ममी की मृत्यु के बाद, आयन पहली बार स्कूल पहुँचता है। पर उसके मन और मस्तिष्क में केवल एक ही विचार है कि कैसे वो quantum physics के माध्यम से अपनी ममी के तक जा सकता है।
बीते बचपन की वो यादें जो मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं... जिनका कोई मतलब नहीं है पर जो बिना मतलब के मेरे आगे पीछे घूमती रहती हैं... जिनके होने से मैं हूँ ... आईये चलें एक बार फिर गंगा नदी की नहर के तट पर बसे रुड़की शहर की ओर, जैसा वो था 1968 में और मुझसे वहीं मिलें जब मैं आठवीं में था
1967, 1968, 1969... मेरे बचपन और जवानी के बीच में झूलते यह तीन साल .....मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं ....न रूड़की अब वैसा रहा है और न ही मैं अब वैसा हूँ ... समय अपना काम दोनों पर ही कर गया है ....पर यादें आज भी ताज़ा हैं मानो कल की बात हो...