Ramkatha 
by Ritika

Ramkatha by Ritika

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Ramkatha by Ritika episodes

  • दुष्ट आगंतुक-81
    आश्रम में राम और लक्ष्मण को न पाकर इन्द्र पुत्र जयंत, सीता पर झपट पड़ा।सीता ने बहादुरी से उसका सामना किया।तक तक राम स्वय वहां पहुंच गए और उन्होंने जयंत की एक आँख बेंध दी।दर्द से कराहता वो आश्रम की सीमा से बाहर भाग गया।
    14 min
  • विश्वामित्र और सुकंठ -1
    विश्वामित्र के आश्रम में राक्षसो का आतंक फैल चुका था।विश्वमित्र के प्रिय शिष्य नक्षत्र और सुकंठ इन राक्षसो का ग्रास बन चुके थे।कुलपति अब आश्रम वासियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो उठे थे।
    8 min
  • मुखर की बदले की भावना-80
    इस पूरे घटनाक्रम से मुखर के अंदर दबी राक्षसों से बदले की भावना जाग उठी।लेकिन राम ने उसे उचित समय आने चोट करने की सलाह दी। उधर सीता और सुमेधा धीरे धीरे सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हो गए थे।
    11 min
  • सुमेधा और झींगुर की वापसी-79
    तुंभरण को बन्दी बनाकर उसे सीमा से बाहर कर दिया गया। राक्षसों का बुरा हाल देखकर गांव वालों में हिम्मत आ गई। वो सब झींगुर और सुमेधा के साथ राम के आश्रम में पहुंचे।राम को धन्यवाद दिया और आगे का मोर्चा स्वयं संभालने को तैयार हो गए।
    13 min
  • तुंभरण और उदघोष का सामना-78
    राक्षसों ने रात में मौका पाकर राम के आश्रम के द्वार पर आग लगा दी पर राम अपने साथियों के साथ सचेत थे।सभी ने मिलकर राक्षसों पर तीर बरसाने शुरू कर दिए। तुंभरण को बंदी बना लिया गया।वो राम के सामने डर से घिघियाने लगा।राम ने तुंभरण को उदघोष के साथ द्वंद युद्ध करने के लिए ललकारा। पर तुंभरण उदघोष का साहस देखकर डर गया। राम ने उदघोष से तुंभरण को आश्रम की सीमा से खदेड़ने का आदेश दिया।
    12 min
  • राक्षसों से लड़ने की तैयारी-77
    राक्षसों को कुंभकार के गांव से भागने का समाचार मिल गया था।अब वो राम के आश्रम पर चढ़ाई की योजना बना रहे थे। इधर राम ने भी अपनी पूरी तैयारी कर ली थी। उन्होंने लक्ष्मण और उदघोष को रात में पहरे के लिए नियुक्त किया था।वे दोनों ही कवच धारण कर के अपने धनुष बाण लेकर पेड़ पर पहरा देने लगे।
    11 min
  • पिता दशरथ के देहावसान का समाचार-76
    सुमेधा के चले जाने से उदघोष बहुत विचलित था, पर राम ने उदघोष को ढांढस बंधाया और उसमे उत्साह का संचार किया। और उसकी शास्त्र शिक्षा शुरू कर दी।उसी शाम वाल्मीकि आश्रम से चेतन आया जो ऋषि भारद्वाज का संदेश लाया था। और इस तरह उसने राम को पिता दशरथ की मृत्यु का दुखद समाचार सुनाया।
    11 min
  • उदघोष की हताशा-75
    उस रात भोजन के पश्चात उदघोष, सुमेधा और झींगुर आश्रम में ही रुके। पर दूसरे दिन सुबह झींगुर और सुमेधा आश्रम से गायब थे। पहले तो उदघोष को लगा कि राक्षस उन दोनों को बलात उठा कर ले गए पर अतिथिशाला में किसी भी तरह के विरोध के चिन्ह न दिखने के कारण उदघोष ने ये अनुमान लगाया कि दोनों अपनी इच्छा से आश्रम छोड़ कर गांव वापस भाग गए हैं। उदघोष बहुत दुखी और हताश था।
    10 min
  • कुंभकार का साहस- 74
    कुंभकार राम का शस्त्रागार देखकर चकित रह गया। राम ने उसे हिम्मत बंधाई। वो वापस लौटकर सुमेधा और उसके पिता झींगुर को साथ ले आया। और इस तरह कुंभकार अपने प्रति हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ खड़ा हो गया और शास्त्र शिक्षा सीखने का निश्चय कर लिया।
    14 min
  • मुखर की कथा- 73
    मुखर ने बताया कि किस प्रकार राक्षसों ने उसके पूरे परिवार का अंत कर दिया। उसने राम से शस्त्राभ्यास सीखने की प्रार्थना की। जिसे राम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसी बीच सुमेधा द्वारा भेजा गया कुंभकार भी राम से मिला और अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के विषय में बताया।
    14 min

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एक ऐसी राम कथा जो सामयिक,लौकिक और तर्कसंगत है।ये किसी अदभुत देश या काल की कहानी नही बल्कि इसी लोक और काल की कहानी है जो हमारे ही जीवन से जुड़ी समस्याओं पर आधारित है।इस कहानी में हमें अपने ही कई सवालों…