रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ Rabindranath Tagore ki Kahaniyan

रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ Rabindranath Tagore ki Kahaniyan

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रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ Rabindranath Tagore ki Kahaniyan episodes

  • शकुंतला बृजमोहन की कहानियाँ : पथ प्रदर्शिका, Path Pradarshika
    अविनाश ने ज्योति को चाहा, शादी के बाद बिना चेहरा देखे ही बोल दिया कि मेरे मन मंदिर में कोई और है। ज्योति समझ ही न पायी कि गलती या गलतफहमी कहाँ है। पिताजी के पास वापिस आकर कैसे किया उसने सब कुछ ठीक....सुनिए शकुंतला ब्रजमोहन के कहानी संग्रह चक्रव्यूह की पाँचवी कहानी......
    22 min
  • रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियाँ : पिंजर, Pinjer,
    iएक डॉक्टर को पढ़ाई के समय हड्डियों का ढाँचा यानि पिंजर सामने रखकर पढ़ाया जाता है। पिंजर को देखकर आम व्यक्ति या बच्चे तो डर भी जाते हैं, लेकिन इस कहानी के नायक की धारणा थी कि इसमें बरसों तक बसने वाली आत्मा कभी तो अपना पुराना घर देखने आती होगी। बाकी छात्र उसकी इस सोच की हंसी उड़ाते थे। परंतु उसकी ये धारणा सही साबित हुई। उस पिंजर की मालकिन वहाँ आई और अपनी कहानी भी सुनाई....क्या थी वो कहानी...सुनिए रवीद्र नाथ टैगोर की कहानी पिंजर में..... 

