NL Charcha

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  • एनएल चर्चा 104: जामिया पुलिस लाठी चार्ज का वीडियो, ट्रंप की भारत यात्रा और अन्य
    न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के इस भाग में हमने डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरे, जामिया मेंहुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज, ट्रंप के दौरे कोलेकर अहमदाबाद में हो रही तैयारियां पर विस्तार से चर्चा की. इसके साथ हीआम आदमी के पार्टी के विधायक द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येकमंगलवार को सुंदरकांड पाठ के आयोजन, नरेंद्र मोदी द्वारा सीएए, एनआरसीऔर 370 पर दिया गया ताजा बयान और सुप्रीम कोर्ट का शाहीनबाग मामले मेंनियुक्त की गई दो सदस्यों की कमेटी के मसले पर भी चर्चा हुई.इस सप्ताह चर्चा में दिल्ली यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल की सदस्य गीताभट्ट, न्यूज़लॉन्ड्री के सीनियर एडिटर मेहराज लोन शामिल हुए. चर्चा कासंचालन कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा की शुरुआत जामिया हिंसा से करते हुए अतुल ने गीता से सवाल किया,पुलिस ने जिस तरह से जामिया हिंसा को लेकर दावा किया था और साउथईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल, जिनका बाद में चुनाव आयोग नेट्रांसफर भी कर दिया था, उनका कहना था कि कैंपस में कोई टीयर गैस नहींछोड़ी गई, पुलिस कैंपस में नहीं घुसी, लाठीचार्ज भी नहीं हुआ. इन सब के बादजो वीडियो सामने आया है ये कई सवाल खड़े करते हैं. आपकी इस पर क्याराय है?अतुल के सवाल का जवाब देते हुए गीता कहती हैं, देखिये पहली बात तो ये हैकि जब भी कोई प्रदर्शन निकलता है अगर वो कहीं भी किसी तरह से हिंसकहोता है, वहां पत्थरबाजी और मारपीट होती है या बस जलाई जाती हैं तो हिंसाकी रिपॉन्स पुलिस द्वारा ऐसा ही रहता है. ये बात तो साफ है कि उपद्रवीकैंपस के अंदर घुस गए थे और भीतर से भी पत्थरबाजी हुई थी. वीडियो भीदोनों तरह के सामने आए हैं. लेकिन जो लोग अंदर मुंह पर कपड़ा बांध कर पढ़रहे, ऐसे तो कोई नहीं पढ़ता है.इसपर अतुल गीता को जवाब देते हैं, इसका एक और वर्जन है कि बाहर टीयरगैस छोड़ी जा रही थी तो हो सकता है छात्र इसलिए कपड़े बांध रखे हो? इसकेबाद अतुल ने मेहराज से सवाल किया, वीडियो आने के बाद पुलिस की रवैयादेखने के बाद आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?मेहराज कहते हैं, पुलिस ने जो जामिया में किया है वहीं चीजें जेएनयू औरअलीगढ़ में भी हुई हैं. चलिए मान लेते हैं कि जामिया में बाहर के लोग घुसेहुए थे. लेकिन पुलिस का प्रोसीजर पहले जांच करने का, लोगों को पहचानने काहोता है. एक तरफ छात्र हैं दूसरे तरफ स्टेट की ताकत है और उनके हाथ मेंबंदूकें हैं, ऐसे में फिर दोनों में फर्क क्या रहा और हर जगह पर ऐसे ही क्यों होरहा है? इस देश में जवाबदेही की रवायत कभी भी नहीं रही है. आम आदमी केपास कोई भी शक्ति नहीं है.बाकी विषयों पर भी विस्तार से तथ्यपरक चर्चा हुई. पूरी चर्चा सुनने के लिएपॉडकास्ट सुने साथ ही न्यूजलॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और गर्व से कहें- मेरेखर्च पर आज़ाद हैं खबरें.

