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  • एनएल चर्चा 290: द लेजेंड बिशन सिंह बेदी और 'रथ प्रभार' के मायने

    इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय केंद्र सरकार द्वारा अपनी योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार हेतु लिया गया सरकारी अधिकारियों को रथ प्रभारी बनाने का फैसला और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी का निधन आदि रहे.  


    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में पेपर लीक मामले में राजस्थान के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा छापेमारी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे बैभव गहलोत को ईडी द्वारा तलब करना, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा महाराष्ट्र में 7500 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास किया और चुनाव आयोग द्वारा अभिनेता राजकुमार राव को अपना नेशनल आइकन बनाने की घोषणा आदि शामिल रहीं.


    इसके अलावा उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग का फैसला- मुज़फ्फरनगर में अवैध मदरसों को बंद करें या दस हजार रुपये प्रतिदिन जुमार्ना भरें, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का सरकारी अधिकारियों को रथ प्रभारी बनाने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना आदि मुद्दे भी हफ्तेभर तक सुर्खियों में बने रहे. 


    नागपुर में विजयादशमी संबोधन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख का बयान- सांस्कृतिक मार्क्सवादी कर रहे हैं देश का माहौल ख़राब और बिहार की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी जातिगत जनगणना की मांग आदि मुद्दों ने भी हफ्तेभर तक सुर्खियां बटोरी.           


    इस हफ्ते चर्चा में वरिष्ठ खेल पत्रक चंद्रशेखर लूथरा, अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार स्मिता शर्मा, एडीआर के सह संस्थापक एवं पूर्व प्रोफेसर जगदीप छोकर और वरिष्ठ पत्रकार संगीता बरुआ शामिल हुईं. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से विकास जांगड़ा ने चर्चा में हिस्सा लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.


    चर्चा के प्रमुख विषय केंद्र सरकार द्वारा सरकारी अधिकारियों को रथ प्रभारी बनाने के फैसले को लेकर अतुल मेहमानों से सवाल करते हैं, “मैं ये जानना चाह रहा था कि क्यों ये एक अप्रत्याशित फै है और ऐसा करना सही नहीं है? साथ ही इस फैसले के दूरगामी दुष्परिणाम या सुपरिणाम क्या हो सकते हैं?”


    इसके जवाब में जगदीप छोकर कहते हैं, “प्रशासनिक कार्यकारी को राजनीतिक तौर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए. लेकिन सरकार का ये फैसला प्रशासनिक अधिकारियों को राजनीति में लाने का तरीका है, जिससे कि एक (पार्टी विशेष के प्रति) ‘प्रतिबद्ध नौकरशाह समूह’ का निर्माण हो सके. ये बात इंदिरा गांधी के वक्त में भी हुई थी लेकिन इतनी खुल्लम-खुल्ला नहीं हुई थी. बल्कि अगर हम याद करें तो इंदिरा गांधी का चुनाव ही इस वजह से रद्द किया गया था क्योंकि उन्होंने चुनाव में कुछ अधिकारियों की मदद ली.” 


    छोकर आगे कहते हैं कि नौकरशाही का काम योजनाओं का क्रियान्वन है ना कि उनका प्रचार करना है. प्रचार के लिए सरकार के पास अलग से विभाग हैं, जैसे कि डीएवीपी है, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो है और भी कई संस्थाएं हैं. लेकिन यहां तो प्रशासन को कहा जा रहा है कि काम मत करो बल्कि सरकार के लिए प्रचार करो.                            

            

    टाइम्स कोड्स


    00 - 4:20 - इंट्रो और जरूरी सूचना


    4:20 - 51:28 - सरकारी अधिकारियों को रथ प्रभारी बनाने का केंद्र का फैसला


    51:28 - 55:10 - सुर्खियां


    55:15 - 1:05:42 - सब्सक्राइबर्स के मेल


    1:05:42 - 1:26:05 - भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी का निधन


    1:26:05 - सलाह और सुझाव


    ट्रांसक्राइब: तस्नीम फातिमा/सत्येंद्र चौधुरी

    प्रोड्यूसर: चंचल गुप्ता

    एडिटर: उमराव सिंह



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    1 hr 34 min
  • एनएल चर्चा 289: समलैंगिक विवाह से सुप्रीम कोर्ट का इनकार और निठारी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई

    इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा निठारी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली एवं महेंद्र सिंह पंढेर की रिहाई का आदेश और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर सदन में सवाल पूछने के आरोप और इज़रायल-हमास के बीच जारी खूनी संघर्ष आदि रहे. 


    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में गाजा के एक अस्पताल पर हवाई हमले में 500 से ज्यादा लोगों की मौत, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तेज किए उद्योगपति गौतम अडाणी पर हमले, इंडिया गठबंधन में अभी तक सीटों के बंटवारे को लेकर नहीं बनी बात और न्यूज़क्लिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से नोटिस जारी कर मांगा जवाब आदि शामिल रहे. 


    इसके अलावा टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले में दिल्ली की साकेत अदालत ने पांच लोगों को ठहराया दोषी, ईडी एवं सीबीआई ने आबकारी नीति मामले में कहा- पूरी आम आदमी पार्टी को भी बनाया जा सकता है आरोपी और इंडियन-अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल एवं हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स के ट्विटर अकाउंट को भारत सरकार ने किया निलंबित करने का एलान आदि मुद्दों ने भी हफ्तेभर तक सुर्खियां बटोरी.  


