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Offbroadcast (recording first time being public) of Irfan's first Radio Broadcast from All India Radio Allahabad, 1985
Featured as Syed Mohd Irfan; PEX Mahendra Modi
Photo: Kamal, Fotofare, Allahabad
Cover Art: Irfan
Conceived, Devised, Written and Produced by Irfan
Audio Courtesy : Gutterati Productions
घोड़े को जलेबी खिलाने ले जा रिया हूँ अनामिका हक्सर की पहली फीचर लेंथ फिल्म है और जैसा कि अक्सर देखा गया है कि निर्देशक अपनी पहली फिल्म में अपने सारे अरमान पिरो देता है। फिल्म का कोई कथानक नहीं है। कम से कम प्रचलित अर्थों में बिलकुल ही नहीं। यानी अगर आप फिल्म में कोई कहानी ढूँढें जिसका कोई आरम्भ मध्य और अंत हो, तो वह इसमें नहीं है।
तो आप पूछेंगे कि फिल्म में क्या है ?
फिल्म में पुरानी दिल्ली है, उसकी गलियां हैं, कूड़े के ढेर हैं, नशेड़ी, जेबकतरे, उठाईगीरे, बेघर और आवारा लोग हैं, परित्यक्ता और विधवाएं हैं, क़ब्र में पैर लटकाए बूढ़े, मारी तताडी औरतें, रेहड़ी पटरी पर बसर करने वाले, पल्लेदार ----गोया हर वो शख्स और शै जो एलीटिस्ट आर्ट के दायरे से बाहर है, वो फिल्म के भीतर है। बल्कि इससे भी एक कदम आगे बढ़ कर फिल्म में समेटी गयी इस दुनिया के सपने ---उनके ख्वाब फिल्म की योजना का आधार है। और ज़्यादातार बार ये सपने ये ख्वाब नाइटमेयर्स ही हैं।
फिल्म का एक पृथक संसार पुरानी दिल्ली के इतिहास, गौरव उर्फ़ झूठी शान के शामियाने की तरह ताना गया है जिसके नीचे भूखे, उदास और निराश बैंड बाजे वाले एक ऎसी धुन बजा रहे हैं जो ढंग से न अतीत का कोई दस्तावेज़ी सुराग़ छोड़ती है न वर्तमान की कोई टीस पैदा करती है। और यह प्रति संसार एक ढहती हुई सभ्यता की एक दूसरे को काटती हुई छवियों की शक्ल में सामने आता है।
फिल्म की शुरुआत कम्युनिस्ट इंटरनेशल की धुन से होती है और हम एनिमेटेड मैनर में एक मज़दूर को एक विशाल विस्तृत लाल झंडा लिए हुए देखते हैं जो ताहद्देनज़र शहर को अपनी आगोश में लिए हुए है या कहिये दृश्य में आनेवाली सभी बस्तियां उस लाल झंडे से आच्छादित हैं, एक लाल नदी गलियों, बाज़ारों, घरों, बस्तियों से निकलती हुई क्षितिज तक चली गयी है।
अब आप शायद समझ गए होंगे कि फिल्म एक निश्चित आस्थागत धरातल पर खड़े होकर बनाई गयी है और वो एक ज़रूरी धरातल है जिसे खाद पानी मिलता है एम्पैथी से। फिल्म में एकाधिक बार एक शब्द सुनाई पड़ता है - सबऑलटर्न। और यह सबऑलटर्न कथाकथन लौट लौटकर मज़दूरों की मांसल श्रम गतिविधियों और छीन ली गयी मानवीय गरिमा को छवियों, प्रतीकों और ध्वनियों के माध्यम से सामने आता है।
पुरानी दिल्ली के जीवन का अभिन्न अंग होने के नाते ये बहुत स्वाभाविक था कि जामा मस्जिद, कुश्ती के अखाड़े , उनका सिग्नेचर साउंड, गलियों की आवाज़ें, खान पान, बोली भाषा, दरगाहें, कव्वालियां, पतंगबाजी, शादी ब्याह और बैंड बाजे, शेरो शायरी और दैनंदिन जीवन का नाटकीय व्यवहार फिल्म में आता, जो कि आया भी। चूँकि फिल्म घटनात्मकता से कोसों दूर है इसलिए विजुअल ग्राफिक्स, एनीमेशन और स्पेशल इफेक्ट्स के ज़रिये चौंकाने, एकरसता तोड़ने और दृश्य को मल्टीलेयर्ड बनाने की कोशिश की गयी है। ये सिनेमाई प्राविधि इसलिए भी ज़रूरी थी कि हाशिये पर फ़ेंक दिए गए लोगों के सपनों की अक्कासी की जा सके।
फिल्म में एक मजदूर नेता भी निरंतर अपनी उपस्थिति बनाए रखता है और आखिर में एक भाषण भी देता है जिसका आशय शोषण की चली आ रही व्यवस्था को बता सकना है।
चूँकि यह फिल्म फंसे, उलझे, बेबस और निराश हो चुके संसार को नजदीक से देखना और दिखाना चाहती है इसलिए सिनेमैटोग्राफी और साउंड के अलावा एडिटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन पर भारी ज़िम्मेदारी आनी थी जो इन सभी विभागों ने बखूबी निभाई है।
