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अखबार, खबरों आदि से हम सबका वास्ता रहता है. आमतौर पर हर कोई अपनी भाषा में खबरें पढ़ना चाहता है. लेकिन ज़रा सोचिये अगर आपको कविता के रूप में अखबार पढने को मिले तो कैसा रहेगा. मतलब हर खबर कविता के रूप में लिखी हुई. यानी पूरे अखबार में सिर्फ कविता. कविता वो नहीं जो साहित्यिक हो बल्कि खबर को बयान करती हो.
By SBS4.2
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अखबार, खबरों आदि से हम सबका वास्ता रहता है. आमतौर पर हर कोई अपनी भाषा में खबरें पढ़ना चाहता है. लेकिन ज़रा सोचिये अगर आपको कविता के रूप में अखबार पढने को मिले तो कैसा रहेगा. मतलब हर खबर कविता के रूप में लिखी हुई. यानी पूरे अखबार में सिर्फ कविता. कविता वो नहीं जो साहित्यिक हो बल्कि खबर को बयान करती हो.

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