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Shoonya theatre Group presents Hindi Kahani/Story "छोटा सा सपना" written by Rama Yadav .
We bring to you short Hindi stories which would fill you with different human emotions , each story is hand picked and carefully crafted for the listener.
एक लघु कथा ( कृपया पढ़कर अपनी राय अवश्य दें )
आज वो बल्लियों उछल रहा था , उसका छोटा सा सपना पूरा होने जा रहा था , पिछले डेढ़ महीने से वो जो रात - दिन मेहनत कर रहा था वो आज रंग लाने वाली थी l
गुज़रे डेढ़ महीने में न जाने वो उस शो रूम के कितने चक्कर काट चुका था , पर हर बार खाली हाथ लौट आता था ...भीतर घुसने की हिम्मत ही न होती ...पर हाँ कांच के अंदर से झांकते ‘ मूल्य’ का उसने पता लगा लिया था .. आज वो उस शो रूम से खाली हाथ नहीं आयेगा , आज उसकी मुठ्ठी में एक सौ का करारा नोट और साथ ही बीस रूपए हैं , हाँ एक सौ बीस रूपए ..और उतने की हीं हैं वो चप्पल जो उसने अपनी माँ के लिए पसंद की है l बहुत ही सादी सी.... जिसमें उसकी माँ के मीलो चलने वाले मजबूत पैर और भी सुंदर लगेंगे ..पिछला सारा महिना खूब मेहनत करके उसने ये पैसे जमा किये हैं ..और इन्हें मुठ्ठियों में बाँधकर वो इतराता घूम रहा है, उसके पांव उड़े जा रहें हैं l
बड़ी ठाठ के साथ उसने शो रूम में प्रवेश किया और काम से खुरदरी हुई मुठ्ठियों को और कसकर भींच लिया l उसने दुकानदार से ईशारे में दूर कोने में कांच के शीशे से बाहर झांकती चपल्लों के लिए कहा , उसे बहुत सारी चप्पलें नहीं देखनी थीं , बस इसी को फटाफट ले जाना था l दुकान पर काम करने वाले व्यक्ति ने उसके बताने पर वैसी ही सात नम्बर की चप्पल निकाल दी l वो जल्दी से बिल कटवा देना चाहता था , और उड़कर माँ के पैरों में ये चप्पल पहना देना चाहता था , बिल कट चुका था , उसने मुठ्ठी खोली और बिना देखे ही वो पैसा दुकानदार के आगे बढ़ा दिया ...दुकानदार उस पर झिडक पड़ा ..वो समझ नहीं पा रहा था कि हुआ क्या ..दुकानदार ने उसकी हथेली पर बीस रूपए रखते हुए कहा कि ये बीस की नहीं एक सौ बीस की हैं ..उसने बीस रूपए का नोट देखा और उसे अपनी मुठ्ठियों में बाँध लिया ..वो समझ नहीं पा रहा था कि उसका करारा सा सौ रूपए का नोट कहाँ गया ..उसे लगा कि कहीं उसकी खुशी में मुठ्ठी हलकी सी खुली और वो सरक कर गिर तो नहीं गया ..पूरा रास्ता वो चप्पा – चप्पा अपना करारा नोट ढूंढता फिरा ..उसकी सिसकियाँ भीतर ही भिंची रह गयीं ..उसकी आँख से एक आंसू नहीं टपका ..उसने अगले महीने फिर से जी तोड़ काम करने का मन बनाया और घर की राह ली l
(सर्वाधिकार सुरक्षित शून्य थियेटर समूह )
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