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किस्से-कहानियों का संसार अद्भुत है। इतिहास ऐसी रोचक कहानियों से भरा पड़ा है। कहानियों के इस सेक्शन में ऐसी ही पौराणिक कहानियां आपके के लिए लेकर आए हैं। पौराणिक कथाएं संस्कृति और मानवीय मूल्य दोनों से प... more
FAQs about KathaDarshan:How many episodes does KathaDarshan have?The podcast currently has 69 episodes available.
February 17, 2021हनुमान चालीसा की बाईसवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - बाणों का सेतुसब सुख लहै तुम्हारी सरना,तुम रक्षक काहू को डरना ॥ 22 ॥जो भी आपकी शरण में आते है उन सभी को आनन्द एवं सुख प्राप्त होता है और आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता। तुलसीदासजी यहाँ भगवान की शरण में जाने के लिए कह रहें। शरणागति एक महान साधन है, भगवान की शरण जाओ, भगवान का बन जाओ, उसके बिना जीवन में आनंद नहीं है, भगवान आधार है।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more6minPlay
February 16, 2021हनुमान चालीसा की इक्कीसवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - महत्वपूर्ण कार्यराम दुआरे तुम रखवारे,होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ 21 ॥श्री रामचंद्रजी के द्वार के आप रखवाले हैं, जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिल सकता। श्रीराम कृपा पाने के लिए आपको प्रसन्न करना आवश्यक है।तुलसीदासजी कहते है कि यदि हमें भगवान तक पहुँचना है तो गुरु, संत और शास्त्रकारों की सेवा करनी चाहिए। संतो से ज्ञान मिलता है, यानी कि सत्संग किया तो मार्गदर्शन मिलता है।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more5minPlay
February 15, 2021हनुमान चालीसा की बीसवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - मैं राम बन जाऊँगीदुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ 20 ॥संसार में जितने भी कठीन से कठीन काम हैं, वे सभी आपकी पासे सहज और सुलभ हो जाते हैं । प्रभु के उपर अटूट विश्वास, पुरुषार्थ और पराक्रम साथ में मिल जाएंगे तो कोई भी काम असंभव नही रह जाएगा, रघुराजा ने अपने बाहुबल से संपत्ति प्राप्त करके कौत्स को दी। एकलव्य ने बन में जाकर तप करते हुए स्वप्रयत्न से विद्या प्राप्त की । उसी प्रकार हनुमानजी ने भी प्रभु पर अटूट विश्वास रखते हुए अपने पुरुषार्थ से कठिन से कठिन काम को भी सहजता से कर दीया।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more5minPlay
February 13, 2021हनुमान चालीसा की उन्नीसवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - विश्वास पार लगाएप्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥ 19 ॥हनुमानजी ने भगवान श्री रामचन्द्रजी की दी हुई अँगुठी को मुहँ में रख कर सीतामाता की खोज करने समुद्र पर छलांग लगाई और उस पार लंका में पहुँच गये इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। गोस्वामी तुलसीदासजी का अभिप्राय यह है कि हमें हनुमानजी की तरह सुक्ष्म बनकर भीतर पडी हुई सुप्त शक्तियों को जागृत करना चाहिए।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more4minPlay
February 12, 2021हनुमान चालीसा की अठारहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - शक्ति विलोपमजुग सहस्त्र जोजन पर भानू।लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ 18 ॥जो सूर्य इतने योजन दूरीपर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजारों युग लगें। उस हजारों योजन दूरीपर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।उन्होने जन्म लिया तब प्रभात का उगता हुआ सूर्यबिम्ब देखा और उसे पकडने के लिए छलांग मारी। फल सोंचकर ही सहज स्वभाव के अनुसार कपि हनुमान कुदे थे।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more4minPlay
February 11, 2021हनुमान चालीसा की सत्रहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ हनुमान कथा - बिभीषण मंत्रतुम्हरो मंत्र बिभीषण माना।लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ 17 ॥जब हनुमानजी लंका में सीता माता की खोज कर रहे थे तब लंका में तमोगुणी आचार व्यवहार के बीच श्री हनुमानजी को प्रभु कृपा से संत विभीषण का घर दिखलायी देता है। उसी समय विभीषण जाग उठते हैं राम राम का उच्चारण करते हैं। आपके उपदेश का विभीषण ने पूर्णत पालन किया, इसी कारण वे लंका के राजा बनें, इसको सब संसार जानता है।#HanumanChalisa #HanumanKatha ...more5minPlay
February 10, 2021हनुमान चालीसा की सोलहवीं, चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा आधी शक्तिहनुमान चालीसा की सोलहवीं, चौपाई का हिंदी अर्थ हनुमान कथा आधी शक्ति तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ 16 ॥आपने सुग्रीवजी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया जिसके कारण वे राजा बने। भगवान श्रीराम सुग्रीव मैत्री के स्थापन में हनुमानजी की मुख्य भुमिका थी। यदि सुग्रीव को हनुमान जैसे कुशल, दूरदर्शी, मंत्री का सानिध्य प्राप्त नहीं होता कभी स्वप्न में भी बलशाली बालि के रहते सुग्रीव को किष्किन्धा का राज्य, अपहृत पत्नी और राज्य वैभव प्राप्त होता।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more4minPlay
February 09, 2021हनुमान चालीसा की पंद्रहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - बाण की खोजहनुमान चालीसा की पंद्रहवीं चौपाई का हिंदी अर्थहनुमान कथा - बाण की खोज यम कुबेर दिगपाल जहां ते।कबि कोबिद कहि सके कहां ते ॥ 15 ॥तुलसीदासजी लिखते है कि स्वयं धर्मात्मा यमराज, कुबेर, सभी दिक्पाल, पंडित कवि ये सभी हनुमानजी के गुणों का तथा निर्मल यश का गुणगान करते हैं। इन सभी को हनुमत चरित्र सुंदर, आकर्षक, दिव्य एवं भव्य लगा तथा उन्होने हनुमानजी में अनन्त गुण देखे इसीलिए वे कहते हैं कि हम भी हनुमानजी के गुणों का पूरी तरह से वर्णन नहीं कर सकते।...more6minPlay
February 08, 2021हनुमान चालीसा की चौदहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ हनुमान कथा - बही खाताहनुमान चालीसा की चौदहवीं चौपाई का हिंदी अर्थहनुमान कथा - बही खाता सनकादिक ब्रम्हादि मुनीसा।नारद सारद सहित अहीसा ॥ 14 ॥तुलसीदासजी यहाँ पर यह कहना चाहते हैं कि श्री हनुमानजी की प्रशंसा केवल भगवान राम ने ही नहीं की अपितु सृष्टि के ब्रम्हाजी द्वारा उत्पन्न मानस पुत्र सनकादिक मुनि भगवान के मन के अवतार श्री नारदजी तथा आदि शक्ति माता सरस्वती जी इत्यादि सभी हनुमानजी के गुणों का गुणगान करते हैं।...more5minPlay
February 06, 2021हनुमान चालीसा की तेरहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा भ्रम टूट गयाहनुमान चालीसा की तेरहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा भ्रम टूट गया सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ 13 ॥श्रीराम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम और भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लेकर इस सृष्टि में आकर इसकी महिमा बढायी। उसी प्रकार श्री हनुमानजी ने भक्ति की महिमा बढाई, इसीलिए ऐसे भगवान के परम भक्त के यश की सारा संसार प्रशंसा करता है।#HanumanChalisa #HanumanKatha...more5minPlay
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