Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----

Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----

By Shradha PandeyEducation
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Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ---- episodes

  • Bol/ बोल

    जीवन के कड़वे सत्य को उजागर करती हुई यह एक ऐसी कहानी है जो काल्पनिक होते हुए भी बहुत अधिक सत्यता के धरातल पर रची गई है। द्रौपदी सिर्फ महाभारत में ही नहीं लुटी गई बल्कि कलयुग में तो कई बार लुटी और लुटती चली जा रही है। अगर मेरी कहानी आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा कीजिए तथा [email protected] पर अपनी प्रतिक्रिया देने की कृपा कीजिए।

    13 min
  • Shayad Yahi Jeevan Hai/ शायद यही जीवन है

    शीला तो एक किरदारमात्र है ऐसी अनेकों शीला हमारे आस-पास मिल जाएँगी। इस कहानी के द्वारा मैंने बताने का प्रयास किया है कि जीने का सहारा, खुशियों की वजह खुद ही ढूँढ़नी पड़ेंगीं। खुशियाँ और कहीं नहीं बल्कि यहीं हैं यहीं हैं यहीं है। 

    मेरी कहानी ने यदि आपके दिल को छू लिया हो तो कृपया अपने मित्रों के साथ जरूर साँझा कीजिए और अपने विचार [email protected] पर भेजने का कष्ट कीजिए।

    11 min
  • Dada ji ki Pathshala/ दादा जी की पाठशाला

    महानगरीयजीवन तथा वैश्वीकरण ने हमें अपनों से दूर एकाकी जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया है। संभावनाओं का तलाशती मेरी यह कहानी'दादा जी की पाठशाला' जरूर सुनिए एर अच्छी लगे तो अपने मित्रों के साथ साँझा जरूर कीजिए तथा अपने विचार [email protected] पर भेजने का प्रयास कीजिए---

    17 min
  • Nirnay/ निर्णय

    दिनों दिन परिवेश  तथा समाज में आभा ने ऐसा क्या निर्णय ले लिया जो उसे घर से बेघर होना पड़ा क्या उसे परिवार में स्वीकारा गया? जानने के लिए कहानी "निर्णय" मेरी कहानी ने यदि आपके दिल को छू लिया हो तो कृपया सबस्क्राइब कीजिए तथा अपने मित्रों के साथ भी साँझा कीजिए । अपने विचार shradha.pdy@gmail com पर भेजने का कष्ट कीजिए।

    18 min
  • Diyon Wali Deewali/ दीयों वाली दीवाली

    बेटा! बहुत दिन हो गए, तुम्हारे लिए कोई नया कपड़ा नहीं खरीद पाए, तुमको खीर पूड़ी भी नहीं खिला पाए, इस बार दीवाली पर ये सारे दीए और खिलौने शहर जा कर बाजा़र में बेच कर तुम्हारे लिए नया कपड़ा लायेंगे। क्या यह सपना पूरा हुआ?

    आइए यह संकल्प ले लें कि हमारी दीवाली में किसी गरीब की भी दीवाली मने। किसी गरीब के चेहरे पर खुशियां फैलें शायद तभी सच्ची दीवाली होगी।

    मेरी कहानी ने यदि आपके दिल को छू लिया हो तो कृपया अपने मित्रों के साथ जरूर साँझा कीजिए और अपने विचार shradha.pdy @ gmail com पर भेजने का कष्ट कीजिए। एक पक्ष के पश्चात फिर मिलेंगे एक नई कहानी के साथ

    14 min
  • jake pair n fate bivai / जाके पैर न फटे बिवाई

    ससुराल में सास को माँ, ससुर को पिता, देवर ननद को भाई बहन समझना--सभी लडकियों को उनके विवाह पर माता पिता जरूर समझाते होंगे पर इसे समझाने के पीछे कारण क्या है? क्या ससुराल को अपना बनाया जा सकता है? मेरा उत्तर होगा-नहीं। जब तक ससुराल वाले अपने को बेटे वाला मानते रहेंगे तब तक सीख ही रहेगी व्यवहार में नहीं दिखाई देगी।

    मेरी कहानी ने यदि आपके दिल को छू लिया हो तो कृपया अपने मित्रों के साथ जरूर साँझा कीजिए और अपने विचार shradha.pdy@gmail com पर भेजने का कष्ट कीजिए।

    13 min
  • Sardi ki Dhop/सर्दी की धूप

    क्या कोई बच्चा इसलिए रो सकता है कि उसकी प्रशंसा की जा रही है? नहीं हो रहा है न विश्वास! फिर तो ये कहानी जरूर सुनिए मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि इस कहानी को सुनने के बाद आपके विचार जरूर बदल जाएंगे।यह कहानी बिलकुल सच्ची है इन पात्रों को मैंने जीवंत देखा व जाना है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस कहानी को सुनने के बाद  आपके ज़हन में कई यादें ताज़ी हो जाएंगी। यदि आपको मेरी कहानी पसंद आए तो अपने विचार [email protected] पर मुझ तक पहुँचाने का कष्ट कीजिएगा। 

    15 min
  • Flat number 705/ फ्लैट न. 705

    कितना मासूम होता है बचपन और उससे भी ज्यादा मासूम होता है बचपन का प्यार फिर चाहे वह व्यक्ति से किया जाए या मनुष्य से। बड़ी बड़ी बिल्डंग्स को बनाते समय गरीब मज़दूर बच्चों के मन को समझने का एक मनोवैज्ञानिक प्रयास मैंने किया है। इसमें कहाँ  तक सफल हो पाई हूँ इसे आपकी पारखी नज़र ही बता सकती है। यदि आपको मेरी कहानी पसंद आई हो तो अपने सुझाव [email protected]  पर मुझ तक पहुँचाने का कष्ट कीजिए।


    16 min
  • Bagiya ki Thandi Bayar/ बगिया की ठंडी बयार

    25 वर्ष बाद जब मुझे अपने गाँव जाने का अवसर मिला तो मैं यह सोच कर उत्साहित थी कि मुझे पहले जैसे गाँव मिलेगा लेकिन वहाँ जाकर पता चला कि गाँव की मासूमियत को तो शहरों की हवा ने पहले ही निगल लिया। मेरी यह कहानी 2 वर्ष पूर्व सखी पत्रिका में छप चुकी है ।  

    15 min
  • Prahari / प्रहरी

    देश के 75 वें स्वतंत्रता दिवस पर वीरों को श्रद्धांजलि !

    सरहद  पर कँटीले तारों का तकिया लगाए अपनी बंदूक की नोक का सहारा लिए गर्मी, बरसात, आग, पानी, भूचाल ,तूफान से जूझने वाले सिपाही शायद किसी और मिट्टी के बने होते हैं यही कारण है कि परिवार के प्यार से कहीं अधिक ये देश से प्यार करते हैं अपनी माँ से कहीं अधिक धरती माँ से प्यार करते हैं।  इनकी प्रशंसा में जितने भी कसीदे काढ़े जाए उतनी कम है।  मेरी यह कहानी उनके जीवन की झलक मात्र है।

    कृपया अपने विचार  [email protected]  पर भेजने का कष्ट कीजिए।

    11 min

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स्वागत है आप सभी का stories from the heart by shradha pandey podcast par जहाँ मिलती हैं ऐसी कहानियाँ जो विचारों जज्बातों उम्मीदों संभावनाओं से भरी होती हैं, ऐसी कहानियाँ जो आपकी हमारी व हमारे परिवार…