दो बचपन के दोस्त जब बीस साल बाद मिलते हैं । पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। इन्हीं यादों का हिस्सा था ‘गुल्ली-डंडा’ का खेल। पुनः वह गुल्ली-डंडा खेलने का निर्णय लेते हैं। लेकिन उन्हें महसूस होता है कि अब सबकुछ बदल चुका है। इसी बदलाव को इस कहानी में दिखाया गया है।