Ramkatha 
by Ritika

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Ramkatha by Ritika episodes

  • भरत का अयोध्या से दूर होना -52
    राजा दशरथ इन दिनों काफी उद्विग्न थे।वे राम के राज्याभिषेक की घोषणा करना चाहते थे और ये तभी संभव था जब भरत अयोध्या से बाहर हों। इसी अवसर की तैयारी में लगे थे राजा दशरथ।
    12 min
  • दशरथ की दुश्चिंता-51
    दशरथ राम के प्रति विशेष स्नेही थे इसके अलावा राम दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र थे इसलिए दशरथ चाहते थे कि राम को राजपद प्रदान कर दिया जाए पर वो कैकेय नरेश को वचन दे चुके थे कि कैकयी का पुत्र ही दशरथ के बाद राजसिंहासन का उत्तराधिकारी होगा। और यही दुश्चिंता उन्हें खाये जा रही थी।
    10 min
  • परशुराम का क्रोध-50
    राम सीता विवाह के पश्चात बारात अयोध्या की तरफ़ चल पड़ी।तभी वहां परशुराम का आगमन हुआ।वह शिव धनुष तोड़े जाने पर बहुत क्रोधित थे। लक्ष्मण ने उन्हें ललकारा तो वे क्रोधित होकर उन्हें मारने के लिए उधृत हो गए। फिर राम ने उन्हें शांत किया। परशुराम ने वैष्णवी धनुष के परिचालन की शर्त रखी । राम ने बड़ी ही सहजता से उसे भी खंडित कर दिया।परशुराम आश्वस्त होकर वापस लौट गए।और बारात फिर से अयोध्या की तरफ चल पड़ी।
    16 min
  • राम सीता विवाह-49
    शिव धनुष के खंडित होते ही जनक का प्रण पूरा हो गया और राम सीता से विवाह हेतु प्रस्तुत थे। जनक ने राम सीता के शुभ विवाह का समाचार राजा दशरथ को भिजवाया।और राजा दशरथ ने विस्मित होकर राम द्वारा किये गए महान कार्यो के बारे में जाना।वे बारात लेकर जनकपुर पहुँचे।वहाँ राम और सीता का विवाह सम्पन्न हुआ।
    11 min
  • राम द्वारा शिव धनुष खंडन-48
    विश्वामित्र की आज्ञा से राम ने शिव धनुष परिचालन आरम्भ किया।बल और कौशल के सही संतुलन का प्रयोग करके राम ने शिव धनुष को दो खंडो में बांट दिया। जनकपुर के राजप्रासाद में बैठे सभी लोग इस अभूतपूर्व प्रदर्शन के साक्षी थे।
    16 min
  • जनक दुलारी सीता-47
    राजा सीरध्वज जनक ने सीता की इच्छा जानने की कोशिश की। राम के विषय में सीता ने काफी कुछ सुन रखा था।राम एक आदर्श पुरुष थे।परंतु सीता राम को साक्षात देखे बिना कोई भी फैसला नही करना चाहती थी।विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण राजमहल में आये। सीता ने राम को देखा और जनक को अपनी मौन स्वीकृति दे दी।
    10 min
  • सीरध्वज का राम से परिचय-46
    राजा सीरध्वज और शतानंद राम से मिलने वाटिका पहुँचे।राम को देखकर सीरध्वज के मन में लालसा उपजी कि ऐसा ही वर तो वो अपनी पुत्री के लिए खोज रहे थे। शतानंद राम के प्रति कृतज्ञ थे कि उन्होंने उनकी माँ अहिल्या को सामाजिक मान्यता और सम्मान दिलाया था।
    11 min
  • राम का फ़ैसला-45
    गुरु विश्वामित्र ने राम का सीता के साथ विवाह का फ़ैसला स्वयं राम पर ही डाल दिया था।राम ने बहुत सोच विचार कर सीता से विवाह करने का निर्णय ले लिया था पर अभी भी दो बातों पर उनका ध्यान अटका था पहली थी सीता की इच्छा और दूसरी शिव धनुष का परिचालन।
    15 min
  • राम का जनकपुर में प्रवेश-44
    राम द्वारा अहिल्या में जीवन फूंकने के बाद गुरु विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुरी पहुँचे।राज्य सीमा के पास ही गुरु ने शिविर लगवाया।राम को जिज्ञासा थी कि आखिर गुरु उन्हें जनकपुरी क्यों लाये हैं तब गुरु ने राम को सीरध्वज की पुत्री सीता के विषय में बताया, कि किस तरह राम और सीता का विवाह अयोध्या और जनकपुरी दोनों राज्यों के साथ साथ पूरे आर्यावर्त के लिए श्रेयस्कर होगा।
    14 min
  • राम द्वारा शिलावत् अहिल्या में प्राण फूंकना -43
    राम के अहिल्या की कुटिया में आने भर का मतलब था कि राम ने पूरे आर्यवर्त के बंधनों को तोड़ कर अहिल्या को सामाजिक मान्यता एवं सम्मान दिला दिया था। अहिल्या राम के आगमन से खुशी से फूली नही समा रही थी। उसका आत्मविश्वास और सम्मान अब उसे वापस मिल गया था।वो अपने पुत्र और पति से मिलने के लिए अब स्वतंत्र थी।
    14 min

About Ramkatha by Ritika

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एक ऐसी राम कथा जो सामयिक,लौकिक और तर्कसंगत है।ये किसी अदभुत देश या काल की कहानी नही बल्कि इसी लोक और काल की कहानी है जो हमारे ही जीवन से जुड़ी समस्याओं पर आधारित है।इस कहानी में हमें अपने ही कई सवालों…