पक्षीराज का चयन होने जा रहा है। किंतु कौवे को उल्लू का चयन पसंद नहीं। वह उदाहरण स्वरूप यह कथा सुनाता है, जिससे अन्य पक्षी यह समझ सकें कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व वाला राजा, जैसे महाराज गरुड़ हैं, उनके नाम मात्र से ही शत्रु पीछे हट जाता है । यही बात दर्शाने के लिए कौवा , गजराज और चंद्रताल की कथा सुनाता है।