"कहानी सुनोगे?"- Panchatantra Ki Kahaniyaan

"कहानी सुनोगे?"- Panchatantra Ki Kahaniyaan

By nalini varshneyArtsBooks
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"कहानी सुनोगे?"- Panchatantra Ki Kahaniyaan episodes

  • मूर्खमंडली
    उल्लुमंत्री रक्ताक्ष समझ चुका है कि अब बहुत देर हो चुकी है। उसे मूर्खमंडली की कथा याद आती है जिसमें हाथ आए स्वर्ण को, मूर्खता के कारण गंवा दिया जाता है; जैसे वे स्वयं कर रहे थे, हाथ आए शत्रु मंत्री का सही लाभ न उठा कर !
    8 min
  • चुहिया का स्वयंवर
    रक्ताक्ष, अन्य उल्लुओं को सही मार्ग दिखाने का एक अंतिम प्रयास कर रहा है। उसका ज्ञान और अनुभव उसे बता रहे हैं कि कोई भी जीव या प्राणी कभी न कभी, कहीं न कहीं अपना मूल स्वभाव प्रकट कर ही देता है। उसे स्थिरजीवी पर विश्वास नहीं है और इस कथा द्वारा वह यही समझने का प्रयास कर रहा है।
    9 min
  • मूर्ख रथ निर्माता
    उल्लूराज के निर्णय से रक्ताक्ष बहुत विचलित है। वो अन्य मंत्रियों को समझाने का प्रयास कर रहा है कि वे खुली आंखों से गलती कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वह उनको मूर्ख रथ निर्माता की कथा सुनाता है।
    12 min
  • ब्राह्मण,चोर और राक्षस
    उल्लूराज अरिमर्दन, अब अपने चौथे और पांचवें मंत्री की सलाह सुन रहा है। शत्रु पक्ष के पकड़े गए मंत्री के साथ क्या करना चाहिए? वक्रनास और प्रकारकर्ण दोनों ही काक मंत्री को जीवन दान देने के पक्ष में हैं और अपने अपने दृष्टिकोण को समझाने के लिए कथाओं का सहारा लेते हैं।
    15 min
  • बलिदानी कबूतर
    क्रुरक्ष, उल्लुराज अरिमर्दन को समझाने का प्रयास करता है कि शरण में आए जीव को मारना अनुचित है। इसी संदर्भ में वह अरिमर्दन को बलिदानी कबूतर की कथा सुनाता है।
    14 min
  • नाग और स्वर्ण मुद्राएं
    रक्ताक्ष, उल्लू राज का मंत्री उन्हें नाग और स्वर्ण मुद्राओं की कथा सुनाता है जिसके द्वारा वो उल्लू राज को समझना चाहता है की हाथ आए अवसर को खोना नहीं चाहिए। इस कथा के द्वारा वो यह भी व्यक्त करता की शत्रु का मंत्री हाथ लगना कोई छोटी बात नहीं है। इस अवसर का उन्हें पूर्ण रूप से लाभ उठाना चाहिए।
    11 min
  • स्थिरजीवी की चाल
    इस एपिसोड में स्थिरजीवी एक ऐसे विकल्प का प्रयोग करता है जिससे उसकी मान्यता अनुसार, उल्लुराजा को हराया जा सकता है। वो विकल्प क्या है ? यह जानने के लिए एपिसोड सुनिए और देखिए कि ऐसे विकल्प उस समय से लेकर आज तक चले आ रहे हैं।
    12 min
  • ब्राह्मण और तीन ठग
    इस कहानी में स्थिरजीवी, मेघवर्ण को समझने का प्रयास कर रहे हैं कि किस प्रकार सामान्य ज्ञान और सामान्य बुद्धि को चालाकी से प्रयोग कर अपना काम निकाला जा सकता है। वह मेघवर्ण को यह भी समझता है कि निर्बल जीवों की शत्रुता हानिकारक हो सकती है और यह दर्शाने के लिए वो सर्प और चींटियों की कथा भी सुनाता है।
    11 min
  • बिल्ली का न्याय
    कौवा हर प्रयास कर रहा है कि किसी तरह अन्य पक्षी समझ जाएं की उल्लू के पक्षीराज का चयन सही नहीं है। इस बात को और गहराई से समझने के लिए वो पक्षियों को बिल्ली के न्याय की कथा सुनाता है। पक्षी तो उसकी बात मान लेते हैं किंतु जब उल्लू को ज्ञात होता है कि कौवे ने उसके बारे में अन्य पक्षियों को भड़काया है तो वो बहुत क्रोधित हुआ । और इसी तरह कौवों और उल्लुओं में शत्रुता आरंभ हुई।
    15 min
  • गजराज और चंद्रताल
    पक्षीराज का चयन होने जा रहा है। किंतु कौवे को उल्लू का चयन पसंद नहीं। वह उदाहरण स्वरूप यह कथा सुनाता है, जिससे अन्य पक्षी यह समझ सकें कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व वाला राजा, जैसे महाराज गरुड़ हैं, उनके नाम मात्र से ही शत्रु पीछे हट जाता है । यही बात दर्शाने के लिए कौवा , गजराज और चंद्रताल की कथा सुनाता है।
    17 min

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I love stories ! And this podcast is all about stories as well as their backgrounds. Starting with Panchatantra, we will move on to other traditional/mythological tales.