Big Story Hindi

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By The QuintNews
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  • सैकड़ों करोड़ के प्रोजेक्ट सेंट्रल विस्टा पर एक्सपर्ट्स की राय
    यूं तो दिल्ली में सैर सपाटे के लिए कई अच्छी जगह हैं, लेकिन एक ऐसा वीवीआईपी इलाका है जहां पर सुबह 5 बजे से लेकर रात 12 बजे तक आपको भीड़ नजर आएगी. इंडिया गेट से लेकर राजपथ के पूरे इलाके में मॉर्निंग वॉक से लेकर साइकिलिंग, पिकनिक, फोटोग्राफी और तमाम तरह की चीजें होती हैं. ये सेंट्रल दिल्ली का सबसे खूबसूरत और साफ सुथरा इलाका है. संसद भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन तक इसी इलाके में आते हैं. लेकिन अब ये पूरा इलाका सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में है.

    सेंट्रल विस्टा राजपथ के दोनों तरफ के इलाके को कहते हैं. राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के करीब प्रिंसेस पार्क का इलाका इसके अंतर्गत आता है. इस पूरे इलाके को नए तरीके से बनाने के प्रोजेक्ट को ही सेंट्रल विस्टा नाम दिया गया है. जिसमें संसद की नई इमारत बनाने का भी प्रस्ताव है.

    लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ लोगों ने विरोध जताया है और मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है. पर्यावरण एक्टिविस्ट, इतिहासकार, हेरिटेज एक्सपर्ट्स की शिकायत है कि नेशनल कैपिटल की शनाख्त बदली जायेगी और दिल्ली ही के लोगों से मश्वरा नहीं किया जाएगा? तो ये कहां की डेमोक्रेसी है? साथ ही कई पेड़ों के काटे जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. फिलहाल प्रोजेक्ट के शिलान्यास की इजाज़त सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है, और 10 दिसम्बर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अपने इस सपने को शुरू करने के लिए फाउंडेशन स्टोन रखेंगे। आज पॉडकास्ट में बात करेंगे कि सेंट्रल विस्टा आखिर क्या है और दिल्ली में सेंट्रल विस्टा का बनना इसकी हेरिटेज पर किस तरह का खतरा है.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    गेस्ट: सुहैल हाशमी, इतिहासकार, हेरिटेज एक्सपर्ट
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    12 min
  • भारत बंद और किसान आंदोलन: कुछ ऐसा रहा अलग-अलग राज्यों का माहौल
    केंद्र की मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने भारत बंद बुलाया. देशभर के कई राज्यों के किसानों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया था और इसका असर भी देखने को मिला. कुछ राज्यों को छोड़कर बाकी तमाम राज्यों में कहीं न कहीं बंद का असर दिखा. हर तरफ अपने-अपने तरीकों से विरोध जताया गया और सरकार तक आवाज पहुंचाने की कोशिश हुई.

    कहीं सड़को पर नारे लगते दिखे तो कहीं स्टेज पर किसानों के लिए कविताएं पढ़ी गईं और कहीं सड़कों पर औरतें कीर्तन करती दिखी. जब ये सब चल रहा था तब लंगर खिलाते हुए प्रदर्शनकारियों का सेवाभाव भी नजर आया. इस बीच क्विंट के रिपोर्टर देश भर के भारत बंद की तसवीरें भेजते रहे, कहानियां जमा करते रहे. और इन्ही सबको मिला कर आज आप को पॉडकास्ट में सुनाएंगे की किसानो के इस भारत बंद में क्या माहौल रहा.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    11 min
  • किसान आंदोलन को भटकाने की कोशिश, फिर भी कैसे हो रहा मजबूत?
    दुनिया में सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन तो कई होते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादा प्रदर्शनों को सरकार समर्थक ताकतें नए-नए रूप देकर दबाने की कोशिश में जुटी रहती हैं. भारत में भी हर प्रदर्शन की तरह देश के अन्नदाता किसानों के प्रदर्शन को नए रंग देने की खूब कोशिश हुई और हो रही है. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन को झूठा साबित करने के लिए कई तरह के प्रोपेगेंडा चलाए गए. ए्क्टर कंगना रनौत ने भी एक ऐसी ही फेक तस्वीर को शेयर किया था, जिसमें उन्होंने एक महिला किसान को शाहीन बाग की दादी बता दिया. हालांकि इसके बाद पंजाबी स्टार दिलजीत दोसांझ ने कंगना को जमकर आड़े हाथों लिया.