    इस हफ्ते चर्चा में लैंगिक मामलों की जानकार संध्या ने हिस्सा लिया. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से हृदयेश जोशी, स्तंभकार आनंद वर्धन और मनीषा पांडे शामिल हुईं. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के मैनेजिंग एडिटर अतुल चौरसिया ने किया.


    चर्चा के प्रमुख विषय समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अतुल कहते हैं कि ऐसे विवाहों को कानूनी मान्यता देने का यह ऐतिहासिक मौका था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया. कानून बनाने की जिम्मेदारी विधायिका पर छोड़ते हुए शीर्ष अदालत ने स्वयं को इससे अलग कर लिया. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट क्या कर सकता था और उसने ऐसा क्यों नहीं किया? 


    इसके जवाब में संध्या कहती हैं, “निश्चित तौर पर यह एक ऐतिहासिक मौका था. हमें लगता था कि शीर्ष अदालत समलैंगिक समुदाय के लोगों को बच्चा गोद लेने का अधिकार देगा लेकिन ऐसा करना तो दूर उसने शादी की भी कानूनी इजाजत नहीं दी. उसने मामला विधायिका पर टाल दिया. कोर्ट चाहता तो इसकी व्याख्या स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कर सकता था. लेकिन पता नहीं उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया.”  


    संध्या आगे कहती हैं, “सबसे बड़ा दोहरापन यह है कि हम समलैंगिकों को अपनी संस्कृति का हिस्सा नहीं मानते हैं. जबकि अपना इतिहास देखते हैं तो सबकुछ स्पष्ट हो जाता है. खजुराहो की मूर्तियां देख लें. इसी तरह से कोणार्क में देखा जा सकता है. हमारी संस्कृति में यह पहले से ही रहा है. यह पश्चिमी देशों से हमारे यहां नहीं आया है. पश्चिम के लोग खासतौर से रानी विक्टोरिया, समलैंगिकता को अनैतिक मानती थीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया था. इंग्लैंड में समलैंगिक संबंधों की वजह से जोड़ों को जेल में बंद कर दिया जाता था. बाद में यही विचार भारत आया. मैं महाराष्ट्र से हूं इसलिए आपसे कहूंगी कि कोई भी पुरानी मराठी फिल्म देख लीजिए उसमें कम से कम एक ऐसा पात्र मिल जाएगा जो समलैंगिक होगा. इससे किसी को कोई दिक्कत भी नहीं थी क्योंकि यह हमारी संस्कृति में स्वीकार्य था.” 


    इसके जवाब में आनंद वर्धन कहते हैं, “मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला ऐसा नहीं है जो लोगों को दो खेमों में बंटने के लिए उत्तेजित करे. मुझे ऐसा ही फैसला आने की उम्मीद थी और यह फैसला तर्कसंगत लगता है. विवाह के अन्य कानून संसद ने बनाए हैं. सिर्फ स्पेशल मैरिज एक्ट में इसको शामिल करने से समाधान नहीं हो जाएगा. कोर्ट ने इस तरह के कानून बनाने का अधिकार संसद को ही दिया है. समलैंगिकों को उम्मीद थी कि अनुच्छेद-21 में इसे संवैधानिक अधिकार मिले लेकिन शीर्ष कोर्ट ने कहा कि विवाह पर कानून बनाना विधायिका का मामला है. लेकिन मुझे उम्मीद है कि समलैंगिकों के अधिकारों के लिए कानून बनाए जाएंगे. मैं इसके बारे में उतना निराशावादी नहीं हूं.” 


    समलैंगिकों की विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग समेत तमाम मुद्दों पर सुनिए पूरी चर्चा. 


    टाइम्स कोड्स

    00ः00-03:58 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना

    04:00-16:07 - निठारी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई

    16:07-19:30 - सुर्खियां

    19:30-54:12 - समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    54:13 - 01:06:55 - इज़रायल-हमास संघर्ष 

    01:06:55 -  सलाह और सुझाव


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    1 hr 12 min
  • एनएल चर्चा 288: इज़रायल हमास का खूनी संघर्ष और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव

    इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय इजरायल और फिलिस्तीन संघर्ष, पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की घोषणा और सुप्रीम कोर्ट ने 26 सप्ताह की गर्भावस्था को खत्म करने की मांग पर कहा कि हम किसी बच्चे को नहीं मार सकते आदि रहे. 


    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में प्रवर्तन निदेशालय ने वीवो कंपनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक चीनी नागरिक समेत चार लोगों को किया गिरफ्तार, बसपा सांसद दानिश अली पर विवादित टिप्पणी मामले में संसद की विशेषाधिकार समिति में के समक्ष पेश नहीं हुए भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी, इजरायल ने कहा कि हमास जब तक बंधकों की रिहा नहीं करेगा तब तक गाजा को बिजली और पानी की आपूर्ति नहीं करेंगे और आनंद विहार से कामाख्या जा रही नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के बिहार में बेपटरी हो जाने से चार लोगों की मौत आदि शामिल रहे. 


