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"हमेशा याद रखें, जो भी मैं आपसे कहता हूं, आप इसे दो तरीकों से ले सकते हैं। आप इसे बस मेरे अधिकार पर ले जा सकते हैं, 'क्योंकि ओशो ऐसा कहते हैं, यह सच होना चाहिए' - तब आप पीड़ित होंगे, तब आप नहीं बढ़ेंग... more
FAQs about Never Born, Never Died - हिन्दी:How many episodes does Never Born, Never Died - हिन्दी have?The podcast currently has 342 episodes available.
August 25, 2021धर्म-मेघ समाधि (अध्यात्म उपनिषद - ग्यारहवां प्रवचन )वृत्तयस्तु तदानीमप्यज्ञाता आत्मगोचरा:।स्मरणादनुमीयन्ते व्युत्थितस्य समुत्थिता:।। 36।।अनादाविह संसारे संचिता: कर्मकोटयः।अनेन विलयं यान्ति शुद्धो धर्मोऽभिवर्धते।। 37।।धर्ममेधमिमं प्राहुः समाधि योगवित्तमा:।वर्षत्येष यथा धर्मामृतधारा: सहस्रश:।। 38।।अमुना वासनाजाले निःशेष प्रविलापिते।समूलोन्मूलिते पुण्यपापाख्ये कर्मसंचये।। 39।।वाक्यमप्रतिबद्धं सत् प्राक् परोक्षावमासते।करामलकवद्बोधमपरोक्षं प्रसूयते।। 40।।...more2h 2minPlay
August 24, 2021सत्य की यात्रा के चार चरण (अध्यात्म उपनिषद - दसवां प्रवचन )इत्थं वाक्यैस्तदर्थानुसंधानं श्रवणं भवेत।युक्ता सभावितत्वा संधानं मननं तु तत्।। 33।।ताभ्यां निर्विचिकित्सेऽर्थे चेतसः स्थापितस्य तत्।एकतानत्वमेतद्धि निदिध्यासनमुच्यते।। 34।।ध्यातृध्याने परित्यज्य क्रमाद्धयैयैकगोचरम्।निवातदीपवच्चितं समाधिरभिधीयते।। 35।।...more1h 42minPlay
August 23, 2021ब्रह्म की छाया संसार है (अध्यात्म उपनिषद - नौवां प्रवचन )मायोपाधिर्जगद्योनिः सर्वज्ञत्वादिलक्षण:।पारोक्ष्यशबलः सत्याद्यात्मकस्तत्पदाभिध:।। 30।।आलम्बतनया भाति योऽस्मत्प्रत्ययशब्दयो:।अंतःकरणसंभिन्नबोध: स त्वपदाभिध:।। 31।।मायाऽविद्ये विहायैव उपाधी परजीवयो:।अखंड सच्चिदानन्दं परं ब्रह्म विलक्ष्यते।। 32।।...more2h 13minPlay
August 22, 2021वैराग्य का फल ज्ञान है (अध्यात्म उपनिषद - आठवां प्रवचन )चित्तमूलो विकल्पोऽयं चित्ताभावे न कश्चन।अतश्चित्तं समाधेहि प्रत्यग्रूपे परात्मनि।। 26।।अखंडानंदमात्मनं विज्ञाय स्वस्वरूपतः।बहिरंतः सदानंदरसास्वादनमात्मनि।। 27।।वैराग्यस्य फलं बोधो बोधस्योपरतिः फलम्।स्वानंदानुभवाच्छान्तिरेषैवोपरते: फलम्।। 28।।यद्युत्तरोत्तराभावे पूर्वपूर्वं तु निष्फलम्।निवृक्तिः परमा तृप्तिरानन्दोऽनुपमः स्वतः।। 29।।...more2h 12minPlay
August 21, 2021चैतन्य का दर्पण (अध्यात्म उपनिषद - सातवां प्रवचन )स्वात्मन्यारोपितशेषाभासवस्तुनिरासितः।स्वयमेव परब्रह्म पूर्णमद्वयमक्रियम्।। 21।।असत्कल्पो विकल्पो यं विश्वमित्येकवस्तुनि।निर्विकारे निराकरे निर्विशेषेर्भिदा कुतः।। 22।।द्रष्टा दर्शनदृश्यादिभावशून्ये निरामये।कल्यार्णव इवात्यन्तं परिपूर्णे चिदात्मनि।। 23।।तेजसीव तमो यत्र विलीनं भ्रांतिकारणम्।अद्वितीये परे तत्वे निर्विशेषेर्भिदा कुतः।। 24।।एकात्मके परे तत्वे भेदकर्ता कथं वमेत्।सुषुप्तौ सुखमात्रायां भेदः केनावलोकितः।। 25।।...more1h 35minPlay
