Anantnath Panchkalyanak Arghyavali अनन्तनाथ पंचकल्याणक अर्घ्यावली ★
असित कार्तिक-एकम भावनो गरभ को दिन सो गिन पावनो।
किय सची तित चर्चन चावसों, हम जजें इत आनंद-भावसों ॥
ॐ ह्रीं कार्तिक कृष्ण प्रतिपदायां गर्भमंगल-मंडिताय श्रीअनंतनाथाय अर्घ्य निर्वपामीति स्वाहा।।
जनम जेठ वदी तिथि द्वादशी सकल मंगल लोक-विषै लशी ।
हरि जजे गिरिराज समाजतें, हम जजैं इत आतम-काजतें।
ॐ ह्रीं ज्येष्ठकृष्ण द्वादश्यां जन्ममंगल मंडिताय श्रीअनंतनाथाय अध्यं निर्वपामीति स्वाहा।2।
भव-शरीर विनस्वर भाइयो, असित जेठ दुवादशि गाइयो।
सकल इंद्र जजें तित आइकें, हम जजैं इत मंगल गाइकें ।
ॐ ह्रीं ज्येष्ठकृष्ण द्वादश्यां तपोमंगल मंडिताय श्रीअनंतनाथाय अध्यं निर्वपामीति स्वाहा ।3।
असित चैत-अमावस को सही, परम केवलज्ञान जग्यो कही।
लही समोसूत धर्म धुरंधरो, हम समर्चत विघ्न सबै हरो ॥
ॐ ह्रीं चैत्रकृष्ण अमावस्यायां ज्ञान मंगल-मंडिताय श्री अनंतनाथाय अर्घ्य निर्वपामीति स्वाहा ।।
असित चैत-अमावस गाइयौ अघत घाति हने शिव पाइयो ।
गिरि समेद जजें हरि आयकें, हम जजें प्रीति लागाइके।
ॐ ह्रीं चैत्रकृष्ण अमावस्याया मोक्षमंगल मंडिताय अनंतनाथाय अर्घ्य निर्वपामीति स्वाहा।5।। ★