मेरी दिलचस्पी फिल्म के अंत को लेकर थी जो बहुत प्रेडिक्टेबल ढंग से उन बच्चों के संगीत से ही हुई जो यूट्यूब पर मौजूद FOLI की याद दिलाता है और जो फिल्मकार की आशावादी सदिच्छा भर है।
अभिनेताओं ने बहुत मेहनत से अपनी भूमिकाएं निभाईं। फिल्म में रघुवीर यादव भी हैं जो इसलिए ज़रूरी थे कि पुरानी दिल्ली के फेरीवालों की बहुचर्चित स्टाइल को अपनी गायकी में पेश कर सकें। खुद रघुवीर यादव को ऐसा लगता है कि फिल्म के बीच बीच में उनका छिड़काव सा कर दिया गया है।
(contd)
Featuring Lokesh Jain, Ravindra Sahu, Raghubir Yadav, Arun Kumar Kalra, A K Gopalakrishnan
Directed and Produced by Anamika Haksar
Production designer Archana Shastri
Editor Paresh Kamdar
DOP Somo Sahi
Music Tyrax
Sound Gautam Nair
Cover Art: Film's Official Poster
Chapter 16 of 54 from the audio book SUNO MF HUSAIN KI KAHANI produced by Irfan in 2003
featuring in this episode Munish Sharma and Banwari Taneja
A JOURNEY IN SOUND
New Delhi 17 September 2003
Want to procure this precious audio book?
Contact: [email protected]
Cover sketch of Ram Manohar Lohia: MF Husain
Cover Art: Irfan
A rare recording of a public event in Allahabad, 1983
Preserved, Digitized and Curated by Irfan
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To all my Listeners-
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Bank Name: State Bank Of India
Name: SYED MOHD IRFAN
Account No: 00000032188719331
Branch: State Bank of India, Sansadiya Saudh, New Delhi
IFSC–SBIN0003702
***
UPI ID:
irfan.rstv@oksbi
Cover illustration: Google
Cover Art: Irfan
A rare recording of a public event in Allahabad, 1983
Preserved, Digitized and Curated by Irfan
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Cover Art: Irfan
Full recording of IIMC's 54th Convocation Lectore by Shri Harivansh, Senior Journalist and Deputy Chairman Rajya Sabha
Recorded and reported from the field on 6th June 2022, by Irfan
IIMC, Aruna Asaf Ali Road, Delhi
Image Banner at IIMC
Image Clicked and Cover Art: Irfan
#ListenWithIrfan_Exclusive
A 1983 field recording. First time being released on Podcast.
Preserved, Digitized and Curated by Irfan.
Ramtaji, President Indian People Front, singing a song wrote by him.
Cover Image: Google
Cover Art: Irfan
Borchi song as we call it, is being curated here for the sake of the illustration of a blogpost translated in Hindi by Ashok Pande.
A post cooked with a light heartedly manner to bring the Indian music scene into the focus.
Asking forgiveness from the great Malian singer and multi instrumentalist Ali Farka Toure (31 October 1939 – 6 March 2006)
Cover art: Google
A rare recording of Bhawani Prasad Mishra (1913 - 1985) reciting his poem.
Curated by Irfan.
सुनिए वाचन का प्रभाव। जब कविता ठीक उसी भाव को जन्म दे जिस इरादे और गुस्से से जन्मी हो।
(कवि भवानी प्रसाद मिश्र के स्वर में एक दुर्लभ रिकॉर्डिंग)
हाय रे संसार सागर
बन अगर पड़ता तो मैं
तुझको बनाता एक गागर
झुलाकर हाथों में अपने
उठाकर कन्धों से ऊपर
मैं तुझे दे मारता पल भर नचाकर
सख़्त भू पर ...
Audio Courtesy: Shubham Mishra
Photo Courtesy: Google
Cover Art: Irfan
Poet reciting his poems.
Recorded on 30th May 2022 by Irfan at Vishnu Nagar's residence, Delhi
Photo and Cover Art: Irfan
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