
Sign up to save your podcasts
Or


जब १९८० के दशक में सम्राट चौधरी मेघालय की राजधानी शिलांग में पल-बढ़ रहे थे तो वहाँ के विधान-सभा भवन के दीवार पर किसी ने बड़े अक्षरों में लिख दिया था 'खासी बाय ब्लड, इंडियन बाय एक्सीडेंट'। मतलब -- 'मेरी पहचान, मेरा नस्ल, खासी है; हिंदुस्तानी तो महज इत्तेफ़ाक़ से हूँ।' जब उनके दोस्त नागालैंड या मणिपुर से कलकत्ता, दिल्ली, या मुंबई आ रहे होते थे तो वे कहते थे, 'हम इंडिया जा रहे हैं।' पूर्वोत्तर भारत के उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के राजनितिक इतिहास को हम दो भागों में बाँट सकते हैं। पहला भाग -- अंग्रेज़ी हुकूमत द्वारा इस क्षेत्र को भारत से जोड़ने का प्रयास। और, दूसरा भाग -- स्वतंत्र भारत में इस क्षेत्र के भारत से अलग होने के प्रयास। ये इतिहास लिखा है सम्राट ने अपनी विस्तृत मगर सुगम पुस्तक 'नार्थ-ईस्ट इंडिया -- अ पोलिटिकल हिस्ट्री' में। आइये सुनते हैं एक चर्चा उनकी किताब पर, सम्राट चौधरी के साथ।
(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)
‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।
अगर कहीं उर्दू भाषा का ज़िक्र हो जाय, तो लोग उसकी तारीफ़ तो करते हैं, मगर अक्सर लगता है कि ये उर्दू-प्रेम महज शब्दों तक सीमित है। डॉक्टर रक्षंदा जलील अपनी किताब 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' के शुरुआती पन्नों में हिंदुस्तान में उर्दू के हाल पर सवाल तो उठाती हैं, मगर साथ-साथ हमको आश्स्वत भी करती हैं कि यहाँ उर्दू आज भी एक जीती-जागती, फलती-फूलती भाषा है। सादत हसन मंटो, इस्मत चुगताई, प्रेमचंद, और राजिंदर बेदी जैसे दिग्गज उर्दू लघु-कथा के लेखकों की दुनिया से आगे ले चलती, इस किताब में प्रस्तुत लघु-कहानियाँ मुख्यतः १९९० के बाद छपी हैं। इन कहानियों को चुना, और उनका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया है, डॉ जलील ने। प्रेम व टूटे दिलों की दास्तान, मौत के साये में जी रहे लोग, भुखमरी या दंगों के खौफ से जूझते लोग, निर्मम शहर में सुख के पल ढूंढते नौजवान – ये सब, और इसके अलावा और बहुत कुछ मिलेगा इस क़िताब के पन्नों में।
आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।
1. इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), और फेसबुक पर डॉ रक्षंदा जलील
2. 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' अमेज़न पर
3. रक्षंदा जलील द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर
4. रहमान अब्बास द्वारा लिखी गईं पुस्तकें अमेज़न पर
(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)
अगर आप की माँ आपसे कहती हों, बेटा, मेक अ लिविंग, मतलब अच्छा खाओ-कमाओ और इज़्ज़त-हैसियत के साथ जियो। और, उसके विपरीत, आपके पिता जी आपसे कहते हों, बेटा, मेक अ लाइफ, मतलब सार्थक ज़िन्दगी जियो, पैसे और प्रतिष्ठा के पीछे मत भागो। तो आप क्या करेंगे? अगर आप गुरचरन दास हैं तो आप दोनों चीज़ करते हैं। व्यस्क ज़िन्दगी के पहले तीन दशकों में मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करके एक बेहद सफल करियर बनाते हैं। फिर ५२ साल की उम्र से एक लोकप्रिय लेखक और बुद्धजीवी के रूप में जाने जाते हैं। आइये सुनते हैं, गुरचरन दास के साथ उनके रोचक संस्मरण, अनदर सॉर्ट ऑफ़ फ्रीडम यानी, एक अलग किस्म की आज़ादी, पर एक चर्चा।
(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)
‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।