    हफ्ते की अन्य ख़बरों में मणिपुर के राज्यपाल ने नागरिकों से कहा कि धार्मिक स्थलों और विस्थापितों की संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं, दिल्ली हाईकोर्ट ने आईआईटी दिल्ली के फेस्ट में कपड़े बदलते हुए छात्राओं की वीडियो बनाने वाले मामले में स्वतःसंज्ञान लिया, पांच राज्यों में 7 से 30 नवंबर तक होगा मतदान एवं 3 दिसंबर होगी मतगणना और बीते दिनों अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता के भूकंप में 24,00 से ज्यादा लोगों की मौत आदि ख़बरें शामिल रहीं. 


    इसके अलावा पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड शाहिद लतीफ की पाकिस्तान में हत्या, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ छह राज्यों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की छापेमारी, ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत-बांग्लादेश से भी पीछे भारत और इलेक्टोरल बॉन्ड को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 31 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आदि ख़बरें भी हफ्तेभर तक चर्चा का विषय रहीं.  


    इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार स्मिता और आंचल बोहरा शामिल हुईं. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से अवधेश कुमार ने चर्चा में हिस्सा लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. 


    चर्चा के प्रमुख विषय इजरायल-हमास युद्ध पर बात करते हुए अतुल कहते हैं, “सबसे पहले मैं जानना चाहता हूं कि इजरायल की सुरक्षा में सबसे बड़ी चूक कहां हो गई? माना जाता है कि इजरायल की तकनीकी जासूसी बहुत विकसित है. वो हर घटना पर नज़र रखने का दावा करते हैं. हमास ने जितनी संख्या में रॉकेट और बड़े-बड़े हथियारों का इस्तेमाल किया है, इसने इजरायल की छवि को तार-तार कर दिया है. क्या कोई रास्ता निकाल लिया गया है? क्या हमास इतना विकसित हो गया है कि वो इजरायली सुरक्षा को चुनौती दे पा रहा है?”


    इसके जवाब में आंचल कहती हैं, “यह तो बहुत बड़ा सवाल है कि इजरायल से क्या गलती हुई और उनके पास कौन-सी तकनीक थी जिसको उन लोगों ने नज़रअंदाज किया. यह इंटेलिजेंस की असफलता तो है ही लेकिन अगर किसी ने आप पर इतना बड़ा हमला करने का मन बना लिया है तो उसे कोई भी इंटेलिजेंस एजेंसी नहीं रोक सकती. दूसरा सवाल है कि क्या इजरायल की इंटेलिजेंस के बेहतरीन होने की सिर्फ कहानियां हैं या इसमें वास्तविकता भी है.” 


    इसी मामले पर स्मिता कहती हैं, “जिस इजरायल को हम पेगासस, खुफिया एजेंसी, खुफिया सॉफ्टवेयर के लिए जानते हैं जो बाहर से आने वाली मिसाइलों को रास्ते में ही उड़ा देता है. उस पर इतना बड़ा हमला कैसे हो गया है यह जानने के लिए कई जांच कमेटियां बनानी पड़ेंगी. इतना तो साफ हो गया है कि इजरायल तकनीकी तौर पर उतना काबिल नहीं है जितना दुनिया मानती है.”


    स्मिता आगे कहती हैं, “भले ही बेंजामिन नेतन्याहू ने कुछ पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई है लेकिन अब उनकी चुनौतियां खत्म होने वाली नहीं हैं. भले ही इस लड़ाई के लिए लगभग तमाम पश्चिमी देश उनके साथ खड़े हैं लेकिन देश के लोग चाह रहे हैं कि बेंजामिन हमास के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें. लोगों ने उनसे सवाल पूछना भी शुरू कर दिये हैं.” 


    टाइम्स कोड्स

    00ः00 - 03:39 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना

    03:40 - 17:10 - सुर्खियां

    17:12 - 29:09 - पांच राज्यों में चुनाव 

    29:10 - 37:55 - सब्सक्राइबर्स के मेल 

    37:56 - 01:20:30 - फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष 

    01:20:30 -  सलाह और सुझाव


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    1 hr 25 min
  • एनएल चर्चा 287: बिहार जातीय जनगणना और न्यूज़क्लिक पर कार्रवाई

    इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय बिहार सरकार द्वारा जारी जातिगत जनगणना की रिपोर्ट, ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल न्यूज़क्लिक पर कार्रवाई, सिक्किम में बादल फटने से तीस्ता नदी में बाढ़, शराब घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और दिल्ली आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी आदि रहे.  


    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में महाराष्ट्र के नांदेड़ में दवाओं की कमी से मौत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा- एनडीए गठबंधन में शामिल होना चाहती थे केसीआर लेकिन हमने किया इनकार, मनरेगा फंड को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं द्वारा दिल्ली में प्रदर्शन, मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने कहा- हम ‘इंडिया आउट’ स्लोगन पर कायम रहेंगे और कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि वे भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए तैयार आदि ख़बरें शामिल रहीं.


    इसके अलावा आईआईटी बॉम्बे में शाकाहारी छात्रों के लिए कैंटीन में अलग से मेज रखने पर विवाद के बाद प्रशासन ने छात्रों पर लगाया 10 हजार रुपये का जुर्माना, मध्य प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी नौकरी में किया 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान, नार्वे के लेखक जॉन फॉसे को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार और भारतीय खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन- भारत के खाते में कुल 87 पदक आदि ख़बरों ने भी हफ्तेभर सुर्खियां बटोरी.  


    इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के फेलो राहुल वर्मा शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से अभिनंदन सेखरी, हृदयेश जोशी और विकास जांगड़ा ने चर्चा में हिस्सा लिया. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. 


    चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल पूछते हैं, “बिहार सरकार ने जातिगत गणना की रिपोर्ट जारी की है. आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) 36.01 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 27.12 प्रतिशत और सवर्ण 15.52 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति 1.68 प्रतिशत हैं. इस संख्या के आधार पर राजनीति को नए सिरे से परिभाषित करने की बहस शुरू हो गई है. नब्बे के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद जिस राजनीति का उदय हुआ था.  उसके बाद भाजपा ने ओबीसी और दलितों को हिंदू के नाम पर एक किया था. ओबीसी नेताओं की एक बड़ी टीम खड़ी की थी. जिसमें शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र मोदी, उमा भारती आदि शामिल थे. क्या अब इस आंकड़े के बाद ओबीसी और दलित जातियां फिर से अपनी पहचान की ओर वापस लौटेंगी?”


    इसका जवाब देते हुए राहुल कहते हैं, “अभी बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है. आंकड़े जारी होने के बाद कई लोगों को लगा कि अब एक नया मंडल आंदोलन शुरू हो गया. ऐसा हुआ है या नहीं यह कुछ दिनों बाद पता चलेगा. अगर आप भारतीय राजनीति को देखते हैं और भारतीय समाज की संरचना को समझते हैं तो ये आंकड़े हैरान करने वाले नहीं हैं. 1931 में जब पिछली बार जातिगत गणना हुई थी उसकी तुलना में सवर्ण जातियों का अनुपात थोड़ा घटा है और पिछड़ी जातियों का अनुपात थोड़ा बढ़ा है. लेकिन कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. किसे पता यह मंडल आंदोलन जैसी छाप छोड़े या यह थोड़े दिनों का शिगूफा भी हो सकता है. कांग्रेस ने 2006 मे उच्च शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाया था, जिसे हम मंडल-2 कहते हैं लेकिन कांग्रेस के लिए उसका कोई दूरगामी परिणाम देखने को नहीं मिला.” 


    इस विषय पर और विस्तार से जानने के लिए सुनिए पूरी चर्चा-


    टाइम्स कोड्स

    00ः00 - 07:58 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना

    08:00 - 24:00 - सुर्खियां

    24:05 - 01:06:11 - बिहार में जातिगत जनगणना 

    01:08:38 - 01:26:40 - न्यूज़क्लिक पर कार्रवाई 

    01:26:40 -  सलाह और सुझाव



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    1 hr 33 min
  • एनएल चर्चा 286: अडाणी समूह की खुलती परतें, रमेश बिधड़ूी के सांप्रदायिक बोल और कावेरी जल विवाद

    इस हफ्ते चर्चा का प्रमुख विषय अडाणी समूह को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट रही. जिसमें समूह की निवेशक कंपनी ओपल इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड का स्मामित्व सिर्फ एक व्यक्ति के पास होने और शेल कंपनियों द्वारा पैसे की हेरफेर की ओर इशारा किया गया. इसके अलावा मध्य प्रदेश के उज्जैन में 12 वर्ष की नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा, देश में हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन का निधन और लोकसभा में सांप्रदायिक बयान देने वाले भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी को राजस्थान की टोंक लोकसभा संसदीय क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने पर भी चर्चा हुई. 


    हफ्तेभर की अन्य सुर्खियों में कनाडा की संसद में नाज़ियों के लिए काम करने वाले व्यक्ति के सम्मान पर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को मांगनी पड़ी माफी, एशियाई खेलों में भारत का बेहतर प्रदर्शन जारी, कोचिंग के लिए प्रसिद्ध राजस्थान के कोटा में एक और छात्र ने की आत्महत्या- इस साल आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या हुई 26 और यूपी के संभल में मुस्लिम बच्चे को हिंदू सहपाठी से पिटवाने वाली अध्यापिका गिरफ्तार आदि ख़बरें शामिल रहीं. 


    वहीं, हिंदूत्व वॉच पोर्टल ने की रिपोर्ट- नफरती भाषण के 255 मामलों में से 80 फीसदी भाजपा शासित राज्यों से, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद फिर से शुरू, मणिपुर में दो छात्रों की हत्या की तस्वीरें सामने आने के बाद हिंसा के नए दौर की शुरुआत और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत की नीति नहीं है कि वो किसी दूसरे देशों में जाकर कार्रवाई करे आदि ख़बरों ने भी हफ्तेभर लोगों का ध्यान खींचा. 


    इस हफ्ते चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रवि नायर और पत्रकार चारू कार्तिकेय शामिल हुए. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से अवधेश कुमार ने चर्चा में हिस्सा लिया. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. 


    चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल नायर से पूछते हैं, “हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने अडाणी समूह पर रिपोर्ट की है. बताया कि समूह में निवेशक कंपनी ओपल इन्वेस्टेमेंट प्राइवेट लिमिटेड सिर्फ एक व्यक्ति के स्वामित्व वाली कंपनी थी. इस रिपोर्ट के ज़रिए भी शेल कंपनियों द्वारा हेरफेर की जानकारी दी गई है. इससे पहले भी अडाणी समूह के व्यापार में अनियमितता देखी गई है. ओसीसीआरपी की रिपोर्ट में भी शेयरों में हेरफेर की बात कही गई. ऐसे में क्या अडाणी समूह से जुड़ी और भी चीज़ें हैं, जो अभी सार्वजनिक होनी बाकी हैं?”