    20 min
  • शकुंतला बृजमोहन की कहानियाँ : सिसकती ज़िंदगी, Sisakti Zindagi
    प्रस्तुत कहानी 'सिसकती ज़िंदगी' लेखिका शकुंतला बृजमोहन के कहानी संग्रह 'चक्रव्यूह' की चौथी कहानी है। वेणु और शैलेश की एक ऐसी प्रेम कहानी जिसमें एक भूल से उपजी परेशानियाँ, एक हादसे के कारण विरह वेदना और एक गलतफहमी के कारण दोनों की ज़िंदगी कुछ यूँ बुनी हुई है कि प्रेम के बावजूद सिसकने को मजबूर हो गयी....
    19 min
  • रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानियां : हेमू, Hemu,
    रवीद्र नाथ टैगोर के उपन्यास, बड़ी व छोटी कहानियों में 'हेमू' को छोटी कहानियों के श्रेणी में रखा गया है। हर माता पिता अपनी बेटी को संस्कार देते हैं, हर खूबी को उसमें डालने की कोशिश करते हैं, पाल पोसकर तयार करके उसको दूसरे घर को समृद्ध करने के लिए दान कर देते हैं। अब ये हर लड़की की किस्मत कि उसको कैसा घर-परिवार-पति मिले। प्रस्तुत कहानी कि नायिका अपने पिता की चहेती शिशिर उर्फ हेमू भी कन्यादान के पश्चात दूसरे घर आई। पति उसको समझने वाला था, किन्तु परिवार के अन्य सदस्यों की नज़र में खरा उतरने के लिए उसने खुद को तपा डाला, अपनी भावनाओं को जला डाला, इच्छाओं को दफन कर दिया .....फिर भी क्या वो सामंजस्य बैठा पायी? अपने लिए खुशियाँ जुटा पायी? पति का साथ दे पायी?
    37 min
  • शकुंतला बृजमोहन की कहानियां : एक ही रास्ता, Ek hi Rasta
    ये कहानी शकुंतला बृजमोहन के कहानी संग्रह चक्रव्यूह की तीसरी कहानी है।  
    निशा ने अपने सौतेले बेटे को मारने के बाद खुद ज़हर खा लिया। उसने अपनी ससुराल के दो चिरागों को बचाने के लिए और एक चिराग की करतूतें सबके सामने लाने के लिए ऐसा किया। क्या थीं ऐसी परिस्थितियाँ, जिनके कारण उसको ऐसा करना पड़ा और ऐसा करने पर उसको निशा की जगह उषा की किरणों से खानदान को बचाने वाली कहकर पुरस्कृत भी किया गया......सुनें कहानी एक ही रास्ता।
    21 min
  • रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानियां : अतिथि, Atithi
    • रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1940) उन साहित्य-सृजकों में हैं, जिन्हें काल की परिधि में नहीं बाँधा जा सकता। रचनाओं के परिमाण की दृष्टि से भी कम ही लेखक उनकी बराबरी कर सकते हैं। उन्होंने एक हज़ार से भी अधिक कविताएँ लिखीं और दो हज़ार से भी अधिक गीतों की रचना की। इनके अलावा उन्होंने बहुत सारी कहानियाँ, उपन्यास, नाटक तथा धर्म, शिक्षा, दर्शन, राजनीति और साहित्य जैसे विविध विषयों से संबंधित निबंध लिखे। उनकी दृष्टि उन सभी विषयों की ओर गई, जिनमें मनुष्य की अभिरुचि हो सकती है। कृतियों के गुण-गत मूल्यांकन की दृष्टि से वे उस ऊँचाई तक पहुँचे थे, जहाँ कुछेक महान् रचनाकर ही पहुँचते हैं। जब हम उनकी रचनाओं के विशाल क्षेत्र और महत्व का स्मरण करते हैं, तो इसमें तनिक आश्चर्य नहीं मालूम पड़ता कि उनके प्रशंसक उन्हें अब तक का सबसे बड़ा साहित्य-स्रष्टा मानते हैं।
    50 min
  • शकुंतला बृजमोहन की कहानियां : अबोध : Abodh
    ‘‘मेरी कहानियाँ आधुनिकता का मुखौटा ओढ़े सांस्कृतिक
    प्रतिमानों का पर्दाफाश ही नहीं करतीं बल्कि ऐसे
    नवानाढ्य समाज को बेनकाब करती हैं जो जीवन के
    गहरे यथार्थ से दूर हैं।’’
    शकुन्तला ब्रजमोहन
    47 min
  • रवींद्र नाथ टैगोर की कहानियां : श्रद्धांजलि, Shraddhanjali
    • रवीन्द्रनाथ ठाकुर (7 मई 1861–7 अगस्त 1941), जिनको गुरुदेव दे नाम के साथ भी जाना जाता है, प्रसिद्ध बंगाली लेखक, संगीतकार, चित्रकार और विचारक थे। ये  उन साहित्य-सृजकों में हैं, जिन्हें काल की परिधि में नहीं बाँधा जा सकता। रचनाओं के परिमाण की दृष्टि से भी कम ही लेखक उनकी बराबरी कर सकते हैं। उन्होंने एक हज़ार से भी अधिक कविताएँ लिखीं और दो हज़ार से भी अधिक गीतों की रचना की। इनके अलावा उन्होंने बहुत सारी कहानियाँ, उपन्यास, नाटक तथा धर्म, शिक्षा, दर्शन, राजनीति और साहित्य जैसे विविध विषयों से संबंधित निबंध लिखे। उनकी दृष्टि उन सभी विषयों की ओर गई, जिनमें मनुष्य की अभिरुचि हो सकती है। कृतियों के गुण-गत मूल्यांकन की दृष्टि से वे उस ऊँचाई तक पहुँचे थे, जहाँ कुछेक महान् रचनाकर ही पहुँचते हैं। जब हम उनकी रचनाओं के विशाल क्षेत्र और महत्व का स्मरण करते हैं, तो इसमें तनिक आश्चर्य नहीं मालूम पड़ता कि उनके प्रशंसक उन्हें अब तक का सबसे बड़ा साहित्य-स्रष्टा मानते हैं। इस पॉडकास्ट  में रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियों को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा  है।
    28 min
  • शकुंतला बृजमोहन की कहानियां : देशद्रोही : Deshdrohi
    ‘‘मेरी कहानियाँ आधुनिकता का मुखौटा ओढ़े सांस्कृतिक
    प्रतिमानों का पर्दाफाश ही नहीं करतीं बल्कि ऐसे
    नवानाढ्य समाज को बेनकाब करती हैं जो जीवन के
    गहरे यथार्थ से दूर हैं।’’
    शकुन्तला ब्रजमोहन
    16 min

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