जीवन में प्रेम से महत्वपूर्ण कुछ भी नही। प्रेम ही है जो पूजा-पाठ, भक्ति, प्रार्थना, भजन, दया, मदद, सहानुभूति, सहयोग इत्यादि के रूप में प्रकट होता है। हर प्राणी मात्र को प्रेम की ही दरकार होती है पर प्रेम होना कैसे चाहिए संसार में ताकि सर्वत्र सुंदरता और स्थिरता बनी रहे?