    लेकिन ऐसी खबरें फैलाने में सिर्फ सोशल मीडिया की ही भूमिका नहीं है, बल्कि मेन स्ट्रीम मीडिया ने भी जमकर किसान आंदोलन को लेकर ऐसी खबरें चलाईं, जिनमें कभी इसे खालिस्तानी आतंकियों से जोड़कर बताया गया तो कभी विपक्ष का प्लांट किया गया आंदोलन करार दिया गया. इसीलिए कुछ किसानों ने मेनस्ट्रीम मीडिया का बायकॉट भी किया और सवाल पूछा कि वो ऐसी खबरें क्यों दिखाते हैं?

    किसानों को ये पहले से ही पता था कि सरकार विरोधी हर आंदोलन की तरह उनके इस आंदोलन को भी नया अमलीजामा पहनाने का काम जरूर होगा. इसीलिए किसान नेताओं ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनके मंच पर कोई भी राजनीतिक दल का नेता नहीं आएगा. अब भारत बंद को लेकर भी किसानों ने कहा है कि नेताओं के समर्थन का तो वो स्वागत करते हैं, लेकिन उनसे गुजारिश है कि वो अपने झंडे घर पर ही छोड़कर आएं.

    हम बात कर रहे थे, लोगों तक सूचना पहुंचाने वाले मीडिया की, कि कैसे उसने किसानों के इस आंदोलन में भी सेंध लगाने की कोशिश की. लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया का काम इस दौरान कई छोटे यूट्यूबर और सोशल मिडिया इन्फ्लुएंसर्स कर रहे हैं. आज इसी पर पॉडकास्ट में बात करेंगे.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    10 min
  • हैदराबाद GHMC चुनाव: TRS टॉप पर, लेकिन BJP के प्रदर्शन ने चौंकाया
    आज हैदराबाद मुनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों के नतीजे आ गए हैं. आप पहली बार GHMC चुनाव की राष्ट्रीय स्तर पर इतनी चर्चा होती देख रहे होंगे, राज्यों के चुनाव नतीजों की तरह एक मुनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव की मीडिया कवरेज हो रही है. इस मीडिया कवरेज की वजह है बीजेपी का जबरदस्त चुनावी प्रचार. बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में लगा दी. अब जब रुझान और नतीजे आने लगे हैं तो बीजेपी की मेहनत भी आंकड़ों में झलक रही है. 4 सीट जीतने वाली बीजेपी इस बार 40 सीट के करीब जीतने की स्थिति में आ गई है. शाम 6:40 बजे तक की काउंटिंग के हिसाब से ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनावों में TRS सबसे आगे चल रही है, दूसरे नंबर पर चल रही है बीजेपी. वहीं तीसरे नंबर पर आ गई है औवेसी की पार्टी AIMIM. लेकिन बीजेपी और AIMIM के बीच तगड़ी टक्कर है, कोई भी आगे पीछे हो सकता है. और कांग्रेस का ज्यादातर चुनावों की तरह इस बार भी फिसड्डी प्रदर्शन रहा है. भले ही बीजेपी पहले नंबर पर नहीं है लेकिन फिर भी बीजेपी खेमे में जश्न का सा माहौल लग रहा है. आखिर क्यों? इसको ऐसे समझिये कि इन चुनावों  में जीत किसी की भी हो. लेकिन बीजेपी ने  औवेसी के गढ़ माने जाने वाले हैदराबाद में अपना मजबूत कदम जमा दिया है.

    आज पॉडकास्ट में बात करेंगे हैदराबाद मुनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव नतीजों के बारे में.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    सीनियर डेस्क राइटर: वैभव पालिनिटकर
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    13 min
  • पुलिस कस्टडी में मौत पर SC का फैसला, क्या वाकई में होगा पालन?
    पुलिस की कस्टडी में मौत या फिर (कोट अनकोट) हत्या के कई गंभीर मामले हमने पिछले कई सालों में देखे. इसी साल तमिलनाडु के तूतीकोरन में एक बाप और बेटे की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई.  59 साल के जयराज और उनके 31 साल के बेटे का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने कोरोना लॉकडाउन में तय समय के हिसाब से अपनी दुकान का शटर नहीं गिराया था. इसी आरोप में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और थाने में रातभर जमकर पिटाई की गई. जिससे दोनों की मौत हो गई. इस मामले के बाद कई ऐसे ही मामले सामने आए और हमेशा की तरह कुछ दिनों तक सोशल मीडिया में क्रांति चलाई गई. फिर हमेशा की तरह सब शांत हो गए.  

