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जब मीराबाई भगवान कृष्ण के लिए गाती थी | जब सूरदास जी भक्ति भाव में डूबकर करते थे उस वक्त भी भगवान उन्हें बड़े ध्यान से सुन रहे थे | यदि आपको लगता है की आपकी पुकार भगवान नहीं सुन रहे तो ये आपका वहम है | आइए इस कथा से समझते हैं
मोर मुकुट के जरिए श्रीकृष्ण यह संदेश देते हैं कि जीवन में भी वैसे ही रंग है जैसे मोर के पंख में है। बहुत गहरे रंग होते हैं यानी दुख और मुसीबत होती है तो कभी हल्के रंग यानी सुख और समृद्धि भी होती है। आइए जानते हैं कि कैसे मोर पंख श्री कृष्ण का मुकुट का हिस्सा बना
महत्वकांक्षी होने से कोई भी इंसान सीमित हो जाता है। जबकी इंसान में इससे ज्यादा योग्यता हो सकती है। इंसान होना एक असीमित संभावना है। आपका जीवन असीमितता को खोजने के लिए है।आइए इस बोधकथा से समझते हैं कि कैसी होनी चाहिए आप की महत्वाकांक्षा
भारत के प्राचीन इतिहास में ऐसे गुरूकुलों का बहुत महत्व था। प्रसिद्ध आचार्यों के गुरुकुल में पढ़े हुए छात्रों का सब जगह बहुत सम्मान होता था। क्या है यह तुंबी जिसे गुरु जी कह रहे हैं कि तुम्हें भरकर लानी है कैसी है यह परीक्षा तो आइए जानतें हैं इसके जुड़ी बोध कथा
जिस प्रकार अच्छे दिन नहीं रहे उसी प्रकार बुरे दिन भी नहीं रहेंगे, किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जीवन के सारे अन्धकार को मिटा देने के लिए काफी होती है, आज में जो उम्मीद जगती है वही उम्मीद भविष्य का निर्माण करती है आइए जानतें हैं इसके जुड़ी बोध कथा
हिन्दू धर्म के अनुसार यमराज मृत्यु के देवता हैं जिनका उल्लेख वेद में भी आता है। वेद कहते हैं कि जो भी जन्मा है, चाहे वह मिट्टी का रूप मनुष्य हो, प्रकाशरूप का देवता हो या अग्नि रूप में ब्रह्मराक्षस हो सभी को मरना है। कब और किसके द्वारा हुई यमराज की मृत्यु, तो आइए जानतें हैं इसके जुड़ी पौराणिक कथा
हम समय देखते हैं अंको के अनुसार परंतु इनके अलावा भी हमारे पास एक और घड़ी है वह है वैदिक घड़ी तो आइए जानतें हैं वैदिक घड़ी में इन अंकों की जगह पर क्या लिखा हुआ रहता है
आज की कहानी लालच बड़ा की धर्म धर्म का आचरण करते रहना चाहिए कुछ अधिक पाने के लालच में इंसान अपने पास का ही बहुत कुछ खो बैठता है इसलिए लालच से बचें, न जाने किसके भाग्य से आपका जीवन सुखमय व सुरक्षित है परहित धर्म का भी पालन करते रहिए क्योंकि तो आइए जानतें हैं परहित धर्म इसके जुड़ी पौराणिक कथा
महाभारत की कथा बहुत ही प्रेरणादायक है यह कथा धर्म और अधर्म के बीच हुए युद्ध तक सीमित नहीं है ऐसा ही एक संवाद कर्ण और वासुदेव के बीच हुआ था। जिसमें कर्ण ने कुछ बेहद ही सचे सवाल पूछे थे जो शायद हम सभी के मन में भी कभी न कभी उठे होंगे। वासुदेव ने उन सवालो के सरल से उत्तर दिए थे।
कैसे हुआ श्री गणेश का जन्म, कैसे मिला भगवान को हाथी का सिर, श्री गणेश जो प्रथम भगवान माने जाते हैं, हाथी जैसा सिर, लंबे दाँत और उसके साथ बड़े-बड़े कान, इन्हीं के कारण उनकी एक अलग पहचान हैं। तो आइए जानतें हैं इसके जुड़ी पौराणिक कथा
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