    इसके जवाब मे नायर कहते हैं, “ओसीसीआरपी की रिपोर्ट ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कई तरह के सबूत जोड़े. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में अडाणी समूह के शेयरों में इनके लोगों द्वारा ही निवेश करने की संभावना व्यक्त की गई थी. इसके पीछे कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया था. हिंडनबर्ग का बेहतरीन काम यह था कि उसने  विनोद अडाणी की कई शेल कंपनियों के बारे में जानकारी दी. ओसीसीआरपी ने और भी बहुत सारी कंपनियों के बारे में जानकारी निकाली और इस संभावना को सबूत के साथ साबित किया. अडाणी ग्रुप से जुड़े ताईवानी चांग चुंग ली और अरबी नासिर अली शाबान अहली ने अडाणी के शेयरों में निवेश किया था. जो डॉक्यूमेंट हमें मिले उससे पता चला कि इन लोगों ने अडाणी कंपनी में 431 मिलियन डॉलर का निवेश किया था.” 


    इसके अलावा रमेश बिधूड़ी और कावेरी जल विवाद आदि मुद्दों पर भी चर्चा हुई. सुनिए पूरी बातचीत. 


    टाइम्स कोड्स

    00ः00 - 03:12 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना

    03:17 - 20:36 - सुर्खियां

    20:37 - 52:59 - अडाणी समूह 

    53:00 - 01:14:10 - रमेश बिधूड़ी के बिगड़े बोल01:14:10 - 01:20:28 - कावेरी जल विवाद 

    01:20:28 -  सलाह और सुझाव

     


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    1 hr 29 min
  • एनएल चर्चा 285: महिला आरक्षण बिल और तल्ख़ होते भारत-कनाडा के रिश्ते

    इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय संसद के दोनों सदनों से महिला आरक्षण विधेयक पारित लेकिन जनगणना और परिसीमन के बाद होगा लागू, भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में तल्खी- भारत ने दिल्ली में तैनात कनाडा के राजनयिकों को किया निलंबित, पुरानी संसद से विदाई और नई संसद में प्रवेश के दौरान केंद्र सरकार ने सांसदों को दी संविधान की प्रति तो विपक्षी पार्टियों ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द हटाने के लगाए आरोप आदि रहे. 


    गुजरात सरकार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर छोड़ने के लिए नर्मदा बांध में पानी रोकने के आरोप और बारिश होने से बांध में ज्यादा पानी जमा होने के चलते राज्य के कई जिलों में आई बाढ़ भी हफ्तेरभर चर्चा में रही. 


    वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने गृहमंत्रालय को टीवी न्यूज़ चैनलों के लिए दिशानिर्देश बनाने के दिए निर्देश ने भी हफ्तेभर सुर्खियां बटोरी.  


    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में एक रिपोर्ट के मुताबिक- देश के 42 प्रतिशत स्नातक बेरोजगार, कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला- सोशल मीडिया के उपयोगर्ताओं के लिए निर्धारित हो न्यूनतम उम्र सीमा, कनाडाई सिंगर शुभ का मुंबई में निर्धारित शो रद्द और भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता महेश राउत को मिली जमानत आदि मुद्दे भी शामिल रहे.


    इस हफ्ते चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी और प्रोफेसर अदिति पासवान शामिल हुईं. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से इस हफ्ते संपादक रमन किरपाल और हृदेश जोशी ने भी चर्चा में भाग लिया. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. 


    महिला आरक्षण विधेयक से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “संसद के दोनों सदनों से महिला आरक्षण बिल पास हो गया है. इसको लागू करने में अभी कई रुकावटें हैं. जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण बिल लागू हो सकेगा. लेकिन मौजूदा रूप में इसे आप कैसे देखते हैं?”


    अदिति पासवान इसका जवाब देते हुए कहती हैं, “सबसे पहले तो कोई भी बिल आता है तो उसमें वक्त लगता है. ऐसा नहीं है कि आरक्षण बिल पारित होने के अगले दिन से ही बड़ा बदलाव दिखने लगेगा. जरूर यह महिला सशक्तिकरण के लिए यह एक बड़ा कदम है. कानून लागू होने के बाद हर तबके की महिलाओं को चाहे वो दलित हों या आदिवासी सबको मौका मिलेगा. मैं महिला होने के नाते बिल पारित होने के बाद बहुत खुश हूं.” 


    नीरजा इस विषय पर जवाब देते हुए कहती हैं, “महिला आरक्षण बिल पारित कर बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. संसद में चर्चा के लिए जब इसे पेश किया गया था तब हमें बहुत उत्सुक्ता थी. लेकिन जनगणना और परिसीमन की शर्त लागू हो जाने के बाद हमें निराशा हुई है. इससे साफ हो गया कि 2029 तक महिला आरक्षण लागू नहीं होगा और कुछ लोगों का मानना है कि अगर परिसीमन में देरी होती है तो 2034 तक भी जा सकता है.”


    इसी मुद्दे पर रमन किरपाल कहते हैं, “मैं इस कदम का स्वागत करता हूं. लेकिन महिला आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्त लागू करना जरूरी नहीं था. अगर आप चाहते तो तुरंत महिला आरक्षण लागू कर सकते थे. इसमें 2024 को लेकर राजनीति साफ-साफ दिख रही है.” 


