Sambandh Ka Ke Ki

Sambandh Ka Ke Ki

By Himanshu BhagatArtsBooks
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Sambandh Ka Ke Ki episodes

  • एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी

    आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ ही साथ मिलेगा, परेश नाथ, दिना नाथ मल्होत्रा, और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज प्रकाशक और संपादक के हिंदी भाषा के प्रसार और विकास में योगदान की कहानी। सुनिए डॉ मंधवानी के साथ एक चर्चा उनकी रोचक किताब 'एवरीडे रीडिंग' पर।

    (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. इंस्टाग्राम पर आकृति मंधवानी
    2. एक्स (ट्विटर) पर आकृति मंधवानी
    3. 'एवरीडे रीडिंग' अमेज़न पर

    ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1 hr 9 min
  • एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे

    ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत के आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म के प्रसार को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९५२ में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण की स्थापना की। वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों के बीच हिन्दू धर्म व संस्कृति के प्रचार और समाज सेवा के राह को अपनाया। समय के साथ, वनवासी कल्याण आश्रम ने सत्तारूढ़ ताकतों द्वारा आदिवसीययों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ उठाई। मगर जैसा डॉ कमल नयन चौबे अपनी किताब 'आदिवासी ऑर वनवासी' में दिखलाते हैं, वनवासी कल्याण आश्रम ने कभी भी खुलकर आदिवासियों के हक़ की लड़ाई का समर्थन नहीं किया और न ही इस संघर्ष में उनका साथ दिया। सुनिए किताब पर एक चर्चा डॉ चौबे के साथ।

    (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. फेसबुक पर डॉ कमल नयन चौबे  
    2. 'परख विथ कमल नयन चौबे' – ‘यु ट्युब’ चैनल
    3. 'आदिवासी ऑर वनवासी' अमेज़न पर
    4. डॉ चौबे की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  

    (सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1 hr 11 min
  • एपिसोड 40: 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर − द मेनी लाईव्स ऑफ़ अज्ञेय' − अक्षय मुकुल

    कई लोगों का मानना है कि प्रेमचंद के 'गोदान' के बाद हिंदी साहित्य का सर्वोच्च उपन्यास है, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की कृति 'शेखर : एक जीवनी'। सच्चिदानंद वात्स्यायन को 'अज्ञेय' उपनाम स्वयं प्रेमचंद ने दिया था और, आगे चल के, फणीश्वर नाथ रेणु ने एक लेख में उनको − 'अलख, अचल, अगम, अगोचर, अजब, अकेला, अज्ञेय' कहा था। अपने जीवन काल में अज्ञेय ने कविताएं, उपन्यास, लघु-कहानियाँ, निबंध, यात्रा-वृतांत, और अख़बार व पत्रिकाओं के लिए अनेक आलेख लिखे। अज्ञेय को हिंदी साहित्य में आधुनिकतावाद यानी 'मॉडर्निज़्म' का जनक माना जाता है। अक्षय मुकुल की लिखी हुई, अज्ञेय की जीवनी का शीर्षक है 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर' यानी, लेखक, बाग़ी, सैनिक, और प्रेमी। ये बहुप्रशंसित जीवनी अज्ञेय के जीवन के हर एक पहलु पर प्रकाश डालती है।

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    1. 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर' अमेज़न पर  
    2. अक्षय मुकुल की अन्य किताबें अमेज़न पर
    3. एक्स (ट्विटर) पर अक्षय मुकुल  
    4. अज्ञेय की अन्य किताबें अमेज़न पर


    (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1 hr 44 min
  • एपिसोड 39: 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' − रक्षंदा जलील

    क़रीब एक हज़ार साल से, दिल्ली हिन्द-उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों पर शासन करने वाले अलग-अलग साम्राज्यों की राजधानी रही है। रक्षंदा जलील अपने आप को पक्की दिल्ली-वाली मानती हैं और वे संपादक हैं 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' की। इस किताब में ३२ कहानियाँ हैं – जो, या तो लघु कथाएँ हैं या उपन्यास का अंश हैं। इन कहानियाँ को पढ़ के हम वाक़िफ़ होते हैं सन 1857 से लेकर आज तक की दिल्ली के अच्छे-बुरे, मीठे-वीभत्स पहलुओं से।

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    1. इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), और फेसबुक पर डॉ रक्षंदा जलील
    2. 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' अमेज़न पर
    3. एपिसोड 12: 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' − रक्षंदा जलील
    4. 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' अमेज़न पर
    5. रक्षंदा जलील द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर


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    1 hr 2 min
  • एपिसोड 38: 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' − अनुमेहा यादव

    आज़ादी के बाद, १९५० और १९६० के दशकों में, भारत को अपनी आबादी को भुखमरी से बचाने के लिए अक्सर अमरीकी अनाज पर निर्भर होना पड़ता था। फिर 'हरित क्रांति' यानी 'ग्रीन रेवोलुशन' के बदौलत, वर्ष १९७१ तक भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया। ये संभव हुआ, नए किस्म के उपजाऊ अनाज, सिंचाई व्यवस्था में बढ़ोत्तरी, और रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाइयों के व्यापक इस्तेमाल से। लेकिन आत्मानिर्भरता के लिए देश को कीमत अदा करनी पड़ी। क्या असर हुआ है नई खेती प्रणाली का छोटानागपुर प्रान्त के आदिवासी गाँवों में? चित्रों समेत, एक सरल कहानी द्वारा इसका वर्णन किया है अनुमेहा यादव ने अपनी पुस्तक 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' में, जो बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए लिखी गयी है।

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    1. एक्स (ट्विटर) पर अनुमेहा यादव
    2. वर्डप्रेस पर अनुमेहा के ब्लॉग
    3. 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' अमेज़न पर
    4. छोटानागपुर क्षेत्र में धान के देसी बीजों के पुनः प्रयोग पर 'द वायर' में अनुमेहा का आलेख  
    5. कृषि वैज्ञानिक डॉ अनुपम पॉल के साथ धानके बीजों के संरक्षण पर 'द वायर' में अनुमेहा का इंटरव्यू
    6. 'प्लास्टिक' 'फोर्टीफाईड' चावल का आदिवासी क्षेत्रों में वितरण पर 'द वायर' में अनुमेहा की फिल्म
    7. कृत्रिम चावल के राशन द्वारा वितरण पर 'द हिन्दू' के साथ अनुमेहा का पॉडकास्ट


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    1 hr 1 min
  • एपिसोड 37: 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' − संघमित्रा चक्रवर्ती

    फिल्म जगत की एक मशहूर 'एक्टर-डायरेक्टर' जोड़ी थी, सत्यजीत रे और शौमित्रो चटर्जी की। शौमित्रो ने रे की २८ फिल्मों में से १४ में मुख्य किरदार निभाया। इन १४ फिल्मों के अलावा शौमित्रो ने और भी बहुत कुछ किया। अपने ६० साल के करियर में उन्होंने पुरे ३०० फिल्मों में काम किया। साथ-साथ, वे एक 'थिएटर-एक्टर', नाटककार, लेखक, कवि, संपादक, और चित्रकार भी थे। जनवरी 2020 में शौमित्रो ८५ साल के हो गये और उस साल उनकी सात फिल्में रिलीज़ हुई थीं। उसी वर्ष, शौमित्रो का देहांत हो गया। उनकी जीवनी 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' में संघमित्रा चक्रवर्ती लिखती हैं कि सत्यजीत रे के गुज़र जाने के बाद बंगाल के पास सिर्फ शौमित्रो ही बचे थे। सुनिए संघमित्रा के साथ उनके इस कथन और शौमित्रो चटर्जी के जीवन के अन्य पहलुओं पर एक चर्चा।

    (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. इंस्टाग्राम पर संघमित्रा चक्रवर्ती
    2. एक्स (ट्विटर) पर संघमित्रा चक्रवर्ती  
    3. फेसबुक पर संघमित्रा चक्रवर्ती  
    4. 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' अमेज़न पर
    5. संघमित्रा चक्रवर्ती का अपना वेबसाइट  


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    1 hr 23 min
  • एपिसोड 36: 'अपरूटेड' − ईता मेहरोत्रा

    विश्व भर में विकास के नाम पर जंगल काट कर ख़त्म किये जा रहे हैं। ऐसे में, अगर सरकार जंगल के एक टुकड़े को नेशनल पार्क घोषित कर देती है और वहाँ आदमी के निवास व आवाजाही को वर्जित कर देती है, तो इस को अच्छा ही माना जायेगा। मगर सदियों से इन्ही जंगलों का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इनमे वास करने वाले आदिवासी। अगर वन संरक्षण के नाम पर उनको किसी नेशनल पार्क से जबरन निकाल दिया जाय, तो क्या ये उचित होगा? आज, उत्तराखंड की वन-गूजर जनजाति इसी विडम्बना का शिकार है। ईता मेहरोत्रा अपनी ग्राफ़िक या चित्रपट शैली में बनाई गई पुस्तक 'अपरूटेड' में वन गुज़रों की व्यथा और उनकी परिस्थितियों की दृढ़ता से सामना करने की क्षमता -- दोनों पर प्रकाश डालती हैं। सुनिए ईता के साथ एक चर्चा उनकी संवेदनशील पुस्तक पर।

