Saahitya Ki Orr

Saahitya Ki Orr

By Renu ArunArtsBooks
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Saahitya Ki Orr episodes

  • Malti Joshi Story - Sapne
    एक teenager girl के सपने और नारी सुलभ संवेदना की कहानी - सपने
    मालती जोशी की कहानी
    18 min
  • Mamta kalia story -Gussa
    उन्चास साल की पत्नी से दुखी होकर एक पति ने आखिर क्यों घर छोड़ दिया? सुनिए कहानी, गुस्सा!!
    15 min
  • Shamshaan by Mannu Bhandari
    एक शमशान की दिली तमन्ना और इंसान के प्रति उसके विश्वास की कहानी। कैसे इंसान के प्रति उसका नज़रिया बदलता है और फिर क्या होता है ? सुनिए ये अद्भुत कहानी और हमें comments करके बताएं कि आपको ये कहानी कैसी लगी ?
    15 min
  • मछुए की बेटी : सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी
    तिन्नी, तो तू मूझसे ब्याह क्यों नहीं कर लेती? फिर हम दोनों जीवन भर साथ-साथ डांड़ चलाते रहेंगे.’
    क्षणभर के लिए तिन्नी के चेहरे पर लज्जा की लाली दौड़ गई. किन्तु तुरंत ही वह संभलकर बोली,‘कहने के लिए तो कह गए. मनोहर! किन्तु आज मैं ब्याह के लिए तैयार हो जाऊं तो?’
    ‘तो मैं ख़ुशी के मारे पागल हो जाऊं.’
    ‘फिर उसके बाद?’
    ‘फिर मैं तुम्हें रानी बनाकर अपने आपको दुनिया का बादशाह समझूं.’
    ‘अपने आपको बादशाह समझोगे, क्यों मनोहर? और मैं बनूंगी रानी. पर मैं रानी बनने के बाद डांड़ तो...
    13 min
  • Subhadra kumari chauhan : Abhiyukta
    पहले जब इन्होंने मुझे गुण्डों से बचाकर अपने घर में आश्रय दिया था, तब मेरे हृदय में इनके लिए श्रद्धा और कृतज्ञताके भाव थे। परन्तु वे धीरे-धीरे घृणा और तिरस्कार में बदल गये। मैंने देखा कि बैरिस्टर साहब की खुद की नीयत ठिकाने नहीं है। वह मुझे अपनी वासना का शिकार बनाने पर तुले हुए हैं। धीरे धीरे वह मुझे हर तरह की लालच दिखाने लगे और धमकियां देने ...
    12 min
  • अनुरोध : सुभद्रा कुमारी चौहान की बहुत ही अद्भुत कहानी
    उन्होंने अपने जेब से एक पत्र निकाल कर वीणा के सामने फेंक दिया और शान्त स्वर में बोले-
    'मुझे तो कोई आपत्ति नहीं आप इस पत्र को पढ़ लीजिए। इसके बाद भी यदि आपकी यही धारणा रही कि मैं न जाऊँ तो जब तक आप न कहेंगी मैं न जाऊँगा ।'
    वीणा ने सर हिलाते हुए कहा-'जी नहीं,रहने दीजिए; मैं कोई पत्र-वत्र न पढ़ूँगी और न आपको...
    8 min
  • करुणा से भरी एक मूक प्रेम कथा, "थाती" : सुभद्रा कुमारी चौहान
    मैं जरा हंसी और अपना घूँघट सरकाने लगी । मुझे घूँघट सरकाते देख वे जरा मुस्कराए, मैं भी जरा हंस पड़ी पर कुछ बोली नहीं। उनके नौकर आए और देखते-ही-देखते रस्सी समेत घड़ा निकाल लिया गया। मैं घड़ा उठाकर अपने घर की तरफ चली। शब्दों में नहीं, किंतु कृतज्ञता भरी आँखों से मैंने उनसे कहा, “मैं आपके इस उपकार का बदला जीवन में कभी न चुका सकूँगी।” करीब पौन घंटा कुएँ पर लग गया। अम्मा जी की घुड़कियों का डर तो लगा ही था। जल्दी-जल्दी आई, घड़े को घिनौची पर रख, रस्सी को खूँटी पर टाँगने के लिए मैंने ज्योंही हाथ ऊपर उठाया, देखा कि एक हाथ का
    12 min
  • जंबक की डिबिया : सुभद्रा कुमारी चौहान
    एक दिन मैं कॉलेज जा रहा था. देखा केठानी सिर पर गारे का तसला रखे चाली पर से कारीगरों को दे रहा है. चालीस फ़ुट ऊपर चाली पर चढ़ा आह बूढ़ा केठानी, खड़ा काम कर रहा था. मेरी अंतरात्मा ने मुझे काटा. यह सब मेरे कारण है और मैंने निश्चय कर लिया कि शाम को लौट कर मां से कहूंगा अब केठानी को बुला लो. वह बहुत बूढ़ा और कमज़ोर हो गया है. इतनी कड़ी सज़ा उसे न मिलनी चाहिए. दिन भर मुझे उसका ख़्याल बना रहा. शाम ज़रा जल्दी लौटा. रास्ते पर ही रायसाहब का घर था. मजदूरों में विशेष प्रकार की हलचल थी. सुना कि एक मजदूर ....
    7 min

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