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    56 min
  • एनएल चर्चा 103: दिल्ली चुनाव, अरविंद केजरीवाल, अमित शाह
    न्यूजलॉन्ड्री चर्चा का 103वां संस्करण दिल्ली चुनावों के इर्द-गिर्द सिमटा रहा. इसके तहत आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत, नार्थ-ईस्ट दिल्ली में सबसे ज्यादा हुए मतदान का कारण, भाजपा नेताओं की उग्र और नफरत भरी बयानबाजी, बीजेपी के बड़े नेताओं का दिल्ली में हुए प्रचार का प्रभाव आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई. इस सप्ताह चर्चा में राजनीतिक विश्लेषक ममता कालिया, न्यूजलान्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन, न्यूजलॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    59 min
  • एनएल चर्चा 102: केंद्रीय बजट, दिल्ली चुनाव, हनुमान चालीसा और अन्य
    न्यूजलॉन्ड्री चर्चा के 102वें संस्करण में केंद्रीय बजट 2020-21, दिल्ली चुनाव में घोषित तीनों बड़ी पार्टियों के चुनावी घोषणापत्र, शाहीन बाग के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी, अरविंद केजरीवाल का हनुमान चालीसा पाठ, दिल्ली पुलिस द्वारा शाहीन बाग़ में फायरिंग करने वाले शख्स का आम आदमी पार्टी से जुड़े होने का फ़ोटो जारी करना, उक्त पुलिस अधिकारी पर चुनाव आयोग द्वारा की गई कारवाई और कोरोना वायरस जैसे मुद्दे चर्चा का विषय रहे.इस सप्ताह चर्चा में पीआरएस की रिसर्चर प्राची मिश्रा, प्रसार भारती बोर्ड के सलाहकार ज्ञानेंद्र भरथरिया और न्यूजलॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूजलॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    1 hr 20 min
  • एनएल चर्चा 101: नीतीश कुमार, दिल्ली चुनाव, कुणाल कामरा और अन्य
    न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के 101वें संस्करण में चर्चा का मुख्य विषय रहा स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा चीन में कोरोना वायरस के चलते पैदा हुई आपात स्थिति पर जारी की गई सलाह, स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा द्वारा अर्नब गोस्वामी की खिंचाई के बाद उड्डयन कंपनियों द्वारा उन्हें एकतरफा उड़ान से प्रतिबंधित करना, बीजेपी के केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा द्वारा दिया गया आपत्तिजनक सांप्रदायिक बयान और उसके चलते चुनाव आयोग की कर्रवाई, शरजील इमाम पर देशद्रोह का मामला और प्रशांत किशोर और पवन कुमार की जेडीयू से बर्खास्तगी.इस सप्ताह चर्चा में बीबीसी मराठी के संपादक आशीष दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी और न्यूज़लॉन्ड्री के सोशल मीडिया एडिटर मेघनाद चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    1 hr 24 min
  • एनएल चर्चा 100: जेपी नड्डा, सीएए, दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य
    न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा पॉडकास्ट का यह 100 वां संस्करण है. चर्चा को प्यार देने के लिए सभी श्रोताओं को शुक्रिया. न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और गर्व से कहें- ‘मेरे खर्च पर आज़ाद हैं ख़बरें.’चर्चा के 100 वें संस्करण में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ख़ास मेहमान रहे. इसके अलावा इस हफ़्ते की चर्चा में हिंदी साहित्यकार वंदना राग और न्यूज़लॉन्ड्री के मेघनाद शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के इस 100 वें संस्करण में बीजेपी के नए अध्यक्ष जेपी नड्डा की ताजपोशी और उनके आने के बाद पार्टी में आने वाले संभावित बदलावों, दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन के दौरान अरविन्द केजरीवाल को हुई परेशानी, दिल्ली पुलिस को दिल्ली के गवर्नर द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दिया गया गिरफ्तारी का विशेषाधिकार, बीजेपी की लखनऊ में हुई रैली में अमित शाह का सीएए की वापसी के संबंध में बरकरार अड़ियल रवैया, जेएनयू के सर्वर रूम में मारपीट के संबंध में आरटीआई के तहत मिली चौंकाने वाली जानकारी और निर्भया मामले में वकील इंदिरा जयसिंह के बयान पर मचे बवाल आदि पर चर्चा हुई.

