1955 में आई 'देवदास' में एक सीन था जहाँ थका हारा और शराब के नशे में धुत्त देवदास आता है और दुखी चंद्रमुखी कहती है, "और मत पियो देवदास".
फ़िल्म के सेट पर वैयजंतीमाला अपने डायलॉग के साथ तैयार थीं पर दिलीप कुमार कहीं नज़र नहीं आ रहे थे.
तब कैमरामैन ने बताया कि दिलीप साहब काफी देर से लगातार सेट के चक्कर लगा रहे हैं.
दिलीप कुमार ने कैमरामैन को तैयार रहने के लिए कहा था ताकि जब उनकी एंट्री हो तो वो वाकई थके हुए लगें और उनके माथे पर पसीने और थकन की असल लकीरें हों