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वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि मास्क लगाने से कोरोना संक्रमण का खतरा 30 प्रतिशत तक रोका जा सकता है पर मास्क जैसे आसान तरीकों को अपनाने में हिचक सबसे ज्यादा है। भारत में दूसरी लहर के चरम के दौरान जब चारों ओर तबाही थी, तब सबसे ज्यादा लोग मास्क लगा रहे थे। अब जब दूसरी लहर खत्म होने को है, 20 हजार या इससे कम नए मरीज मिल रहे हैं और रोजाना मौतों की संख्या 250 या इससे कम है तो लोग लापरवाह हो गए हैं। जानिए अभी भारत, अमेरिका, चीन, ब्राजील में कितने फीसदी लोग मास्क लगा रहे।
वीडियो क्रेडिट
रिपोर्ट एवं आवाज : शिवांगी
youtube link https://youtu.be/WDPNlR4VjmQ
यूनिसेफ ने दुनियाभर की सरकारों से कहा कि जब वे सलून, जिम और रेस्टोरेंट खोल सकते हैं तो फिर कोरोना की दुहाई देकर बच्चों को क्यों स्कूलों से महरूम कर रहे हैं।ध्यान रहे कि दुनिया के 190 देशों में स्कूलों पर किए गए अध्ययन से पता लग चुका है कि स्कूलों के जरिए सामुदायिक संक्रमण नहीं फैलता। शारीरिक दूरी, मास्क, अच्छे वेंटिलेंशन और हाथों की स्वच्छता अपनाकर बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है। बोलते पन्ने के इस सप्ताह सेंगमेंट में यूनिसेफ के हाल में आए बयान के बारे में विस्तृत रूप जानिए ।
बोलते पन्ने के रिसर्च इंजन पर गजेंद्र रिक्की आपको बतला चुके हैं रोटी के इतिहास के बारे में। अब जानिए रोटी के रूपों को ...। ऐसे ही रोचक विषयों पर तथ्यपरक जानकारी के लिए बोलते पन्ने से जुड़े रहिए। आपके फीडबैक का इंतजार रहेगा।
वीडियो क्रेडिट
रिसर्च एवं रिपोर्ट : गजेंद्र रिक्की
एडिटिंग - शिवांगी
(दोनों ही प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में कार्य का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं।)
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रोटी के इतिहास पर आधारित पहले भाग को सुनने के लिए इस लिंक पर जाइए https://youtu.be/OWg7oKar5GM
इस सप्ताह अचानक घाटी में विदेशी आतंकी बढ़ने की खबर कैसे फैल गई। इस मामले का अफगानिस्तान में तालिबान के सरकार बनाने से क्या संबंध है। साथ ही यह भी जानिए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि महबूबा मुफ्ती को फिर नजरबंद कर दिया गया।
वीडियो क्रेडिट
रिपोर्ट एवं वीडियो संपादन - शिवांगी
( प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में कार्य का अनुभव रखने वाली पत्रकार हैं।)
4 सितंबर के अखबारों की समीक्षा गृहमंत्री अमित शाह के अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस की दिल्ली दंगों की जांच को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगायी है। जानिए इस अहम खबर का क्या ट्रीटमेंट रहा। सुशांत सिंह राजपूत मामले में जिस तरह हाइप बनायी गई थी, ठीक उसी तरह की कोशिश बालिका वधु में एक्टर रहे सिद्धार्थ शुक्ला की हार्टअटैक से हुई मौत की कवरेज में देखने को मिलती है। दूसरी ओर, सेपरेटिस्ट नेता गिलानी की मौत के बाद आनन फानन में किए गए सुपुर्देखाक की बड़ी अहम खबर को अखबारों ने लिया ही नहीं। इन अखबारों की समीक्षा की गई - इंडियन एक्सप्रेस , द हिन्दू, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स । वीडियो क्रेडिट - समीक्षा एवं आवाज : अखबार की समीक्षा की है शिवांगी ने जो एक प्रिंट मीडिया पत्रकार हैं।
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हमारी इस प्ले-लिस्ट पर जाकर अखबारों की समीक्षा सुनिए
Aaj ke Akhbar ।। Press Reviews
https://www.youtube.com/channel/UCYFFfYZd_OOVycsmStOKxVg
15 अगस्त को काबुल में कब्जे के साथ ही अफगानिस्तान में बीस साल बाद राज लौट आया। जानिए सत्ता के पहले दस दिन की प्रमुख घटनाओं के बारे में, जिन्होंने अफगानियों की दुनिया बदलकर रख दी।
वीडियो क्रेडिट
रिपोर्ट, आवाज एवं वीडियो संपादन - शिवांगी
( प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में कार्य का अनुभव रखने वाली पत्रकार हैं।)
भारत की आजादी को 75 साल पूरे होने के साथ ही बंटवारा त्रासदी के भी 75 साल पूरे हो गए हैं। यह दिन सीमा के दोनों ओर के नागरिकों को ठहरकर विचार करने को कहता है। धर्म के नाम पर वर्षों से जो मारकाट छोटे और बड़े रूपों में जारी है, 75 साल बाद भी उसमें कोई कमी नहीं आयी है। तब की तरह अब भी नेता धर्म के नाम पर बरगलाने में सफल हैं और आज भी यही मुद्दा सीमा पर जंग कराने के लिए काफी है। दोनों मुल्क को धर्मनिरपेक्षता की जरूरत है और जरूरत है कि जो लोग जंग नहीं चाहते हैं वे आगे आएं। अमित कुमार ग्वाल की छोटी सी यह कविता भी संदेश देती. उम्मीद है कि आप सुनकर हमारा उत्साह बढ़ाएंगे। बोलते पन्ने से जुड़े रहिए . जय हिन्द ।
मौका आजादी के 75वें साल का हो तो हमें उत्सव मनाने के साथ मंथन की भी जरूरत है ताकि ये आजादी आने वाले कई सौ साल तक यूं ही बरकरार रहे। बरेली में कार्यरत पुलिसकर्मी निशा मानती हैं कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती धार्मिक सौहार्द बनाए रखना है और अपनी इसी चिंता को उन्होंने शब्दों में पिरोया है। बोलते पन्ने पर सुनिए ये छोटी सी कविता और भाईचारा बनाए रखने में मदद कीजिए। जय हिन्द।
आजाद भारत के 75 साल : नफरते न जला दें ये भाईचारे ... https://youtu.be/OUkGaXPcbtI
द हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर अखबारों के 11 अगस्त संस्करण की समीक्षा। अखबार की समीक्षा की है शिवांगी ने जो एक प्रिंट मीडिया पत्रकार हैं।
Newspaper review(11 Aug, 21) : राजनीति में Criminals पर सख्ती, नारेबाजी पर Action व भंवरी देवी Case --- https://youtu.be/RVge-plX2Ic
दस अगस्त के हिन्दी व अंग्रेजी के प्रमुख अखबार जंतर-मंतर पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगे नारों की खबर को दबा गए। किसी ने खबर ही गायब कर दी तो किसी ने अंदर के पन्ने पर दो-ढाई कॉलम भर ही लगायी। दूसरी ओर, इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी 2024 की तैयारी के लिए नौ अगस्त को प्रमुख विपक्षी नेता डिनर टेबिल पर मिले। जानिए किस अखबार ने कौन सी खास खबर दी और किस खबर को खास बनाने से रोक दिया... अखबार की समीक्षा की है शिवांगी ने जो एक प्रिंट मीडिया पत्रकार हैं।
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