Ramkatha 
by Ritika

Ramkatha by Ritika

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Ramkatha by Ritika episodes

  • वन में जनसामान्य से राम का परिचय -72
    सुमेधा नामक भील कन्या ने सीता को वन में चल रही दास प्रथा के बारे में बताया। और उधर राम ऋषि कालकाचार्य से मिले जो राक्षसों से भयभीत थे। इसी बीच वाल्मिकी आश्रम से मुखर राम से मिलने आए।
    17 min
  • मंदाकिनी नदी के तीरे-71
    राम,लक्ष्मण और सीता मंदाकिनी नदी के पास ही अपने कुटीर में रहने लगे। इसी बीच सीता की भेंट सुमेधा नाम की एक भील कन्या से हुई।इधर राम भी आसपास की जगह में रहने वालों के विषय में जानने को उत्सुक थे।
    14 min
  • नए कुटीर में प्रवेश-70
    लक्ष्मण द्वारा तीन कुटीर बनकर तैयार हो गए। एक राम और सीता के लिए था, दूसरा लक्ष्मण के लिए, और तीसरा कुटीर इन दोनों कुटीरों के बीच में था जिसे शस्त्रागार बनाया गया था। राम सीता और लक्ष्मण ने अपने नए कुटीर में प्रवेश किया और इस तरह अपना वनवासी जीवन आरंभ किया।
    15 min
  • चित्रकूट में बसेरा -69
    राम ने चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे अपना आश्रम बनाने का निश्चय किया। लक्ष्मण को कुटिया तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।सब मिलकर जंगल से लकड़ी काटने में लग गए।
    13 min
  • राम का चित्रकूट आगमन -68
    राम भारद्वाज आश्रम से चलकर ,लक्ष्मण, सीता और ऋषि भारद्वाज के कुछ शिष्यों के साथ चित्रकूट पहुंचे जहां ऋषि वाल्मीकि ने उनका स्वागत किया। बातों बातों में राम द्वारा लाये गए शस्त्रों पर चर्चा शुरू हो गई।
    15 min
  • ऋषि भारद्वाज के आश्रम में विश्राम- 67
    गंगा नदी पार करके राम सीता और लक्ष्मण सहित भारद्वाज ऋषि के आश्रम में पहुँचे।ऋषि ने राम से आगे की यात्रा के विषय में पूछा।राम ने बताया कि वे चित्रकूट जाने की तैयारी में है। ऋषि भारद्वाज ने उन्हें रावण के आतंक से परिचित कराया और रावण के विरोध में लगी टोलियों से परिचित कराया।
    14 min
  • गंगा नदी में नाव की यात्रा -66
    सबसे विदा लेकर राम, लक्ष्मण और सीता के साथ नाव पर सवार होकर गंगा नदी पार कर रहे थे। गंगा नदी के उस पार भारद्वाज ऋषि का आश्रम था। नाव में यात्रा के दौरान सीता को माता कौशल्या की चिंता जाग उठी।और राम भी माँ की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो उठे।
    12 min
  • गुह से विदा -65
    राम ,लक्ष्मण और सीता ने श्रृंगवेरपुर से गुह,सुमंत्र और बाकी परिजनों से विदा ली और नाव की मदद से गंगा नदी पार करते हुए भारद्वाज आश्रम की और बढ़ गए।
    12 min
  • निषादराज गुह और राम की भेंट -64
    राम की यात्रा1 अब आगे बढ़ रही थी। वे चलते चलते श्रृंगवेरपुर के पास गंगा नदी के तट पर पहुँच गए थे। वहाँ राम के मित्र निषादराज उनकी प्रतीक्षा1कर रहे थे। राम ने अपने मित्र गुह से भेंट की ।आगे की यात्रा उन्हें वुह की मदद से करनी थी।
    15 min
  • लक्ष्मण और सुमंत्र संवाद-63
    सरयू नदी से बढ़कर सभी लोग तमसा नदी के तट पर पहुँचे। लक्ष्मण ने राम और सीता के सोने के लिए उचित व्यवस्था की।और पहरा देने के लिए कुछ दूर हटकर खड़े हो गए। तभी सुमंत्र उनके पास आये और उन्होंने राजा दशरथ की शोचनीय अवस्था की ओर अपनी चिंता व्यक्त की। लेकिन लक्ष्मण पिता दशरथ की तरफ से बहुत खिन्न थे.
    13 min

About Ramkatha by Ritika

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एक ऐसी राम कथा जो सामयिक,लौकिक और तर्कसंगत है।ये किसी अदभुत देश या काल की कहानी नही बल्कि इसी लोक और काल की कहानी है जो हमारे ही जीवन से जुड़ी समस्याओं पर आधारित है।इस कहानी में हमें अपने ही कई सवालों…