Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----

Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----

By Shradha PandeyEducation
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Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ---- episodes

  • Rishton Ka Antardwandva / रिश्तों का अंतर्द्वंद्व

    यदि आप पढ़ने के शौकीन हैं तो आप मेरी यह कहानी जुलाई माह की " सखी " पत्रिका में पढ़ सकते हैं। 

    कहानी से -----सुनयना अपने कमरे में बिस्तर पर औंधी लेटी आँसू बहाते हुए सोच रही थी कि क्या हर रिश्ते को नाम देना जरूरी है ? क्या दो अलग-अलग उम्र व लिंग के लोग मित्र नहीं हो सकते ?सुनयना अपने अंतर्द्वंद्व में उलझी थी कि अचानक अपने सामने शशांक को पाकर घबरा गई। शशांक ने बड़े अधिकार से कहा

      [email protected]  पर आपकी राय की प्रतीक्षा रहेगी । 

    18 min
  • MAMTA/ ममता

    प्रेम की, प्यार की, त्याग की, समर्पण की कोई भाषा नहीं होती, होता है सिर्फ जुड़ाव, ऐसा जुड़ाव कि एक पल के लिए अलग होते ही एक दूसरे की कमीं खलने लगती है चाहे यह जुड़ाव खून का हो या फिर मन का।

    किसी ने क्या खूब कहा है-प्रेम होता,तो कोई भेदभाव न होता,न कोई किसी से अलग होता,न ही कोई भूखा  सोता।।न हम रोते, न वो रोता।। प्रेम होता तो तो कोई भेदभाव न होता। 

    मेरी कहानी के प्रति आपके क्या विचार हैं कृपया shradha.pdy@mail पर मुझे बताने का कष्ट कीजिए । आपके प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा  में -------

    12 min
  • majduri banam majburi / मजदूरी बनाम मजबूरी
    जल्दी ही शहर जाने का इंतजाम करके वह चल पड़ा उस राह पर जहाँ न जाना चाहते हुए भी जाना उसकी बेबसी बन गई थी। जब घर से चला तो अम्मा रोने की जगह खुश थी। बाबू गर्व से कंधे पर हाथ रख कर बोले-अपना ख्याल रखना। निर्मला भी खिड़की से सट कर पर्दे के पीछे से आँखों में आँसू भर कर देखने की जगह अपनी सोने की बाली के सपने सजाती हुई काम में व्यस्त रही। वह ट्रैक्टर पर बैठ गया। घर पीछे छूटा। गाँव और फिर गाँव की सीमा। महेश चुपचाप मज़दूरी को अपनी नियति मान कर चला जा रहा था।
    अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो अपने विचार [email protected] पर भेजने की कृपा कीजिए।
    15 min
  • Papa ki anguli / पापा की अंगुली
    माना कि यह कहानी है पर क्या आपने अनुभव नहीं किया कि बच्चे शादी से कतराने लगे हैं? यदि आपने अनुभव नहीं किया तो आप भाग्यशाली हैं । माता पिता क्या चाहते हैं? बस अपने बच्चों का भर पूरा परिवार! महानगरीय जीवन की आज यही विडंबना है कि बूढ़ी आँखे राह तक रही हैं। मेरी यह कहानी यदि कुछ लोगों के मन को झकझोर दे, कुछ सोचने पर मजबूर कर दे तो मैं समझूँगी कि समाज के बदलाव में अपना कुछ योगदान दे सकी ।
    अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो  अनुरोध है तो अपने विचार [email protected] पर भेजने की कृपा कीजिए।
    10 min
  • gulzar balkaniyan / गुलजार बालकनियाँ
    बिलकुल नहीं बिलकुल नहीं दोनों बहुओं के साथ-साथ साची की बेटियों ने एक साथ कहा। अरे भई हमारे पापा मम्मी लोगों के लिए मिसाल है इसलिए कुछ कमाल और धमाल तो होना ही चाहिए। शादी पूरे धूम.धाम से होगी। शायद इसी शोर-शराबे और जश्न ने उन दोनों को लोगों का दुश्मन बना दिया। हर गली, हर चौराहे पर नए दम्पति की चर्चा हो रही थी। इसी चर्चा ने सुनसान बालकनियों को गुलजा़र कर दिया। 
    "गुलजा़र बालकनियाँ " है तो कहानी पर सच्ची। मैं इसकी सत्यता का दावा भी कर सकती हूँ। आज के समय में जब बच्चे दूर रहते हैं तब बुढ़ापे में एकाकीपन एक अभिशाप है अतः मुझे यह विवाह उचित लगा वैसे आप अपने तरीके से सोच सकते हैं।
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    23 min
  • Pahchan/ पहचान

