Hindi Poems by Vivek (विवेक की हिंदी कवितायेँ)

Hindi Poems by Vivek (विवेक की हिंदी कवितायेँ)

By Vivek AgarwalArtsPerforming Arts
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Hindi Poems by Vivek (विवेक की हिंदी कवितायेँ) episodes

  • तुम को देखा (Tum Ko Dekha)


    तुम को देखा तो ये ख़याल आया।

    प्यार पाकर तेरा है रब पाया।


    झील जैसी तेरी ये आँखें हैं।

    रात-रानी सी महकी साँसें हैं।

    झाँकती हो हटा के जब चिलमन,

    जाम जैसे ज़रा सा छलकाया।

    तुम को देखा ……


    देखने दे मुझे नज़र भर के।

    जी रहा हूँ अभी मैं मर मर के।

    इस कड़ी धूप में मुझे दे दे,

    बादलों जैसी ज़ुल्फ़ की छाया।

    तुम को देखा ……


    ज़िंदगी भर थी आरज़ू तेरी।

    तू ही चाहत तू ज़िंदगी मेरी।

    पास आकर भी दूर क्यूँ बैठे,

    चाँद सा चेहरा क्यूँ है शरमाया।

    तुम को देखा ……


    तुम को देखा तो ये ख़याल आया।

    प्यार पाकर तेरा है रब पाया।


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    3 min
  • इश्क़ दोबारा (Love Again)

    एक किताब सा मैं जिसमें तू कविता सी समाई है,

    कुछ ऐसे ज्यूँ जिस्म में रुह रहा करती है।

    मेरी जीस्त के पन्ने पन्ने में तेरी ही रानाई है,

    कुछ ऐसे ज्यूँ रगों में ख़ून की धारा बहा करती है।


    एक मर्तबा पहले भी तूने थी ये किताब सजाई,

    लिखकर अपनी उल्फत की खूबसूरत नज़्म।

    नीश-ए-फ़िराक़ से घायल हुआ मेरा जिस्मोजां,

    तेरे तग़ाफ़ुल से जब उजड़ी थी ज़िंदगी की बज़्म।


    सूखी नहीं है अभी सुर्ख़ स्याही से लिखी ये इबारतें,

    कहीं फ़िर से मौसम-ए-बाराँ में धुल के बह ना जायें।

    ए'तिमाद-ए-हम-क़दमी की छतरी को थामे रखना,

    शक-ओ-शुबह के छींटे तक इस बार पड़ ना पायें।


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    3 min
  • ग़ज़ल - इश्क़ है (Ghazal - Ishq Hai)

    तुम अकेले में अगर हो मुस्कुराते इश्क़ है।

    महफ़िलों में भी अकेले गुनगुनाते इश्क़ है।

    जब नज़र से दूर हो वो चैन दिल को ना मिले,

    सामने जब वो पड़े नजरें चुराते इश्क़ है।

    बेखबर तो है नहीं वो जानती हर बात है,

    हाल कहते होंठ फिर भी थरथराते इश्क़ है।

    ख़्वाब देखे जो खुली आँखों से तुमने रात दिन,

    बंद आँखों में सितारे झिलमिलाते इश्क़ है।

    हाथ उठते जब दुआ में माँगते उसकी ख़ुशी,

    नूर उसके अक्स का दिल में सजाते इश्क़ है।

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    शाइर - विवेक अग्रवाल 'अवि'

    संगीत और गायन - रानू जैन

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    Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/vivek-agarwal70/message
    8 min
  • भजन - हरे कृष्णा हरे कृष्णा (Bhajan - Hare Krishna Hare Krishna)

    बड़ा पावन है दिन आया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।

    ख़ुशी भी साथ में लाया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।


    मदन मोहन मुरारी की छवी लगती मुझे प्यारी,

    तभी तो झूम कर गाया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।


    नहीं असली जगत में कुछ वही बस एक सच्चा है,

    सभी कुछ कृष्ण की माया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।


    नहीं कुछ कामना बाकी तेरे चरणों में आ बैठा,

    सभी कुछ है यहीं पाया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।


    सुनो विनती मेरी भगवन हमेशा साथ में रहना,

    रहे 'अवि' पर तेरा साया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।


    श्रद्धा सहित

    सुर और संगीत - डॉ सुभाष रस्तोगी

    लेखन - विवेक अग्रवाल 'अवि'


    9 min
  • Bhajan - Hare Krishna (हरे कृष्णा)

    बड़ा पावन है दिन आया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।

    ख़ुशी भी साथ में लाया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।

    मदन मोहन मुरारी की छवी लगती मुझे प्यारी,

    तभी तो झूम कर गाया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।

    नहीं असली जगत में कुछ वही बस एक सच्चा है, 

    सभी कुछ कृष्ण की माया हरे कृष्णा हरे कृष्णा। 

    नहीं कुछ कामना बाकी तेरे चरणों में आ बैठा,

    सभी कुछ है यहीं पाया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।

    सुनो विनती मेरी भगवन हमेशा साथ में रहना,

    रहे 'अवि' पर तेरा साया हरे कृष्णा हरे कृष्णा।

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    श्रद्धा सहित

    संगीत और सुर - डॉक्टर सुभाष रस्तोगी

    लेखक - विवेक अग्रवाल 'अवि'