    इसके अलावा भारत कनाडा के रिश्तों में आई तल्ख़ी पर भी विस्तार से बातचीत हुई. सुनिए पूरी चर्चा -  


    टाइम्स कोड्स

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    03:12 - 09:28 - सुर्खियां

    09:29 - 23:40 - भारत के प्रधानमंत्रियों की कार्यप्रणाली 

    23:40 - 49:02 - संसद में महिला आरक्षण

    49:02 - 56:08 - सब्सक्राइबर्स के मेल 

    56:08 - 1:17:22 - भारत और कनाडा विवाद 

    1:17:22 -  सलाह और सुझाव


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    1 hr 28 min
  • एनएल चर्चा 284 : कोटा में बढ़ते खुदकुशी के मामले और 14 न्यूज़ एंकरों के बहिष्कार का ऐलान

    इस हफ्ते चर्चा में बातचीत के मुख्य विषय राजस्थान के कोटा में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामले, विपक्षी गठबंधन इंडिया द्वारा 14 न्यूज़ एंकरों के बहिष्कार का ऐलान और उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक गांव में पानी पहुंचाने वाली डीएम का तबादला आदि रहे.  

    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के बीना में चुनावी जनसभा में कहा- विपक्षी गठबंधन इंडिया ने सनातन धर्म को खत्म करने का लिया है संकल्प, केरल में निपाह वायरस से प्रभावित होने वालों की संख्या हुई पांच, अमेरिका में आंध्र प्रदेश की एक छात्रा की पुलिस की गाड़ी से हुई दुर्घटना में मौत और संसद के विशेष सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया से संबंधित बिल पेश किए जाने की घोषणा आदि शामिल रहे.  


    इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक कर्नल, मेजर और जम्मू-कश्मीर के डीएसपी समेत चार की मौत, सुप्रीम कोर्ट का गृह मंत्रालय को आपराधिक मामलों में पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग से जुड़े दिशानिर्देश बनाने का आदेश, हिमंता बिस्व सरमा के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी को 10 करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलने के आरोप, एडीआर की रिपोर्ट: 40 प्रतिशत सांसदों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले, कर्नाटक पुलिस ने आज तक के न्यूज़ एंकर सुधीर चौधरी के खिलाफ दर्ज की एफआईआर, कथित गौ रक्षक मोनू मानेसर गिरफ्तारी के बाद राजस्थान पुलिस के हवाले, लीबिया में दो बड़े बांध टूटने से आई बाढ़ और 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत आदि ख़बरें भी हफ्तेभर की सुर्खियों में शामिल रहीं.  

    इस हफ्ते चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार स्मिता शर्मा और दीप मुखर्जी शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से विकास जांगड़ा ने भी चर्चा में भाग लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. 


    चर्चा की शुरूआत करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जले के एक गांव में डीएम ने पाइप लाइन के जरिए लोगों तक पानी पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराई. उसके बाद पहले डीएम दिव्या मित्तल का तबादला करा दिया गया और फिर उनको वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया. मिर्जापुर जिले के भाजपा अध्यक्ष ने शिकायत की कि ये सारे काम ‘हर घर जल योजना’ के तहत हुए थे लेकिन डीएम ने किसी भी जनप्रतिनिधि को निमंत्रित नहीं किया. मुख्यमंत्री को शिकायत भेजने के बाद यह कार्रवाई की गई. वहीं, पाइपलाइन को भी अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया और गांव फिर से पानी से वंचित हो गया. इसके बार में आप क्या सोचती हैं?”


    इसके जवाब में स्मिता कहती हैं, “सीधे तौर पर यह सत्ता का घमंड है. सत्ता का नशा इंसान को बहुत जल्दी भ्रष्टाचारी बनाता है. हमारे समाज के नेताओं में सहानुभूति का अभाव है. उनको भरोसा है कि सिर्फ वो मशीन में पड़ने वाले वोट से नहीं जीतते हैं बल्कि सत्ता, पैसे की ताकत और जातीय समीकरण से चुनाव जीतते हैं. आज के नेताओं के पास किसी भी तरह से वोट के परिणाम को अपने पक्ष में करने की ताकत मिल गई है. जिससे उनमें सत्ता का घमंड आ गया है.”

    इस विषय पर अपने विचार रखते हुए दीप कहते हैं, “अक्सर यह देखा जाता है कि किसी भी काम के शिलान्यास का क्रेडिट लेने के लिए जनप्रतिनिधि हमेशा तैयार रहते हैं. इसका इस्तेमाल वो चुनावी लाभ के लिए करते हैं. पाइपलाइन का तोड़े जाना साफ-साफ बताता है कि इन जनप्रतिनिधियों को सत्ता का कितना घमंड है. वो लोग उम्मीद करते हैं किसी भी काम का उद्घाटन हो तो प्रशासन के अधिकारी उनको बुलाएं. लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है कि अधिकारी उनको बुलाएं ही.”

