Ramkatha 
by Ritika

Ramkatha by Ritika

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Ramkatha by Ritika episodes

  • अहिल्या की मुक्ति -42
    राम समझ गए थे कि गुरु विश्वामित्र द्वारा अहिल्या की कथा सुनाने का कोई मतलब ज़रूर है। अहिल्या के उस वीरान से आश्रम में विश्वामित्र के साथ दो राजसी युवकों को देखकर अहिल्या को उत्सुकता हुई कि आख़िर इतने वर्षों के बाद उसके कुटीर में कौन और क्यों आया है।
    13 min
  • कुलपति गौतम द्वारा इंद्र को श्राप-41
    गौतम नए आश्रम के कुलपति बन गए।लेकिन वो अहिल्या को छोड़ कर आने से दुखी भी थे। यज्ञ के उपरांत ही गौतम ने इंद्र को श्राप दे दिया कि अब इंद्र पूज्यनीय नही होंगे। राजा सीरध्वज ने उनके इस श्राप को कार्यान्वित करने का आश्वासन भी दिया। राम और लक्ष्मण दोनों ही अहल्या के एकाकी जीवन जीने से बहुत आहत थे।
    13 min
  • एकाकी अहिल्या -40
    अंततः अहिल्या ने गौतम को जनकपुरी जाने के लिए मना लिया।न चाहते हुए भी गौतम को अहिल्या को छोड़कर जाना ही पड़ा। ऐसा होने के बाद अहिल्या आश्रम में अकेली रह गई पर इंद्र से प्रतिशोध लेना उसके अकेले रह जाने से कहीं अधिक आवश्यक था।
    14 min
  • सदानीरा का आगमन-39
    जनकपुरी से सदानीरा गौतम ऋषि के आश्रम आई। वो वास्तव में अपने पति आचार्य ज्ञानप्रिय का संदेश लाई थी। नया आश्रम तो बन गया था पर नए कुलपति की नियुक्ति नही हो पा रही थी क्योंकि राजा सीरध्वज गौतम के अलावा अन्य किसी को भी कुलपति के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।पर गौतम ने मना करते हुए कहा कि वो अहिल्या को छोड़कर नही का सकते थे।
    13 min
  • गौतम की महत्वाकांक्षा -38
    गौतम ने अहिल्या को अपनी महत्वकांक्षा के बारे में बताया कि कैसे वो शुरु से ही सर्वश्रेष्ठ ऋषि बनने की आकांक्षा रखते थे।
    13 min
  • अहिल्या का अंतर्द्वंद्व-37
    गौतम ऋषि का पूरा आश्रम खाली हो गया था। गौतम अब आश्रम के कुलपति नही रह गए थे वो अब साधारण गृहस्थ मात्र थे। अहिल्या इस पूरी स्थिति के लिए स्वयं को ज़िम्मेदार मान रही थी।
    15 min
  • अहिल्या का संताप-36
    अहिल्या स्वयं को पतित मान बैठी थी।उसे चिंता थी कि अब वह ऋषि गौतम की पत्नी और शत की माँ कहलाने के योग्य नहीं रही।उधर ऋषि गौतम भी इसी उहापोह में थे कि वो इंद्र से कैसे प्रतिशोध लें। क्योंकि इंद्र से प्रतिशोध लेने के लिए उन्हें ऋषि पद पर रहना जरूरी है और उनका ऋषि पद तभी बना रह सकता था जब वे अहिल्या का त्याग कर दें।जो उनके लिए बहुत कठिन था।
    11 min
  • अवसरवादी अमितलाभ -35
    समस्त ऋषि समुदाय अहिल्या को दोषी मान चुका था। इस सुअवसर का लाभ उठाते हुए उपकुलपति अमितलाभ ने ऋषि समुदाय को एकत्रित किया और आश्रम के भ्रष्ट होने की बात कही और एक नया आश्रम बनाने का प्रस्ताव दिया। जिसके कुलपति या तो गौतम होंगे या वो स्वयं।गौतम तभी कुलपति रह पाएंगे जब वो अहिल्या का त्याग कर देंगे,जिसकी आशा अमितलाभ को कम ही थी और ऐसे में अमितलाभ के कुलपति बनने की संभावना निश्चित थी।
    13 min
  • विश्वामित्र की आत्मग्लानि -34
    गौतम ने देवराज इंद्र को अहिल्या के दोषी ठहराते हुए ऋषि समाज से न्याय की गुहार लगाई परंतु किसी मे भी इंद्र को दंडित करने का साहस नहीं था। स्वयं विश्वामित्र भी वहाँ उपस्थित थे पर उन्होंने भी इंद्र के विरुद्ध कुछ नहीं कहा। इस बात ग्लानि उन्हें वर्षों से कोंच रही थी। उन्होंने उस समय कुछ न कर पाने का अपराध राम लक्ष्मण के सम्मुख स्वीकार किया।
    14 min
  • इंद्र का प्रतिकार- 33
    इंद्र गौतम ऋषि के कुटीर से निकलते समय सारा दोष अहिल्या पर लगा गया। गौतम पूरी तरह से टूट चुके थे, पर उन्हें अपनी पत्नी अहिल्या पर पूरा विश्वास था।उन्होंने इंद्र का प्रतिकार करने का संकल्प लिया।
    12 min

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एक ऐसी राम कथा जो सामयिक,लौकिक और तर्कसंगत है।ये किसी अदभुत देश या काल की कहानी नही बल्कि इसी लोक और काल की कहानी है जो हमारे ही जीवन से जुड़ी समस्याओं पर आधारित है।इस कहानी में हमें अपने ही कई सवालों…