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    1 hr 6 min
  • एनएल चर्चा 94: सीएए, एनआरसी, नागरिकता और अन्य
    चर्चा के 94 वें संस्करण में बातचीत मुख्यत: नागरिकता कानून संशोधन अधिनियम के इर्द-गिर्द घूमती रही. इस कानून को लेकर पूरे देश में विरोध की स्थिति पैदा हो गई है. विश्वविद्यालयों में विरोध चल रहा है. शहरों में विरोध चल रहे हैं. इसे अलावा दिल्ली के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और आगजनी की घटनाएं हुई हैं. जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस द्वारा छात्रों पर जबर्दस्त बल प्रयोग की घटना सामने आई. इसी तरह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी पुलिस के बल प्रयोग की बात सामने आई है. असम में जहां से इस कानून की विरोध की शुरुआत हुई थी और पूर्वोतर के अन्य राज्यों में विरोध का सुर धीरे धीरे कम होने लगा है. लेकिन देश के दूसरे हिस्से में विरोध तेज हो गया है. ज्यादातर जगहों पर आंदोलन अहिंसक रहे है लेकिन कुछ जगहों से हिंसा की खबरें भी सामने आई हैं. इस सप्ताह चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.अजीत अंजुम के साथ चर्चा की शुरुआत करते अतुल ने पूछा कि सरकार ये सफाई दे रही है कि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी ये दोनों अलग अलग चीजें है. विपक्षी इसको एक साथ मिलाकर लोगों को भरमा रहे हैं. आपकी का राय है? सरकार जो कह रही है वो सही है या इसकी आड़ में सरकार कुछ छुपा रही है? इस पर अजीत अंजुम ने कहा, “एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून अलग-अलग तो हैं, इसमें कोई शक़ नहीं है. लेकिन संसद में अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि पहले पर सीएबी लाएंगे और उसके बाद ध्यान से सुनना भाईयों हम एनआरसी भी लाएंगे. एनआरसी केवल असम में नहीं देश के बाकी हिस्सों में भी लाएंगे. आप नागरिकता कानून जो लाए है उसमें छह धर्मों को शामिल किया. सिर्फ एक धर्म को छोड़कर. आज चेतन भगत ने सीएए को लाइफ जैकेट कहा है. यानी जब एनआरसी आयेगा तो यह कुछ लोगों के लिए लाइफ जैकेट का काम करेगा. इस सबको एक साथ देखें तो बेहद खतरनाक स्थिति की तरफ देश को ले जाया जा रहा है. बहुलतावादी ये देश है. उस देश में अचानक ऐसी चीज की क्या ज़रूरत थी. इसके खतरे बहुत बड़े है आने वाले समय में."इसी पर अपनी बात रखते हुए आंनद वर्धन कहते हैं, “पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश, इन तीनों देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं. तो वहां के लिए तो सीएए ठीक है. लेकिन एनआरसी के साथ व्यवहारिकता की समस्या है. नौकरशाही इतनी सक्षम नहीं है कि इतने बड़े देश में सबकी नागरिकता संबंधी कोई सफल व्यवस्था कर सके. खासकर भारतीयों में दस्तावेजों की जो स्थिति है. उसे लागू करने में चुस्ती दिखानी होगी. नहीं तो छोटी-छोटी वजहों से लोग नागरिकता खो सकते हैं.” इस पूरे विवाद को लेकर गर्मागरम, दिलचस्प और तथ्यपरक चर्चा हुई. पूरी चर्चा सुनने के लिए पूरा पॉडकास्ट सुनें.