     कितने ही लोग शहर इस उम्मीद से आते हैं कि शहर में पैसा कमाकर वापस घर चले जाएँगे शहर की सड़क कभी गाँव की तरफ नहीं मुड़ती इसलिए शायद ही कोई लौट पाया है। शहरी मायाजाल में फँसा आदमी तड़पता तो रहता है पर निकल नहीं पाता। जो निकल जाता है या निकल जाने का प्रयास करता है वह सच्चे अर्थों में जी जाता है वरना कोल्हू के बैल की तरह निरंतर गोल-गोल घूमता जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपने खाली हाथों को देख सिर्फ पछताता रहता है।

    अगर आपको मेरी कहानी अच्छी लगे तो shradha.pdy@gmail पर संदेश भेजकर मेरा मार्गदर्शन कीजिए 

    14 min
  • Agle janm mohe bitiya n kijo/ अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो

    दुनिया चाँद सितारों पर क्यों न पहुँच जाए पर भारत में आज भी लड़कों की चाह में न जाने कितनी लड़कियाँ जन्म से पहले मार दी जाती हैं। माना कि यह एक कहानी है पर सत्यता के धरातल पर लिखी गई है अन्यथा कूड़े के ढेर में नवजात लड़कियां फेंकी न मिलतीं ।

    अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो stories from the heart by Shradha Pandey  को अपने मित्रों के साथ साँझा कीजिए और हाँ अपने विचार Shradha.pdy @Gmail.com पर मुझ तक पहुंचाने का प्रयास कीजिए। 

    एक पक्ष के पश्चात फिर मिलेंगे एक नई कहानी के साथ मैं श्रद्धा आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में

    18 min
  • Antral/ अंतराल

    ओजस गुनगुनी धूप में बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। पास ही बैठी उनकी पत्नी मटर छील रही थीं। ओजस का परिवार आधुनिक समाज में उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है जहाँ तीन-तीन पीढ़ियाँ बड़े प्रेम व सौहार्द से रह रही थीं। परिवार टूटते ही क्यों है? आज तक न ओजस को इस प्रश्न का उत्तर मिला न ही हम सबको। परिवार के टूटने व जुड़े रहने की गुत्थी को सुलझाने में कितने ही समाज शास्त्रियों ने कितना समय लगा दिया पर आज तक इस गुत्थी को न वे सुलझा पाएए न ये ओजस जी के वश की बात है। हम कहीं इस विषय में और न उलझ जाएँ अतः चलिए उस सुहानी धूप में जहाँ ओजस अपने परिवार के साथ सीनियर सिटिज़न का आनन्द उठा रहे थे। [email protected] 

    18 min
  • danv/दाँव

    सत्या की व्यथा व लाचारी ने उसे चुप रहने पर मजबूर कर दिया है या उसके पिता की बीमारी या फिर हवेली की मालकिन चाची ने, जो सब कुछ जान कर भी अनजान थीं, या चाचा जो दाँव पर दाँव खेल रहा था या फिर उसकी अपनी माँ ----  जो सब कुछ जानती तो थी लेकिन उसे सामाजिक व्यवस्था व गरीबी ने आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी। यदि मेरी कहानी आपके दिल को छूने में सफल हुई तो अपने विचार Shradha.pdy @Gmail.com पर मुझ तक पहुंचाइए। 

    https://www.ekalpana.net/post/shradhapandeystoryfeb2021  मेरी कहानी आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। 


    13 min
  • Dan/ दाँव

    अत्यंत मार्मिक कहानी, फरवरी माह की ई. कल्पना मैगज़ीन में प्रकाशित कहानी। यदि आप पढ़ना चाहते हैं तो लिंक दिया है 

    https://www.ekalpana.net/post/shradhapandeystoryfeb2021


    2 min

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