The Master-KEY To RICHES by Napoleon Hill
अध्याय- 4 उद्देश्य की निश्चितता
इस बात का निरक्षण करना भी कम प्रभावी नहीं है कि दैड़ में पिछड़नेवालों के पास ऐसा कोई निश्चित लक्ष्य नहीं था, लेकिन वे बार-बार बिना पतवार की नाव की तरह चक्कर-पर-चक्कर लगाते रह गए और हमेशा खाली हाथ ही लौटे, जहाँ से शुरू किया था उनमें से कुछ असफलताएँ एक निश्चित प्रमुख उद्देश्य के साथ शुरू हुईं, लेकिन ज्यों ही अस्थायी पराजय या प्रबल विरोध का सामना करना पड़, वे लक्ष्य से भटक गए।
वे पीछे हट गए औल लक्ष्य को उन्होने छोड़ दिया। वे नहीं जानते थे कि सफलता का एक दर्शन और गणित के नियमों की तरह बिल्कुल निश्चित तथा भरोसेमंद सूत्र है। उन्होने यह भी नहीं सोचा कि अस्थायी हार क तरह की परीक्षा है, जो अभिशाप में वरदान साबित हो सकती है, यही कोई अंतिम पड़ाव नहीं हैं। यह हमारी सभ्यता का दुःखद प्रसंग है कि प्रत्येक 100 में से 98 व्यक्ति आगे तो बढ़े, मगर इतना भी हासिल करके नहीं लौटे जिसमें वे प्रमुख लक्ष्य की निश्चितता का आकलन कर सकें।
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