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    7 min
  • एनएल चर्चा 95: सीएए, एनआरसी, नागरिकता और अन्य
    चर्चा के 94 वें संस्करण में बातचीत मुख्यत: नागरिकता कानून संशोधनअधिनियम के इर्द-गिर्द घूमती रही. इस कानून को लेकर पूरे देश में विरोध कीस्थिति पैदा हो गई है. विश्वविद्यालयों में विरोध चल रहा है. शहरों में विरोधचल रहे हैं. इसे अलावा दिल्ली के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और आगजनीकी घटनाएं हुई हैं. जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस द्वारा छात्रों परजबर्दस्त बल प्रयोग की घटना सामने आई. इसी तरह अलीगढ़ मुस्लिमयूनिवर्सिटी में भी पुलिस के बल प्रयोग की बात सामने आई है. असम में जहांसे इस कानून की विरोध की शुरुआत हुई थी और पूर्वोतर के अन्य राज्यों मेंविरोध का सुर धीरे धीरे कम होने लगा है. लेकिन देश के दूसरे हिस्से में विरोधतेज हो गया है. ज्यादातर जगहों पर आंदोलन अहिंसक रहे है लेकिन कुछजगहों से हिंसा की खबरें भी सामने आई हैं.इस सप्ताह चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकारआनंद वर्धन शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादकअतुल चौरसिया ने किया.अजीत अंजुम के साथ चर्चा की शुरुआत करते अतुल ने पूछा कि सरकार येसफाई दे रही है कि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी ये दोनों अलगअलग चीजें है. विपक्षी इसको एक साथ मिलाकर लोगों को भरमा रहे हैं.आपकी का राय है? सरकार जो कह रही है वो सही है या इसकी आड़ में सरकारकुछ छुपा रही है?इस पर अजीत अंजुम ने कहा, “एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानूनअलग-अलग तो हैं, इसमें कोई शक़ नहीं है. लेकिन संसद में अपने भाषण मेंअमित शाह ने कहा कि पहले पर सीएबी लाएंगे और उसके बाद ध्यान सेसुनना भाईयों हम एनआरसी भी लाएंगे. एनआरसी केवल असम में नहीं देश केबाकी हिस्सों में भी लाएंगे. आप नागरिकता कानून जो लाए है उसमें छह धर्मोंको शामिल किया. सिर्फ एक धर्म को छोड़कर. आज चेतन भगत ने सीएए कोलाइफ जैकेट कहा है. यानी जब एनआरसी आयेगा तो यह कुछ लोगों के लिएलाइफ जैकेट का काम करेगा. इस सबको एक साथ देखें तो बेहद खतरनाकस्थिति की तरफ देश को ले जाया जा रहा है. बहुलतावादी ये देश है. उस देशमें अचानक ऐसी चीज की क्या ज़रूरत थी. इसके खतरे बहुत बड़े है आने वालेसमय में."इसी पर अपनी बात रखते हुए आंनद वर्धन कहते हैं, “पाकिस्तान, अफगानिस्तानऔर बांग्लादेश, इन तीनों देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं. तो वहां केलिए तो सीएए ठीक है. लेकिन एनआरसी के साथ व्यवहारिकता की समस्या है.नौकरशाही इतनी सक्षम नहीं है कि इतने बड़े देश में सबकी नागरिकता संबंधीकोई सफल व्यवस्था कर सके. खासकर भारतीयों में दस्तावेजों की जो स्थितिहै. उसे लागू करने में चुस्ती दिखानी होगी. नहीं तो छोटी-छोटी वजहों से लोगनागरिकता खो सकते हैं.”इस पूरे विवाद को लेकर गर्मागरम, दिलचस्प और तथ्यपरक चर्चा हुई. पूरी चर्चासुनने के लिए पूरा पॉडकास्ट सुनें.

