Ramkatha 
by Ritika

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Ramkatha by Ritika episodes

  • इंद्र का दुःसाहस -32
    इंद्र का पूरा ध्यान अहिल्या को प्राप्त करने में लगा था।वो किसी तरह से भी उसे प्राप्त करना चाहता था।वो जानता था कि अहल्या कभी स्वयं उसके पास नही आएगी। उसने मौका पाकर गौतम के आश्रम में प्रवेश किया और अहिल्या को कीलित कर दिया।
    15 min
  • गौतम और अहिल्या के बीच का संतुलन -31
    विश्वामित्र ने बातों ही बातों में राम को भविष्य के लक्ष्य की ओर आगाह कर दिया था।साथ ही ये भी चेता दिया था कि अपनी धर्मपत्नी का चुनाव करते समय वो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि वो राम के लक्ष्य पूर्ति मे कहीं बाधा न बने इधर ज्वर से पीड़ित शत बड़ी मुश्किल से सोया था।चूंकि गौतम भी बहुत थके हुए थे इसलिये वो चाहते हुए भी अहिल्या की सहायता नही कर पा रहे थे।
    12 min
  • ऋषि गौतम की व्यस्तता-30
    आश्रम में अधिवेशन ज़ोरों शोरों से चल रहा था।अमितलाभ इंद्र से अपमानित होकर राजा सीरध्वज के पास चला गया।उन्होंने भी उसकी मंशा जानकर उसे जाने का आदेश दे दिया था। इधर1अधिवेशन के दिन भर के कार्यो से फुरसत पाकर ऋषि गौतम अपने कुटीर में वापस आ गए थे। आज अहिल्या कुछ उदास थी।सहाय इंद्र वाली घटना से बहुत आहत थी पर उसने दिनभर बड़ी ही सजगता और समझदारी से अधिवेशन के सारे कार्य सम्पन्न किये थे।पुत्र शत को हल्का ज्वर भी था।
    14 min
  • इंद्र का आगमन-29
    गौतम ऋषि के आश्रम में देवराज इंद्र का आगमन हुआ। इंद्र को आश्रम में चल रही ज्ञान की गोष्ठियों में कोई रुचि नहीं थी। उसका सारा ध्यान ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या पर टिक गया था। उसने आश्रम की गरिमा को ताक पर रखते हुए अहिल्या के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित कर दी थी।
    15 min
  • ऋषि गौतम और अहिल्या की कहानी -28
    विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ सिद्धाश्रम छोड़ चुके थे। उन्होंने रास्ते में ऋषि गौतम और अहिल्या की कथा आरम्भ की। गौतम ऋषि के आश्रम में सात दिवसीय सम्मेलन आयोजित हो रहा था।जिसमे मिथिला के राजा सीरध्वज आये थे।सीरध्वज ने ही देवराज इंद्र को भी आमंत्रित किया था। पूरा आश्रम इंद्र के स्वागत की तैयारी में लगा था।
    11 min
  • सिद्धाश्रम से विदाई-27
    वनजा और बाकी अपह्रत स्त्रियों को गगन को सौंप कर विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण के साथ आगे की यात्रा शुरु की। सभी आश्रम वासियों ने भारी मन से उन्हें विदा किया।
    16 min
  • विश्वामित्र का आश्रम मोह-26
    राक्षस शिविर में अब कोई राक्षस नही था ,पर विश्वामित्र की यात्रा रुक नही सकती थी।उन्हें अब सिद्धाश्रम से आगे की यात्रा करनी ही थी।उन्हें उन अपह्रत युवतियों की चिंता थी कि अब उनका क्या होगा।उन्हें कोई समाज स्वीकार नही करेगा।तो राम ने ये सुझाव दिया कि क्यूं न गगन को इन युवतियों का अभिभावक नियुक्त कर दिया जाए।गुरु अब चिंतामुक्त हो गए थे।
    14 min
  • राक्षस शिविर -25
    राम आश्रमवासियों और ग्रामवासियों के साथ राक्षसों के शिविर की तरफ चल दिए। राक्षसों का कहीं कोई चिन्ह नही दिखा।पूरा शिविर खाली था। गगन को शिविर से चार बंधक स्त्रियाँ मिली जो राक्षसों द्ववारा बन्दी बना ली गई थी।राम के मन क्षोभ से भर गया। उन्होंने उन युवतियों को लक्ष्मण के साथ सिद्धाश्रम भेज दिया।
    12 min
  • राम की दंडनीति-24
    राम ने बहुलाशव को मृत्यु के घाट उतार दिया था।और उप सेनानायक पृथुसेन को अयोध्या का सेनानायक नियुक्त कर दिया।गगन ने समाचार दिया कि मारीच घायलावस्था में दक्षिण की तरफ भाग गया था। राम का अगला पड़ाव अब ताड़कावन में रहने वाले राक्षस थे।अब उनका अंत ज़रूरी था।
    13 min
  • राम द्वारा बहुलाशव वध-23
    देवप्रिय को निषादों द्वारा बंदी बनाने का समाचार उसके पिता सेनानायक बहुलाशव को मिल चुका था।वो अपनी सेना के साथ सिद्धाश्रम आया और राम से देवप्रिय को छोड़ने की मांग की। पर राम ने गहन के परिवार पर होने वाले अत्याचार की बात कही और देवप्रिय को मृत्युदंड की बात कही तो बहुलाशव ने क्रोध से अपनी खड्ग निकाल ली। और राम ने बहुलाशव को अपने तीर से बेध डाला।
    10 min

About Ramkatha by Ritika

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एक ऐसी राम कथा जो सामयिक,लौकिक और तर्कसंगत है।ये किसी अदभुत देश या काल की कहानी नही बल्कि इसी लोक और काल की कहानी है जो हमारे ही जीवन से जुड़ी समस्याओं पर आधारित है।इस कहानी में हमें अपने ही कई सवालों…