्याओं का पता देने में विफल रही है, तो उसकी जरूरत क्या है. फाइलों को नष्ट करना सिर्फ गल्ती थी, या कुछ छुपाने की कोशिश थी.