    इसके अलावा कोटा में छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं और गठबंधन द्वारा 14 न्यूज़ एंकरों के बहिष्कार पर भी विस्तार से बातचीत हुई. सुनिए पूरी चर्चा-


     टाइम्स कोड्स

    00:00 - 04:15- इंट्रो और ज़रूरी सूचना

    04:20 - 22:31 - सुर्खियां

    22:38 - 52:20 - कोटा में बढ़ती छात्रों की आत्महत्याएं

    52:25 - 1:07:08 - इंडिया गठबंधन द्वारा टीवी एंकरों का बहिष्कार 

    1:07:08 -  सलाह और सुझाव




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    1 hr 12 min
  • एनएल चर्चा 283: जी 20 समिट, सनातन धर्म पर टिप्पणी और कुत्तों को ‘कैद’ करता दिल्ली नगर निगम

    इस हफ्ते चर्चा में मुख्य विषय जी-20 सम्मेलन में चीन और रूस के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, सनातन धर्म पर तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि की तल्ख टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद, जी-20 के मद्देनज़र दिल्ली की सड़कों से कुत्तों को हटाया जाना, मणिपुर में मीडिया कवरेज को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की रिपोर्ट और मणिपुर सरकार द्वारा संस्था से जुड़े पत्रकारों के ख़िलाफ एफआईआर दर्ज करना आदि रहे.  


    हफ्ते की अन्य सुर्खियों में उत्तर प्रदेश भाजपा के कथित माइनॉरिटी सेल के नेता पर बलात्कार और पीड़िता के पिता की हत्या के आरोप में मामला दर्ज, महाराष्ट्र्र्र के जालना में किसानों पर लाठी चार्ज के बाद उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मांगी माफी, सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने कहा- पुरुष कैदियों की तुलना में महिला कैदियों की स्थिति बदतर आदि मुद्दे भी शामिल रहे. 


    चर्चा में इस हफ्ते वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के रे शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से मनीषा पांडे और आनंदवर्धन ने भी चर्चा में भाग लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. 


    चर्चा की शुरूआत करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं आ रहे हैं. हालांकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान आया है कि उनके नहीं आने से सम्मेलन पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ेगा. आप इस प्रकरण को किस नज़रिए से देखते हैं?”


    इस सवाल के जवाब में आनंद कहते हैं, “रूस के राष्ट्रपति पिछले दो वर्षों में शंघाई शिखर वार्ता के अलावा कहीं नहीं गए हैं. आख़िरी बार पुतिन जिस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए थे वो शंघाई वार्ता ही था. इसलिए उनका जी-20 सम्मेलन में शामिल नहीं होना कोई बड़ी बात नहीं है. अगर शी जिनपिंग और पुतिन दोनों नेता वार्ता में शामिल होते तो रोचक होता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली हेडलाइन बनता. दोनों देशों की एक ज्वाइंट स्टेटमेंट भी मिलती. ऐसा नहीं होने से इसकी जटिलता और बढ़ गई है." 

    इस विषय पर और विस्तार से जानने के लिए सुनिए पूरी चर्चा- 


    टाइम्स कोड्स

    00:00 - 00:57- इंट्रो


    01:00 - 08:49 - ज़रूरी सूचना और सुर्खियां


    08:50 - 30:00 - सनातन धर्म पर उदयनिधि के बयान के बाद विवाद

              

    30:00 - 1:02:00 - जी-20 सम्मेलन पर विस्तार से चर्चा


    1:02:03 -1:12:06 - सब्सक्राइबर्स के मेल 


    1:12:06 - 1:32:15 - जी 20 और कुत्तों को कैद करना 


    1:32:15 -  सलाह और सुझाव


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    1 hr 39 min
  • एनएल चर्चा 282: संसद का विशेष सत्र और अडाणी समूह की हेराफेरी के नए सबूत

    इस हफ्ते चर्चा में बातचीत के मुख्य विषय केंद्र सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की घोषणा, ओसीसीआरपी की रिपोर्ट- जिसमें अडाणी समूह द्वारा शेयरों में हेरफेर और भारतीय नियामक सेबी के कार्रवाई न करने के नए सबूत सामने आए आदि रहे. इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों के स्कूलों से सामने आ रही मजहबी नफरत की घटनाओं और फैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर पर एफआईआर को लेकर भी चर्चा हुई. चीन सरकार द्वारा जारी नए ‘मानक मानचित्र’ में भारत के अरुणाचल का कुछ हिस्सा शामिल किए जाने को लेकर भी चर्चा में शामिल लोगों ने अपनी बात रखी. 


    हफ्ते की अन्य ख़बरों में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की मुंबई में तीसरी बैठक, कर्नाटक सरकार ने पूरा किया महिलाओं को हर महीने 2,000 रुपये देने का चुनावी वादा, केंद्र सरकार ने 200 रुपये प्रति सिलेंडर घटाई एलपीजी की क़ीमत और पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत ने सकल घरेलू उत्पाद में दर्ज की 7.8 प्रतिशत की रिकॉर्ड दर से बढ़ोतरी आदि मुद्दे भी शामिल रहे. 


    इनके अलावा उत्तर प्रदेश में दलित लड़के के साथ प्रेम प्रसंग के चलते भाई द्वारा नाबालिग बहन की हत्या, मध्य प्रदेश में यौन उत्पीड़न मामले को वापस लेने से इंकार करने पर दलित व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डालना और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक दलित प्रोफेसर द्वारा अपने दो सहयोगियों एवं छात्रों पर मारपीट के आरोपों ने भी हफ्तेभर में लोगों का ध्यान खींचा.


    चर्चा में इस हफ्ते वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी और गिरिजेश वशिष्ठ शामिल हुए. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री टीम से विकास जांगड़ा ने भी चर्चा में भाग लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.


