लोक कथाएं सुनना और कहना वर्षो पहले प्रचलित था अब तो मोबाइल और नेटवर्क ने सबको इतना व्यस्त कर दिया है कि उठना तो मोबाइल सोना तो मोबाइल। तो क्यों न इस मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर अपने बचपन को याद करे और अपने बच्चो का बचपन उन्हें जीने के अवसर दे
ये लोककथाएं इतनी पुरानी है की कोई भी नही कह सकता की ये कितनी पुरानी है फिर भी ये एक देश से दूसरे देश में एक कान से दूसरे कान tk पोहंचती रहने के कारण नवीनता का रूप ले लेती हैं ये लोककथाएं बोहत ही रोचक
उपन्यास के इस अध्याय में आप वही देखेंगे जो आप आशा करते हो यानी Happy ending जी हां आप जानेंगे तिलिस्म के कैदियों का परिचय और उन पर दरोगा द्वारा किए गए। असहनीय जुल्म।
अब ये भाग समाप्ति की तरफ बढ़ रहा है इसलिए इस भाग में पाठको और श्रोताओं के सवालो के जवाब मिलेंगे। जैसे कि राजा गोपालसिंह कैसे कैद हुए। तिलस्म में जो पांच लोग थे उनके किस्से वो कैसे वहा पहुंचे। ये सब
उपन्यास के इस भाग में आपको इन्द्र जीत सिंह की शादी किशोरी और आनंदसिंह की शादी कामिनी के साथ होते देखेंगे। और शादी की तैयारी की केफियत तो देखने ही लायक है। परन्तु इनकी सुहागरात पर एक ऐसी घटना हुई जिसने इंदरजीत का बुरा हाल कर दिया क्योंकि सुबह इंदरजीत ने जाना की जिसके साथ वो सोए थे वो किशोरी नही कमलिनी है अब क्या होगा?
इस भाग में आप भूतनाथ को नाकाबोपोशो की असलियत मालूम करने की जद्दोजहद करते देखेंगे। और नकाबपोशों को पकड़ने के बाद उनमें उसे अपना पुराना दुश्मन दिलीपसिंह भी मिलेगा जो उसके गुनाहों को जानता है
उपन्यास के इस भाग में इंद्रा अपना किस्सा बयान करेगी कुमारो से , कि वो किस तरह से मनोरमा को अपनी मां समझती रही और फिर कैसे और किसकी मदद से वहा से भागी इसके इलावा आप भूतनाथ के मुकद्दमे की कार्यवाही भी जानेंगे
इस भाग में आप को तिलिस्म के अंदर की कार्य प्रणाली की तस्वीर ही देखने को मिलेगी जिसमे मायारानी और नानक की साजिश के चलते गोपालसिंह की मायारानी के हाथों मौत होना भी आपदेखेंगे। इसके साथ ही आप आनंदी और इन्द्रानी नाम की रानियों की शादी इंद्रजीत सिंह और आनंससिंह से होते हुए देखेंगे कोन है है इन्द्रानी और आनंदी जानने के लिए सुने उपन्यास के इस भाग को