August 20, 2021जीवन एक अवसर है (अध्यात्म उपनिषद - छठवां प्रवचन )जीवतो यस्य कैवल्यं विदेहोऽपि स केवलः।समाधिनिष्ठतामेत्य निर्विकल्पो भवानघ।। 16।।अज्ञानहृदयग्रन्थेर्निः शेषविलयस्तदा। समाधिनाऽविकल्पेन यदाऽद्वैतात्मदर्शनम्।। 17।।अत्रात्मत्वं दृढीकुर्वन्नहमादिषु संत्यजन्।उदासीनतया तेषु तिष्ठेद्घटपटादिवत्।। 18।।ब्रह्मादिस्तम्ब पर्यन्तं मृषामात्रा उपाधयः।ततः पूर्ण स्वात्मनं पश्येदेकात्मना स्थितम्।। 19।।स्वयं ब्रह्मा स्वयं विष्णुः स्वयमिन्द्रः स्वयम् शिवः।स्वयं विश्वमिदं सर्व स्वस्मादन्यन्न किंचन्।। 20।।...more1h 42minPlay
August 19, 2021वासना का नाश ही मोक्ष है (अध्यात्म उपनिषद - पांचवां प्रवचन )अहंकारग्रहान्मुक्तः स्वरूपमुपपद्यते।चंद्रवत्विमलः पूर्ण सदानन्दः स्वयंप्रभः।। 11।।क्रियानाशा˜वेच्चिन्तानाशो तस्माद्वासनाक्षयः।वासनाऽपक्षयोमोक्षः स जीवन्मुक्तिरिष्यते।। 12।।सर्वत्र सर्वतः सर्व ब्रह्ममात्रावलोकनम्। स˜ावभावनादाढ्र्याद्वासनालश्यमनुते।। 13।।प्रमादो ब्रह्मनिष्ठायां न कर्तव्यः कदाचन।प्रमादो मृत्युरित्याहुर्विद्यायां ब्रह्मवादिनः।। 14।।यथाऽपकृष्ठं शैवालं क्षणमात्र न तिष्ठति।आवृणोति तथा माया प्राज्ञां वाऽपि परांगमुखम्।। 15।।...more1h 41minPlay
August 18, 2021अमृत का जगत (अध्यात्म उपनिषद - चौथा प्रवचन)मातापित्रोर्मलो˜ूतं मलमांसमयं वपुः।त्यक्त्वा चण्डालवद्दूरं ब्रह्मभूयं कृती भव।। 6।।घटाकाशं महाकाशं इवात्मानम् परात्मनि।विलाप्याखंडभावेनं तूयणीं भव सदा मुने।। 7।।स्वप्रकाशमधिष्ठानं स्वयंभूय सदात्मना।ब्रह्मांडमपि पिंडांडं त्यज्यतां मलभांडवत्।। 8।।चिदात्मनि सदानन्दे देहरूढामहंधियम्।निवेश्य लिंगमुत्सृज्य केवलो भव सर्वदा।। 9।।यत्रैष जगदाभासो दर्पशान्तः पुरं यथा।तद्ब्रह्माहमिति ज्ञात्वा कृतकृत्यो भवानघ।। 10।।...more2h 30minPlay
August 17, 2021नेति-नेति (अध्यात्म उपनिषद - तीसरा प्रवचन)ज्ञात्वा स्वयं प्रत्यगात्मनं बुद्धितद्वृत्तिसाक्षिणम्।सौऽहमित्येव तद्वृत्या स्वान्यत्रात्ममतिं व्यजेत्।। 2।।लोकानुवर्तनं त्यक्त्वा त्यक्त्वा देहानुवर्तनम्।शास्त्रानुवर्तनम् त्यक्त्वा स्वाध्यासापनयं करु।। 3।।स्वात्मन्येव सदा स्थित्या मनो नष्यति योगिनः।युक्त्या श्रुत्या स्वानुभूत्या ज्ञात्वा सावत्म्यिमात्मनः।। 4।।निद्राया लोकवार्तायाः शब्दादेरात्मविस्मृतेः।क्वचिन्नावसरं दत्वा चिन्तयात्मानमात्मनि।। 5।।...more2h 24minPlay
August 16, 2021परमात्मा मझधार है (अध्यात्म उपनिषद - दूसरा प्रवचन)अंतः शरीरे निहतो गुहायामज एको नित्यमस्य। पृथिवी शरीरं यः पृथिवीमंतरे संचरन् यं पृथिवी न वेद। यस्यापः शरीरं योऽपोऽन्तरे संचरन् यमापो न विदुः। यस्य तेजः शरीरं यस्तेजोऽन्तरे संचरन् यं तेजो न वेद। यस्य वायुः शरीरं यो वायुमन्तरे संचरन् यं वायुर्न वेद। यस्याकाशः शरीरं य आकाशमन्तरे संचरन् यमाकाशो न वेद। यस्य मनः शरीरं यो मनोऽन्तरे संचरन् यं मनो न वेद। यस्य बुद्धिः शरीरं यो बुद्धिमन्तरे संचरन् यं बुद्धिर्न वेद। यस्याहंकारः शरीरं योऽहंकारमन्तरे संचरन् यमहंकारो न वेद। यस्य चित्त शरीरं यश्चित्तमन्तरे संचरन् यमचित्तं न वेद। यस्याव्यक्तं शरीरं योऽव्यक्तमन्तरे संचरन् यमव्यक्तं न वेद। यस्याक्षरं शरीरं योऽक्षरमन्तरे संचरन् यमक्षरं न वेद। यस्य मृत्युः शरीरं यो मृत्युमन्तरे संचरन् यं मृत्युर्न वेद। स एष सर्वभूतान्तरात्माऽपहतपाप्मा दिव्यो देव नारायणः। अहं समेति यो भावो देहाक्षाद्यवनात्मनि। अध्यासो यं निरस्तव्यो विदुषा ब्रह्मनिष्ठया।। 1।।...more2h 12minPlay
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