दिल्ली से पूरब की ओर की ट्रेन या बस पकड़ने पर कानपूर-लखनऊ के आस-पास पहुँचने पर एक बॉर्डर आता है, मैप पर नहीं दिखता है -- 'मैं' और 'हम' का बॉर्डर। इस सीमा को पार करने के बाद लोग 'मैं' की जगह 'हम' का प्रयोग करने लगते हैं और आप जान जाते हैं कि अब आप उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग को छोड़ कर राज्य के पूर्वी भाग में आ गए हैं। लखनऊ, कानपूर, बनारस और
(आप शो नोट्स sambandh-kakeki.com पर भी देख सकते हैं।)
ओमैर अहमद द्वारा लिखी गईं पुस्तकें --
टाल टेल्स बाय अ स्माल डॉग
जिमी द टेररिस्ट
द स्टोरी टेलर्स टेल
एनकाउंटर्स
द किंगडम ऐट द सेंटर ऑफ़ द वर्ल्ड -- जरनीज़ इंटू भूटान
ईस्ट इंडिया कंपनी ने ११ सितम्बर सन १८०३ में पटपड़गंज की लड़ाई में मराठा ताकतों को हरा कर दिल्ली और उसके आसपास के छेत्रों पर कब्ज़ा पा लिया और इसके साथ ही दिल्ली के इतिहास में अंग्रेजी हुकूमत का दौर आरम्भ हुआ। एक तरफ लाल किले पर तख्तनशीन मुग़ल बादशाह शाह आलम, अकबर और बहादुर शाह ज़फर, और एक तरफ डेविड ऑक्टरलोनी, चार्ल्स मेटकाफ, और विलियम फ़्रेज़र जैसे अंग्रेजी रेजिडेंट हुक्मरान। एक तरफ मिर्ज़ा ग़ालिब, मोमिन, और ज़ौक़, तो एक तरफ देल्ही कॉलेज से जुड़े गणितज्ञ मास्टर राम चन्दर, और विद्वान सर सय्यद अहमद खान। नए स्कूल और कॉलेज, ज्ञान-विज्ञान, प्रिंटिंग प्रेस, टेलीग्राफ, और अख़बार की दिल्ली में मध्यकालीन और आधुनिक युगों के टकराव का बयान है, स्वप्ना लिडल की किताब 'द ब्रोकन स्क्रिप्ट'।
(आप शो नोट्स sambandh-kakeki.com पर भी देख सकते हैं।)
फेसबुक पर स्वप्ना लिडल
इंस्टाग्राम पर स्वप्ना लिडल
स्वप्ना लिडल द्वारा लिखी गयी पुस्तकें --
द ब्रोकन स्क्रिप्ट
फोर्टीन हिस्टोरिक वॉक्स ऑफ़ डेल्ही
शाहजहानाबाद – मैपिंग अ मुग़ल सिटी
चांदनी चौक – द मुग़ल सिटी ऑफ़ ओल्ड डेल्ही
कनॉट प्लेस एंड द मेकिंग ऑफ़ न्यू डेल्ही
द टू डेल्हीस – ओल्ड एंड न्यू
जॉन लेनन, पॉल मक्कार्टनी, जॉर्ज हैरिसन, रिंगो स्टार -- क्या आज से ५०० साल बाद, एक आम इंसान रॉक म्यूजिक के बैंड 'द बीटल्स' के सदस्यों का नाम से वाकिफ होगा? शायद ये सवाल इतना अटपटा भी नहीं है। ये तो हक़िकत है कि आज एक सत्रह साल का युवक बीटल्स के गानों को सुन के ठीक उसी तरह झूमता है, जिस तरह ६० साल पहले उसके दादा-दादी इन्हीं गानों को सुन के झूमा करते थे। महज २५ साल के उम्र में इंग्लैंड के लिवरपूल शहर के ये चार लड़के शायद इतनी शोहरत और धन-दौलत को संभाल नहीं पा रहे थे और चैन व तठस्थता की खोज ने उनको हिन्दू धर्म और अध्यात्म की ओर खींचा। वे महर्षि महेश योगी के निमंत्रण पर उनके ऋषिकेश स्थित आश्रम गए। आश्रम मैं क्या हुआ इसका विवरण मिलेगा आपको अजोय बोस की पुस्तक 'अक्रॉस द यूनिवर्स -- द बीटल्स इन इंडिया' में। सुनिए अजोय के साथ बीटल्स और महर्षि महेश योगी पर एक दिलचस्प चर्चा।
(आप शो नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)
फेसबुक पर अजोय बोस
ट्विटर पर अजोय बोस
इंस्टाग्राम पर अजोय बोस
अजोय बोस द्वारा लिखी गईं पुस्तकें –
बहनजी -- अ पोलिटिकल बायोग्राफी
फॉर रीज़न्स ऑफ़ स्टेट -- डेल्ही अंडर एमर्जेन्सी
अजोय बोस द्वारा निर्देशित बीटल्स पर फिल्म – द बीटल्स एंड इंडिया
साल १९९९, अप्रैल महीने का आखिरी दिन -- दिल्ली में, क़ुतुब मीनार से सटे हुए, टामारिंड कोर्ट नाम के रेस्त्रां में एक पेज-३ पार्टी चल रही थी। पार्टी में, जेसिका लाल जो कभी फैशन-मॉडल हुआ करती थीं, 'सेलिब्रिटी बारटेंडर' बनी हुई थीं। रात के दो बजे, जब जेसिका ने एक नेता जी के लड़के को ड्रिंक्स देने से इंकार कर दिया तो उसने गोली चला कर जेसिका को वहीं मार डाला।
