https://youtu.be/xMB5BdEJw3Y Part -4 वही राजा वीरेंदर सिंह के पास पठानों के सामंत कतलू खां का सन्देश आता है की वो पठानों से संधि कर मुगलों को पराश्त करने में उसकी सहायता करे। वीरेंदर सिंह मुगलों से संधि करने को तैयार है पर मान सिंह से नहीं क्यूंकि बीते जीवन में मान सिंह ने उसे कुछ ऐसे घाव दिए हैं जिसे वो भुला नहीं सकता। पर गुरु अभिराम के समझाने पर वो इस बात को मान जाता है और पठानों को सहायता करने से मना करता है और मुगलों को अर्थात मान सिंह को सहायता के लिए हाँ कर देता हैं। यह बात सुनते ही कतलू खां उस पर धावा बोलने की योजना बनता है।
पंद्रह दिन पूरा होते ही विमला रात के समय विद्यादिग्ग्ज को ले कर उसी मंदिर में जाती है। विद्यादिग्ग्ज भूतो के दर के मारे उसे अकेले छोर भाग जाता है।