    (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. इंस्टाग्राम पर ईता मेहरोत्रा
    2. 'अपरूटेड' अमेज़न पर
    3. 'शाहीन बाघ' अमेज़न पर
    4. एपिसोड 13: ‘स्टार्री स्टार्री नाईट’ – नंदिता बासु


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    47 min
  • एपिसोड 35: 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' − प्रेम शंकर झा

    प्रेम शंकर झा की नई किताब का नाम है − 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी'; हिंदी में कहें तो, 'भारतीय लोकतंत्र का विध्वंस'। झा को पत्रकारिता करते हुए पचास से ज़्यादा साल हो चुके हैं और वे देश के प्रतिष्ठित अखबारों में संपादक रह चुके हैं। उनका मानना है कि आज भारत में लोकतंत्र अपने अंतिम चरण पर है। इसके चारों स्तम्भ − कार्यपालिका (एक्सीक्यूटिव), विधान मंडल (लेजिस्लेचर), न्यायपालिका, और प्रेस या मीडिया − खोखले हो चुके हैं। क़िताब में झा बताते हैं कि किन कारणों से भारत की राजनीति और भारतीय समाज, दक्षिणपंथी राजनीति के चपेट में आ गए हैं। यानी, किन कारणों से भारत में हिंदुत्व की राजनीति का प्रभाव इतना बढ़ गया है। और, क्यों इस राजनीती से देश में लोकतंत्र और देश की अखंडता − दोनों को गंभीर खतरा है।

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    1. फेसबुक पर प्रेम शंकर झा
    2. 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' अमेज़न पर
    3. प्रेम शंकर झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर


    ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1 hr 14 min
  • एपिसोड 34: 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' − अशोक वाजपेयी

    आज़ाद भारत के महान चित्रकार सय्यद हैदर रज़ा ने अपने लम्बे जीवन के ६० वर्ष फ्रांस में गुज़ारे, मगर उनकी कला का मुख्य प्रेरणा स्रोत भारत की संस्कृति रही। इस प्रेरणा का सबसे जाना-माना प्रतीक है 'बिंदु', वो काले या अन्य रंग का गोल घेरा जो रज़ा साहब के चित्रों में हमारी नज़र को अपनी ओर खींचता है। अपनी पुस्तक 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' में अशोक वाजपेयी लिखते हैं, कि बिंदु − एक उत्पत्ति का बिंदु और एक अंत का बिंदु है; एक अधयात्मिक अवधारणा है और सौंदर्यशास्त्र से जुड़ी कृति है; एक स्थिर केंद्र और ऊर्जा का एक स्रोत है; एक मौन की बिंदु और स्फूर्त गति की शरुआत है; एकीकरण और ध्यान का केंद्र है; विकिरण की बिंदु है; और अंकुरण व प्रकाश की बिंदु है। सुनिए रज़ा और उनकी कला पर एक चर्चा अशोक वाजपेयी के साथ।

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    1. फेसबुक पर रज़ा फाउंडेशन
    2. फेसबुक पर रज़ा न्यास
    3. इंस्टाग्राम पर रज़ा फाउंडेशन
    4. 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' अमेज़न पर
    5. अशोक वाजपेयी की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर

    (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)


    1 hr 5 min
  • एपिसोड 33: 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' — हिलाल अहमद

    जुलाई २०२३ में रेलवे पुलिस के एक सिपाही ने जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सफर करते तीन मुसलमान यात्रियों की गोली मारकर हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे मुसलमान थे। अपनी किताब में डॉ हिलाल अहमद लिखते हैं कि इस घटना से पता चलता है कि आज के भारत में हिंसात्मक मुस्लिम-विरोधी माहौल किस हद तक बढ़ चुका है। मगर उन्होंने पिछले दस वर्षों में भारत के मुसलमान नागरिकों के हालात और उनके मुस्लिम पहचान का आकलन सहनशील, निष्पक्ष, और शांतचित्त भाव से किया है। सुनिए एक चर्चा डॉ अहमद के साथ उनकी पुस्तक 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' पर।

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    1. एक्स (ट्विटर) पर हिलाल अहमद
    2. फेसबुक पर हिलाल अहमद
    3. 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' अमेज़न पर
    4. हिलाल अहमद की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  

    (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1 hr 7 min

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