गौर से देखा जाए तो जीवन द्वन्द का नाम है। नदी के दो अलग अलग किनारे हैं जिनके बीच में जिंदगी बहती है। यहाँ सुख-दुःख, हानि-लाभ, धूप-छांव, कोमल-कठोर, दिन-रात इत्यादि कई द्वन्द है। एक शिव भाग है, एक शक्ति भाग है और शिवरात्रि इन दोनों भागों की ऊर्जा के मिलन का भव्य त्योहार है। तो कैसे मनाएं इस त्योहार को और कब माना जाता है कि शिवरात्रि की साधना पूर्ण हुई?