https://youtu.be/vB3zG6aOnWg Sardarni Bhisham Sahni
सरदारनी भीष्म साहनी
स्कूल सहसा बन्द कर दिया गया था और मास्टर करमदीन छाता उठाए घर की ओर जा रहा था। पिछले कुछ दिनों से शहर में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगी थीं। किसी ने मास्टर करमदीन से कहा था कि शहर के बाहर राजपूत रेजिमेंट की टुकड़ी पहुँच गई है, कि अबकी बार रामनवमी के जुलूस में झाँकीवाली गाड़ी में ही बर्छे और तलवारें भरी रहेंगी, कि कस्बे में बिना लाइसेंस के चालीस पिस्तौल पहुँच गए हैं, और हिन्दुओं के मुहल्ले में मोर्चेबन्दियाँ तेजी से खड़ी की जा रही हैं, कि पाँच-पाँच घरों के पीछे एक-एक बन्दूक का इन्तजाम किया गया है।
उधर हिन्दुओं के मुहल्ले में यह बात तेजी से फैल रही थी कि जामा मस्जिद में लाठियों के ढेर लग गए हैं और धड़ाधड़ असला इकट्ठा किया जा रहा है, कि दो दिन पहले नदी पार से एक पीर आया था और रात को वकील के घर में साजिशें पकाई जा रही हैं।
इन खबरों को भला कौन झुठला सकता था? देखते-ही-देखते शहर में तनाव बढऩे लगा था। मुसलमानों ने हिन्दुओं के मुहल्ले में जाना छोड़ दिया और हिन्दुओं-सिक्खों ने मुसलमानों के मुहल्लों में। कोई खोमचेवाला या छाबड़ीवाला फेरी पर निकलता तो दिन डूबने से पहले घर लौट जाता। शाम पड़ते न पड़ते ही गलियाँ और सड़कें सुनसान पडऩे लगीं।
एक-दूसरे से फुसफुसाते दो-दो, चार-चार लोगों की मंडलियाँ किसी सड़क के किनारे या गली के मुहाने पर खड़ी नजर आने लगी थीं। तनाव और दहशत यहाँ तक फैली कि कहीं कोई ताँगा या छकड़ा भी तेजी से भागता नजर आता तो लोगों के कान खड़े हो जाते और दुकानदार अपनी दुकानों के पल्ले गिराने लगते। झरोखों से अधखुले दरवाजों के पीछे घूरती आँखें तैनात हो जातीं।
यह ऐसा वक्त था कि अगर किसी घर के चूल्हे से चिंगारी भी उड़ती तो सारा शहर आग की लपेट में आ सकता था। ऐसा माहौल बन गया था जब आदमी न तो घर पर बैठ सकता था, न बाहर खुले-बन्दों घूम सकता था।
वह केवल अफवाह सुन-सुनकर परेशान हो सकता था।इसी बढ़ते तनाव को देखकर स्कूल वक्त से पहले बन्द कर दिया गया था और बच्चों को दोपहर से पहले ही अपने-अपने घर भेज दिया गया था और मास्टर करमदीन छाता उठाए अपने घर की ओर जा रहा था।
स्कूल का मास्टर तो यों भी भीरु स्वभाव दब्बू-सा प्राणी होता है, अपने काम से मतलब रखनेवाला—'ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर'। बस, किताबें और अखबार बाँचने और फलसफे बघारनेवाला। इसमें शक नहीं कि कभी-कभी अन्धविश्वासी, आग उगलनेवाले भी इन्हीं में से निकलते हैं पर आमतौर पर स्कूल का अध्यापक बड़ा शील स्वभाव और गरीबतबह आदमी होता है, जो हर किसी की बात सुन भी लेता है और विश्वास भी कर लेता है।