    लेकिन अब कस्टोडिन डेथ के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है. जिस में राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को कहा गया है कि पुलिस थानों में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, साथ ही इन कैमरों में नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी सुविधा होनी जरूरी है. SC ने कहा कि ये आदेश संविधान के आर्टिकल 21 को ध्यान में रखते हुए दिया गया है जो लोगों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित रखता है. लेकिन सवाल है कि क्या कैमरे लगाने से क्या पुलिस की सख्ती में कमी आएगी? क्या मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर इस बात की इजाज़त देता है? आज पॉडकास्ट में इन सभी पॉइंट्स पर एक एक करके बात करेंगे.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    11 min
  • सड़कों पर उतरे किसानों को इंटरनेशनल सपोर्ट के मायने
    खेतों में काम करने वाला आज किसान दिल्ली की सड़कों पर है. मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से हजारों किसान दिल्ली के अंदर और बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. देश-विदेश से हो रही किरकिरी के बीच केंद्र सरकार ने 1 दिसंबर को किसानों को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन बात नहीं बन पाई. केंद्र ने किसानों से कहा कि वो 3 दिसंबर को बिंदुवार तरीके से अपनी बात को लिखित तौर पर लाएं. जिस पर चर्चा होगी. साथ ही किसान नेताओं ने बैठक के बाद चेताया कि आंदोलन को और तेज किया जाएगा. किसान इस बार लंबे आंदोलन के मूड में हैं और उनका साफ कहना है कि वो 4 महीने तक दिल्ली में रह सकते हैं. जिसके बाद अब किसानों के गुस्से को शांत कर पाना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.

    आज पॉडकास्ट में इस आंदोलन को मिल रहे समर्थन की भी बात करेंगे जो ना सिर्फ नेशनल है, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर मिल रहा है. इस का मतलब क्या है? और अंतराष्ट्रीय स्तर पर ये समर्थन भारत सरकार के लिए क्या सन्देश देता है, इसी पर आज तफ्सील से बात करेंगे.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    11 min
  • हैदराबाद चुनावों में BJP का जोर, किसके लिए खतरे की घंटी?
    बिहार के विधानसभा चुनावों में तमाम राजनीतिक दलों की जोर आजमाइश हम सबने देखी. लेकिन इन चुनावों के बाद अचानक हैदराबाद चर्चा में आ गया. हैदराबाद नगर निगम चुनावों में कुछ ऐसा दिखा जो शायद ही पहले किसी लोकल चुनाव में नजर आया हो. ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) के चुनावों के लिए बीजेपी ने जिस तरीके से प्रचार किया वो काफी चौंकाने वाला था. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर स्मृति ईरानी, ​​यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे राजनीतिक दिग्गजों ने इस चुनाव की गर्मी को और बढ़ा दिया. ओवैसी की एआईएमआईएम, रूलिंग पार्टी टीआरएस और बीजेपी के बीच खूब जुबानी जंग भी चली. लेकिन लोकल चुनाव में बीजेपी की इस एग्रेसिव बैटिंग को अब एक्सपर्ट पार्टी का मिशन साउथ बता रहे हैं.

    आखिर एक नगर निगम चुनाव पर इतना जोर क्यों है? बीजेपी इस पर क्यों ज़ोर दे रही है, और राज्य की रूलिंग पार्टी, टीआरएस, के लिए ये इलेक्शन जीतना क्यों ज़रूरी है, उनके लिए दांव पर क्या लगा है? इस सब को आज इस पॉडकास्ट में आसान भाषा में समझेंगे.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
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    11 min
  • किसानों की ललकार, सरकार के आरोप- आंदोलन की बड़ी बातें
    केंद्र सरकार के विवादित कृषि कानूनों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो चुका है. 26 नवंबर को दिल्ली चलो आंदोलन से इस प्रदर्शन की शुरुआत हुई और अब किसान पूरी दिल्ली को घेरने की तैयारी में हैं. किसान किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. उनकी मांग है कि बिना किसी शर्त केंद्र सरकार कृषि कानूनों को लेकर उनसे बातचीत करे.