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    Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/vivek-agarwal70/message
    9 min
  • आज़ादी के मायने (Azadi Ke Mayne)

    ये आज़ादी मिले हमको हुए हैं साल पचहत्तर।

    बड़ा अच्छा ये अवसर है जरा सोचें सभी मिलकर।

    सही है क्या गलत है क्या मुनासिब क्या है वाजिब क्या।

    आज़ादी का सही मतलब चलो समझें ज़रा बेहतर।

    Full Poem is available for listening

    You may write to me at [email protected]


    6 min
  • ग़ज़ल - न सुकून है (Ghazal - Na Sukun Hai)

    न सुकून है न ही चैन है; न ही नींद है न आराम है।

    मेरी सुब्ह भी है थकी हुई; मेरी कसमसाती सी शाम है।


    न ही मंज़िलें हैं निगाह में; न मक़ाम पड़ते हैं राह में,

    ये कदम तो मेरे ही बढ़ रहे; कहीं और मेरी लगाम है।

     

    कि बड़ी बुरी है वो नौकरी; जो ख़ुदी को ख़ुद से ही छीन ले,

    यहाँ पिस रहा है वो आदमी; जो बना किसी का ग़ुलाम है।

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    शाइर - विवेक अग्रवाल 'अवि'

    आवाज़ - नरेश नरूला

    7 min
  • ग़ज़ल- कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

    कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

    बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया

     

    साहिर उस दौर के शायर थे जब शायरी ग़म-ए-जानाँ तक न सिमट ग़म-ए-दौराँ की बात करने लगी थी। इस ग़ज़ल का मतला भी ऐसा ही है जो न सिर्फ खुद के गम पर हालात के गम का ज़किर भी करता है। आज इसी ग़ज़ल में कुछ और अशआर जोड़ने की हिमाकत की है। मुलाइज़ा फरमाइयेगा।

    4 min
  • ग़ज़ल - न तू ग़लत न मैं ग़लत (Ghazal - Na Tu Galat Na Mein Galat)

    तू आग थी मैं आब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    तू ज़िन्दगी मैं ख़्वाब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    उधर भी आग थी लगी इधर भी जोश था चढ़ा,

    नया नया शबाब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    जो सुर्ख़ प्यार का निशाँ तिरी निगाह में रोज था,

    मिरे लिये गुलाब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    ख़मोश लब तिरे रहे हमेशा उस सवाल पर,

    वही तिरा जवाब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    ख़ुशी व ग़म का बाँटना मिरे लिए वो प्यार था,  

    तिरे लिए हिसाब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    दिलों में गाँठ क्यूँ पड़ी ये आज तक नहीं पता,

    वो वक़्त ही ख़राब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

    अलग अलग है रास्ता अलग अलग हैं मंज़िलें,

    कोई न हम-रिकाब था न तू ग़लत न मैं ग़लत।

     

    शाइर - विवेक अग्रवाल 'अवि'

    सुर और संगीत - रणधीर सिंह

    5 min
  • बस समय है प्यार का

    ये जिंदगी का मोड़ वो, कि बस समय है प्यार का।

    सवाल ना जवाब ना, न वक़्त इंतिज़ार का।

     

    क्यों छोड़ कर चले गए, ये आज तक नहीं पता।

    मिली मुझे बड़ी सजा, मेरी भला थी क्या ख़ता।

    कि आज भी जिगर में है, वो अक्स मेरे यार का।

    ये जिंदगी का मोड़ वो, कि बस समय है प्यार का।

     

    मिले थे आखिरी दफा, न कुछ सुना न कुछ कहा।

    नजर से बस नजर मिला, न अश्क़ भी कहीं बहा।

    न देख तू यहाँ वहाँ, ये वक़्त है इज़्हार का।

    ये जिंदगी का मोड़ वो, कि बस समय है प्यार का।

     

    लबों पे रख चला गया, निदा तेरे ही नाम की।

    उसेक पल में पी गया, शराब लाख जाम की।

    कि आज तक चढ़ा हुआ, नशा उसी ख़ुमार का।

    ये जिंदगी का मोड़ वो, कि बस समय है प्यार का।

     

    पता नहीं मुझे तेरे, मिज़ाज का ख़िसाल का।

    नसीब में है क्या लिखा, तेरे मेरे विसाल का।

    नहीं ख़याल है मुझे, उसूल का वक़ार का।

    ये जिंदगी का मोड़ वो, कि बस समय है प्यार का।


    ये जिंदगी का मोड़ वो, कि बस समय है प्यार का।

    सवाल ना जवाब ना, न वक़्त इंतिज़ार का।


    6 min

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