रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ Rabindranath Tagore ki Kahaniyan

रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ Rabindranath Tagore ki Kahaniyan

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रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ Rabindranath Tagore ki Kahaniyan episodes

  • शकुंतला बृजमोहन के कहानियां : अजीब फैसला, Ajeeb Faisla
    Stories of Shakuntala Brajmohan : Ajeeb Faisla
    Audiobook : Chakrvyuh
    Voice : Sangya Tandon
    शकुंतला बृजमोहन के कहानियां : अजीब फैसला
    कहानी संग्रह चक्रव्यूह का आडियो रूपांतरण                           
    वाचक स्वर : संज्ञा टंडन
    14 min
  • रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ : अपरिचिता, Aparichita
    विवाह की उम्र होने पर अपने भावी जीवन साथी के लिए मन में कल्पना होना हमेशा से लड़के और लड़की होता रहा है। पर पहले के ज़माने में बिना कन्या को देखे-मिले बुज़ुर्गों के आदेश पर विवाह हुआ करते थे। दान-दहेज के मामले भी बुज़ुर्ग अपने हिसाब से देखते थे। लेकिन क्या हमेशा वर पक्ष वाले ही सही होते हैं....क्या कन्या पक्ष वालों को कुछ बोलने का अधिकार नहीं हो सकता...उनकी नियति में सिर्फ सिर झुकाकर वर पक्ष की बातों को मानना ही होता है.....गुरुदेव ने अपने ज़माने की परिस्थितियों के अनुसार "अपरिचिता" कहानी लिखी थी, जो आज भी समसामायिक है। नायक के लिए कन्या अपरिचिता थी...क्या वो कभी परिचिता बन पायी....सुनें कहानी.....
    37 min
  • शकुंतला बृजमोहन के कहानियां : हादसा, Hadsa
    Stories of Shakuntala Brajmohan : Bagi
    Audiobook : Chakrvyuh
    Voice : Sangya Tandon
    शकुंतला बृजमोहन के कहानियां : बागी 
    कहानी संग्रह चक्रव्यूह का आडियो रूपांतरण                           
    वाचक स्वर : संज्ञा टंडन
    25 min
  • दीदी, Didi, रवीद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ
    पुराने समय में जब एक ही माँ बाप से कई भाई बहन हुआ करते थे, तब घर के बड़े बच्चे छोटों को पालने में मदद किया करते थे। प्रस्तुत कहानी में इकलौती तारा के भाई तब पैदा हुआ, जब उसके खुद के बच्चे हो चुके थे। बुज़ुर्ग माता पिता को जल्दी जाना ही था। अपने परिवार और भाई के बीच विपरीत स्थितियों के बीच सामंजस्य बिठाना उसके लिए कितना कठिन पड़ा, सुनिए गुरुदेव की कहानी दीदी में......
    29 min
  • रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ : दीदी, Didi
    पुराने समय में जब एक ही माँ बाप से कई भाई बहन हुआ करते थे, तब घर के बड़े बच्चे छोटों को पालने में मदद किया करते थे। प्रस्तुत कहानी में इकलौती तारा के भाई तब पैदा हुआ, जब उसके खुद के बच्चे हो चुके थे। बुज़ुर्ग माता पिता को जल्दी जाना ही था। अपने परिवार और भाई के बीच विपरीत स्थितियों के बीच सामंजस्य बिठाना उसके लिए कितना कठिन पड़ा, सुनिए गुरुदेव की कहानी दीदी में......
    29 min
  • शकुंतला बृजमोहन की कहानियाँ : मृगतृष्णा, Mrigtrishna
    तीन पीढ़ी पहले के एक राजवैद्य, जिनकी किताबें और दवाओं की शीशियाँ उन्हें न नष्ट करने की हिदायत के कारण एक कमरे में उपेक्षित सी पड़ी थीं। इस पीढ़ी के किसी को भी उनमें कोई रुचि न थी। एक दिन घर के लड़के ने किसी तकलीफ के चलते उनकी दवाओं में से एक का सेवन कर लिया। उसके बाद तो उसकी ज़िंदगी के साथ पूरे घर का ही बहुत कुछ बदलने लगा....स्थितियाँ इतनी ज़्यजदा बिगड़ गईं कि सुधारना असंभव हो गया.....फिर एक दिन...........आज की एक ज्वलंत समस्या पर चक्रव्यूह कहानी संग्रह की छठी कहानी सुनिए, मृगतृष्णा.....
    14 min
  • रवीद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ, छुट्टियों का इंतज़ार, Chutiyon ka intzar
    एक बेहद उद्दंड बच्चा, जिसे हम आज हाइपर एक्टिव कहते हैं, को सुधारने या संभालने का तरीका अगर सही नहीं हुआ...तो उसके भविष्य का क्या हश्र हो सकता है---गुरुदेव ने ये बात अपने ज़माने मेन ही समझ ली थी। सुनें कहानी छुट्टियों का इंतज़ार....
    10 min

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