"भरोसा शाही आगंतुक है", जो तभी प्रवेश करता है, जब दिमाग पूरी तरह उसके लिए तैयार हो - वैसा दिमाग, जो आत्म अनुशासन के हिसाब से सेट हो। इस तरह वक्ता ने आपना वक्तव्य शुरू किया। कने की जरूरत नहीं कि सभी श्रोताओं का ध्यान उन्होने अपनी ओर खीचा । सभी शाही फैशनों में भरोसा सबसे अच्छे कक्ष को कमांड करता - नहीं- सबसे सुन्दर कमरा- दिमाग के अंदर का सबसे उत्तम निवास स्थल। इसे सेवकों के क्वर्टरों में नहीं रखा जा सकता और इसकी ईर्ष्या, लालच, लोभ, अंधविश्वार, घृणा, प्रतिशोध, शक, चिंता या भय से कभी दोस्ती नहीं हो सकती। ऐसी भावनाओं के साथ भरोसा नहीं चलता।
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