    चर्चा की शुरूआत करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “हाल ही में संसद का मानसून सत्र समाप्त हुआ है.अब केंद्र सरकार ने विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है. इस वक्त संसद का विशेष सत्र बुलाने का क्या मकसद हो सकता है? ”


    इस सवाल के जवाब में प्रमोद जोशी कहते हैं, “ जब सरकार एजेंडा घोषित करेगी या विशेष सत्र की शुरूआत होगी तब इसके बारे में पता चलेगा लेकिन इससे पहले भी 2010 में अन्ना हजारे आंदोलन के समय विशेष सत्र बुलाया गया था. जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून बनाने का संकल्प पास किया गया था. दुःख की बात यह है कि बीते मानसून सत्र में किसी भी मुद्दे पर ठीक से बहस नहीं हुई. हालांकि, उम्मीद करता हूं कि इस बार किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात करने के लिए सत्र बुलाया गया हो. वैसे कुछ लोगों को ये भी लगता है कि ये इंडिया गठबंधन की बैठकों को मीडिया से गायब करने की सरकार की एक मुहिम है.”


    इस विषय पर विचार रखते हुए गिरिजेश कहते हैं, “राजनीति में सब कुछ टाइमिंग का खेल होता है. हाल ही में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद ओसीसीआरपी ने भी रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में अडाणी समूह पर ‘शेयरों में हेरफेर’ के आरोप लगे हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनाव हैं. कई सर्वे और ऑपिनियन पोल से पता चलता है कि इन राज्यों में भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है. ऐसे में साफ है कि केंद्र सरकार ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के क़दम उठा रही है.”


    ओसीसीआरपी की रिपोर्ट और अन्य मुद्दों पर विस्तार से जानने के लिए सुनिए पूरी चर्चा. 


    टाइम कोड


    00ः00 - 04:49 -    इंट्रो व हेडलाइन


    04:50 - 15:20 -    संसद का विशेष सत्र 


    15:45 - 37:00 -    नफरत की पाठशाला


    37:01 - 57:20 - अन्य सुर्खियां 


    57:25 - 01:20:08 - ओसीसीआरपी की रिपोर्ट 


    01:20:08 - सलाह और सुझाव 



    ट्रांसक्रिप्शन: नाज़िर हुसैन / तस्नीम फातिमा 


    प्रोड्यूसरः चंचल गुप्ता / आशीष आनंद 


    एडिटर: उमराव सिंह




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    1 hr 32 min
  • एनएल चर्चा 281: चंद्रयान की कामयाबी, ब्रिक्स का बढ़ता दायरा और मीडिया पर लगाम का नया फरमान

    इस हफ्ते चर्चा में बातचीत के मुख्य भारत के मिशन चंद्रयान-3 की चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलता पूर्वक लैंडिंग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शासन की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने वाली खबरों की जांच और उन पर कार्रवाई के लिए आदेश और ब्रिक्स सम्मलेन आदि रहे. सम्मेलन में भाग लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी भी तीन दिवसीय दक्षिण अफ्रीका दौरे पर पहुंचे थे.  


    इसके अलावा ब्रिक्स के सदस्यों में छः नए देशों का शामिल होना, कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पार्टी की कार्यसमिति का गठन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तीन सहयोगियों पर ईडी की कार्रवाई, हिमाचल प्रदेश में बाढ़ से लगातार जारी तबाही और 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा भी इस हफ्ते की अन्य सुर्खियों में शामिल रहीं.वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का मुफ्त योजनाओं पर बयान, सरकार द्वारा प्याज की सरकारी खरीद की घोषणा और सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा धारा 370 पर सुनवाई ने भी हफ्तेभर लोगों का ध्यान खींचा.  


    चर्चा में इस हफ्ते बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी, न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और विकास जांगड़ा शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

    चंद्रयान-3 की सफलता से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचना इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यहां पर शायद पानी और बर्फ के रूप में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो जीवन की ओर इशारा करते हैं.”

    इस विषय पर आनंद अपनी राय रखते हुए कहते हैं, “कई मायनों में यह सफलता महत्वपूर्ण है. माना जा रहा है कि भविष्य में यह लॉन्चपैड भी बन सकता है. विश्व की साझा संपत्तियों के मामले में भी यह एक उपलब्धि है. साथ ही प्रौद्योगिकी में भारत का जो सामर्थ्य है, इससे वह भी स्थापित होता है. वहीं, यह मिशन आने वाले दशकों में भारत के ग्लोबल पावर बनने की दिशा में एक और आयाम जोड़ता है.”


    चंद्रयान मिशन पर विस्तार से जानने के लिए सुनिए पूरी चर्चा. इस विषय के अलावा ब्रिक्स सम्मलेन पर भी विस्तृत चर्चा की गई.


    टाइम कोड्स

    00:00:00 - 00:24:18 - जरूरी सूचना व हैडलाइंस

    00:24:18 - 48 :43 चंद्रयान-3 मिशन 

    00: 48:45 - 1:04:06 सब्सक्राइबर्स के मेल 

    1:04:10 - 01:17:31 ब्रिक्स देशों का विस्तार    

    01:17:31- जरूरी सूचना व सलाह और सुझाव



    ट्रांस्क्राइबः तस्नीम फातिमा 

    प्रोड्यूसरः चंचल गुप्ता 

    एडिटर: उमराव सिंह 






     




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