मनुष्य का मन हाथी की तरह होता है। किसी हाथी को कितना भी नहला धुला लीजिये, नहाने के बाद वो सूंड से खुद के ऊपर धूल डाल ही लेता है। इंसान का मन भी ऐसा ही है। कितने भी अच्छे विचार सुने या पढ़े, मन को दुबारा मैला कर ही लेता है। तो क्या तरीका है कि मन मैला न हो, इसके अंदर अच्छे विचार बनें जो मनुष्य को प्रगति और सफलता के रास्ते पर ले कर चलें।