    पिछले करीब 6 दिनों में किसानों ने दिल्ली आने के लिए काफी कुछ झेला. कई किसान लाठियां खाकर दिल्ली पहुंचे तो सैकड़ों ने पानी की ठंडी बौझारों को झेला. वहीं आंसू गैस के गोलों ने भी किसानों की आंखों को दर्द दिया. कई प्रदर्शनकारी किसानों पर संगीन धाराओं में मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं. अब कई किसान संगठन दिल्ली के बुराड़ी में निरंकारी ग्राउंड पर प्रदर्शन कर रहे हैं और अब वहीं डटे रहने की बात कर रहे हैं.

    अब केंद्र सरकार की बात करें तो एक तरफ तो गृहमंत्री अमित शाह अपने बाकी नेताओं के बरअक्स ये कह रहे हैं कि ये आंदोलन पोलिटिकल नहीं है. वहीं प्रधान मंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कृषि कानूनों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. इसके लिए प्रधानमंत्री ने विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया. आज के इस पॉडकास्ट में किसान आंदोलन को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ उसे आसान भाषा में आपको समझाएंगे.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    ये भी सुनिए:
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    15 min
  • पानी, आंसू गैस और लाठियां झेलने के बाद आखिरकार दिल्ली पहुंचे किसान
    आंसू गैस के गोले, लाठी चार्ज, पत्थरबाज़ी और ठण्ड में किसानो पर वाटर कैनन से पड़ती पानी की बौछारें, दिल्ली से सटे राज्यों की सीमाओं पर किसान प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. 26 नवंबर की सुबह से लेकर 27 नवंबर की दोपहर तक जवान और किसानों का कई बार आमना-सामना होता रहा. तमाम आलोचनाओं के बाद आखिरकार किसानों को दिल्ली में घुसने की इजाजत दे दी गई और अब दिल्ली में प्रदर्शन जारी है. कृषि कानूनों को लेकर देश के कई राज्यों के किसान ये प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि ये कानून उनके हित में नहीं हैं और केंद्र सरकार को इन्हें वापस लेना होगा.

    ये तो हो गया मुद्दा, लेकिन आज पॉडकास्ट में पुलिस और किसानों के बीच जो संघर्ष देखने को मिला, उस पर बात करेंगे.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    ये भी सुनिए:
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    11 min
  • आतंकियों के हमले से जब दहल उठी थी मुंबई, भयावह मंजर की कहानी
    26/11/ 2008, ये एक ऐसा दिन था जिसने भारत की मॉडर्न हिस्ट्री में एक काला पन्ना जोड़ दिया, इस आतंकी घटना के बारे में आज 12 साल बाद भी सोचकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं. भारत की मैक्सिमम सिटी, मुंबई में एक ऐसा दिन जब लगातार 4 दिन तक गोलियां चलीं, बम धमाके सुनाई दिए, और लगातार चार दिन तक भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के मीडिया चैनलों की नजर होटल ताज पैलेस पर टिकी रही.

    वो दिन भुलाया नहीं जा सकता है जब पूरा देश टीवी पर लगातार 4 दिन तक ये आतंक का खतरनाक मंजर देख रहा था, लेकिन पल-पल की खबर लोगों तक पहुंचाने वाले रिपोर्टर्स के जहन में उस काले दिन की यादें आज भी ताजा हैं. ऐसे ही दो महिला रिपोर्ट्स से आज पॉडकास्ट में जानेंगे कि उस दिन की भयानक तस्वीर उनके ज़ेहनो में आज भी कैसे बसी है.

    पॉडकास्ट में सुनिए मुंबई अटैक को Times Now के लिए उस वक़्त कवर करने वाली रिपोर्टर माहरुख इनायत को. और साथ ही सुनिए शाई वेंकटरमन को भी जो NDTV के लिए 26/11 का अटैक उस दिन कवर कर रहीं थी.

    रिपोर्ट और साउंड एडिटर: फबेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

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    27 min

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