इस सनसनीखेज हत्याकाण्ड को कल्पित रूप देते हुए, पत्रकार कनिका गहलौत ने अपने अंग्रेज़ी उपन्यास 'अमंग द चैटराटी' की शुरुआत की है। २००२ में प्रकाशित, दिल्ली की सेलिब्रिटी, फैशन, राजनीती, और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुए असली हस्तियों और वास्तविक घटनाओं पर आधारित ये उपन्यास, छपने के बाद ख़ासे चर्चे में रही। आइये किताब के छपने के बीस साल पश्चात, सुनते हैं कनिका के साथ उनके उपन्यास पर एक चर्चा।
कनिका का 'X' (ट्विटर) हैंडल -- @kanikagahlaut
अमंग द चैटराटी ऐमज़ॉन पर उपलब्ध है
एडवरटाइजिंग के क्षेत्र में अफ़सर, चित्रकार, फिल्म निर्माता, फैशन डिज़ाइनर, सूफी-संगीत समारोह के आर्गेनाइजर, सूफी भक्त, शेरोशायरी के आशिक़, अवध के तालुकदार खानदान के वारिस – मुज़फ्फर अली ये सब कुछ हैं। अगर इन्होंने अपनी ज़िन्दगी के लम्बे सफर में बहुत कुछ देखा है, तो वो इसलिए क्योंकि इन्होंने बहुत कुछ किया, और इसलिए भी क्योंकि इन्होंने बहुत कुछ करने की कोशिश की। ये बात समझ में आती है इनके आत्मकथा, 'ज़िक्र - इन द लाइट एंड शेड ऑफ़ टाइम' को पढ़ के। सुनिए, मुज़फ्फर अली के साथ उनकी आत्मकथा पर एक चर्चा।
(आप शो नोट्स sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।)
इंस्टा पर मुज़फ्फर अली
मुज़फ्फर अली द्वारा लिखी गईं पुस्तकें —
नॉन फिक्शन
ज़िक्र
मुज़फ्फर अली के कुछ चहेते गीत --
फिल्म ‘अभी ना जाओ छोड़कर’ का गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर’
फिल्म ‘रज़िया सुल्तान’ का गीत, ‘ऐ दिल-ए-नादाँ’
फिल्म ‘उमराओ जान’ का गीत, ‘ये क्या जगह है दोस्तों’
'बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू' यानी 'बड़े भइया आपको देख रहे हैं -- आज जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास '१९८४' की ये लाइन पुरे विश्व में एक चेतावनी के रूप में जानी जाती है। विचार, भाषा, सामाजिक और राजनैतिक संरचना -- इन सब के सम्बन्धो को एक भयावह, व तकनिकी रूप से उन्नत, आने-वाले कल में चित्रार्थ करने के लिए १९४८ में छपा ये उपन्यास आज भी दुनिया भर में पढ़ा जाता है। सुनिए '१९८४' पर एक चर्चा अभिषेक श्रीवास्तव के साथ जिन्होंने इस उपन्यास का हिंदी में अनुवाद किया है।
(आप शो नोट्स sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।)
1984 (अंग्रेज़ी में)
जॉर्ज ऑरवेल द्वारा लिखी गईं पुस्तकें, अमेज़न वेबसाइट पर
अभिषेक श्रीवास्तव द्वारा लिखी गईं पुस्तकें –
नॉन फिक्शन --
आम आदमी के नाम पर
आम आदमी दे नाम उट्टे
देशगाँव
कच्छ कथा
'भारत के मुसलमानों की जनसंख्या तेज गति से बढ़ रही है और इससे देश को खतरा है।' ये बात अक्सर सुनने को मिलती है। मगर जो 'मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर' प्रायः सांप्रदायिक तनाव और भय का कारण बन जाता है, उसकी सच्चाई क्या है? तथ्य और आंकड़ों के माध्यम से ये बात समझाते हैं, भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ.
(आप शो नोट्स sambandhkakeki.com पर भी देख सकते हैं।)
ट्विटर पर डॉ. एस. वाई. कुरैशी
डॉ. एस. वाई. कुरैशी द्वारा लिखी गईं पुस्तकें –
नॉन फिक्शन
द पॉपुलेशन मिथ
जनसंख्या का मिथक
ऐन अनडोक्यूमेन्टेड वंडर
लोकतंत्र के उत्सव की अनकही कहानी
द ग्रेट मार्च ऑफ़ डेमोक्रेसी
हरयाणा रीडिस्कवर्ड
हाली कवी एक रूप अनेक
ओल्ड देल्ही — लिविंग ट्रेडिशंस
सोशल मार्केटिंग फॉर सोशल चेंज, १९९६
प्रकाशक – अजंता बुक्स इंटरनेशनल, मेरठ, उत्तर प्रदेश -- २५० ००२
From the publisher's feed