Ramkatha 
by Ritika

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Ramkatha by Ritika episodes

  • पिता दशरथ का अंतिम प्रयास -62
    राम,अयोध्या से विदा लेकर सीता और लक्ष्मण के साथ सरयू नदी के तट पर स्थित त्रिजट के आश्रम में पहुँचे। वहां पहुँचते ही आर्य सुमंत्र अयोध्या से राजा दशरथ का संदेश लेकर आये।वे एक रथ और सीता के लिए कुछ वस्त्राभूषण लाये थे। पर राम और सीता दोनों ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया। पर मंत्री चित्ररथ के समझाने पर सीता ने शवसुर दशरथ द्वारा भेजी गई भेंट स्वीकार कर ली।
    15 min
  • राम की अयोध्या से विदाई -61
    अयोध्या की देख रेख अपने मित्रों और हितैषियों को सौंपकर राम थोड़ा निश्चिंत हो गए। गुरु विश्वामित्र तथा अन्य महात्माओं से मिले दिव्यास्त्र लेकर वे वन जाने हेतु तैयार हो गए। पूरी अयोध्या उन्हें भावभीनी विदाई दी रही थी। अयोध्या वासियों में दुख के साथ साथ गुस्सा भी था।पर वे कुछ भी कर सकने की स्थिति में नही थे।राम,लक्षमण तथा सीता पिता दशरथ से विदा लेने उनके महल में पहुँचे जहाँ कैकयी ने उन्हें वल्कल देकर विदा किया।
    35 min
  • लक्ष्मण द्वारा वन साथ चलने की जिद्द -60
    लक्ष्मण को जब कैकयी के वचनों का पता चला तो वे गुस्से से आग बबूला हो गए।राम ने उन्हें समझाया कि उनका वन जाना कितना आवश्यक है, वे ऐसा करके असल में विश्वामित्र को दिए हुए वचन को पूरा करेंगे। ये सुनकर लक्ष्मण कुछ हद्द तक संतुष्ट हुए और भईया राम के साथ वन जाने को तैयार हो गए।
    11 min
  • वनवास जाने हेतु सीता का हठ -59
    राम ने सीता को वनवास जाने का समाचार दिया।सीता ने बहुत ही सहजता से राम का निर्णय स्वीकार कर लिया और स्वयं भी साथ वन जाने को तैयार हो गई।राम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि वो अयोध्या में रहकर भी अपना पत्नी धर्म निभा सकती हैं पर सीता नही मानी, वो हर परिस्थिति में राम के साथ रहना चाहती थीं।अंततः राम को सीता के हठ के आगे झुकना पड़ा।
    13 min
  • माता कौशल्या से विदा-58
    राम वन जाने को उद्दत हो गए पर अभी ये समाचार सभी प्रियजनों को सुनाना बाकी था।राम के लिए ये और भी कठिन परीक्षा की घड़ी थी।उन्होंने सबसे पहले राज्याभिषेक की तैयारियों में जुटीं माता कौशल्या को ये समाचार सुनाया। राम के चौदह वर्षों के लिए वनवास का समाचार सुनकर वो पछाड़ खाकर गिर पड़ी।माता सुमित्रा ने राम को रोकने का बहुत प्रयास किया पर राम कस निर्णय अटल था।
    10 min
  • कैकयी के दो वरदान-57
    कैकयी ने राम को राजा दशरथ से माँगे गए दो वरदानों के बारे में बताया । पहला राम के स्थान पर भरत का युवराज्यभिषेक और दूसरा राम को तपस्वी वेश मे चौदह वर्ष के लिए वनवास।राम ने सहर्ष ही कैकेयी के कहे अनुसार चौदह वर्षों के लिए वन जाना स्वीकार कर लिया।
    10 min
  • कैकयी का रोष-56
    राम के युवराज्यभिषेक के ठीक पहले राम माता कैकयी के महल में गए।वहाँ पिता दशरथ असहाय अवस्था में पड़े थे।कैकयी दशरथ के प्रति अपना रोष प्रकट कर रहीं थीं ,और सम्राट द्वारा दिये गए दोनों वचन को मांगने की इच्छा प्रकट कर रहीं थीं।
    15 min
  • राम के राज्याभिषेक की तैयारियाँ -55
    पूरा महल राम के राज्याभिषेक की तैयारियों में लगा था।लेकिन दशरथ चिंताग्रस्त थे कि किसी तरह बिना किसी विघ्न के राम का राज्याभिषेक हो जाये।राम पिता की इस चिंता से चिंतित थे। तमाम अटकलों के बाद वो दिन भी आ गया जब राम का अभिषेक होना था।
    10 min
  • राज्याभिषेक को लेकर राम का अंतर्द्वंद्व -54
    दशरथ ने राम को राज्याभिषेक कराने का आदेश दिया क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं इसमे कोई विघ्न आ जाये। राम राज्याभिषेक को लेकर चिंतित थे क्योंकि उन्होने भी विश्वामित्र को वचन दिया था कि वो जंगलों में जाकर मानव कल्याण के कार्यों में अपना योगदान देंगे।
    12 min
  • राम को राज्याभिषेक की सूचना-53
    राजा दशरथ ने राम के राज्याभिषेक का निर्णय ले लिया था। उन्होंने गुरु वशिष्ठ द्वारा ये सूचना राम को भिजवाई।राम विस्मित थे कि इस राज्याभिषेक की पूरी गतिविधि को गोपनीय क्यों रखा जा रहा है। इसीलिए उन्होंने पिता दशरथ से मिलने के लिए उनके महल की तरफ प्रस्थान किया।
    13 min

About Ramkatha by Ritika

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एक ऐसी राम कथा जो सामयिक,लौकिक और तर्कसंगत है।ये किसी अदभुत देश या काल की कहानी नही बल्कि इसी लोक और काल की कहानी है जो हमारे ही जीवन से जुड़ी समस्याओं पर आधारित है।इस कहानी में हमें अपने ही कई सवालों…