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    49 min
  • एनएल चर्चा 96: एनपीआर, पुलिस की हिंसा, झारखंड चुनाव और अन्य
    इस सप्ताह चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म निर्माता विनोद कापड़ी और झारखंड चुनाव की कवरेज करके लौटे द क्विंट के संवाददाता शादाब मोइज़ी बतौर मेहमान शामिल हुए. साथ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे न्यूज़लॉन्ड्री के संवाददाता आयुष तिवारी और बसंत कुमार ने सीधे ग्राउंड से जानकारियां दी. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा की शुरुआत बसंत कुमार और आयुष तिवारी से उत्तर प्रदेश के वर्तमान हालात का जायजा लेते हुएअतुल चौरसिया ने शुरू की. इसी सन्दर्भ में विनोद कापड़ी से सवाल करते हुए अतुल ने पूछा, “यूपी में पुलिस का जो साम्प्रदायिक रूप निकल कर सामने आया है उसे आप किस प्रकार से देखते हैं?”इस पूरे विवाद में एनपीए औऱ एनआरसी के पक्ष पर भी काफी विस्तार से चर्चा हुई. साथ में झारखंड चुनाव के नतीजों पर भी दिलचस्प और तथ्यपरक विश्लेषण हुआ. इस पूरी चर्चा को सुनने के लिए पूरा पॉडकास्ट सुनें. और हां न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और गर्व से कहें- ‘मेरे खर्च पर आज़ाद हैं ख़बरें.’

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    48 min
  • एनएल चर्चा 97: नृत्य गोपालदास, दिनेंद्र दास के साथ साक्षात्कार
    9 नवम्बर को बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद न्यूज़लॉन्ड्री ने इस विवाद से जुड़े तमाम क़ानूनी पक्षकारों के साथ साक्षात्कार की श्रृंखला शुरू की है. इसके तहत हम हिन्दू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के तमाम पैरोकारों की राय को आपके सामने ला रहे है.निर्मोही अखाड़ा रामजन्मभूमि विवादित स्थल का सबसे पुराना दावेदार रहा है. इसी तरह श्री राम जन्मभूमि न्यास का इस विवाद से सीधा रिश्ता रहा है. चर्चा में इस हफ्ते निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से हुई बातचीत पेश है.महंत दिनेंद्र दास का कहना है 9 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया वो भगवान राम के नाम पर आया है और यह अच्छा रहा. इसलिए उनको यह फैसला मंज़ूर है.न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने दिनेंद्र दास से पूछा, “हाल ही में एक ऑडियो क्लिप सामने आया है जिसमें बीजेपी के पूर्व सांसद रामविलास वेदान्ती भी राम मंदिर निर्माण के लिए बनायी जाने वाली कमेटी में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं. और भी तमाम लोग है जो इसमें शामिल होना चाहते हैं, क्या अब यह बड़ी सत्ता और पैसे से जुड़ा मामला हो गया है इसीलिए इसमें सब अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं?”इसका जवाब देते हुए दिनेंद्र दास कहते हैं, “निर्मोही अखाड़ा कोर्ट में रामजन्मभूमि का पक्षकार रहा है. तो जहां तक अयोध्या बैठक का मामला है हमें उचित पक्ष मिल ही जाएगा.”1885 से 1992 तक निर्मोही अखाड़ा वहां पूजा पाठ करता था यह दस्तावेज़ों में भी दर्ज है. 1992 में रिसीवर की नियुक्ति के बाद से वहां सतेन्द्र दास पूजा-पाठ का काम देखते हैं.इस सन्दर्भ में अतुल महंत से सवाल पूछते हैं कि, पूजा पाठ जो निर्मोही अखाड़ा करता था क्या आप उसपर दावा पेश करेंगे?”इस सवाल का जवाब देते हुए महंत दिनेंद्र दास कहते हैं, “नहीं हम दावा तो नहीं करेंगे. लेकिन निर्मोही अखाड़ा वहां अनादिकाल से पूजा करता आ रहा था. हम लोगों का हमेशा से सौभाग्य रहा वहां पूजा पाठ करने का. इस लिहाज़ से वो पद हमे मिलना चाहिए. हमारा लक्ष्मीजी से कोई प्रेम नहीं है. हमे राम-राम ही पढ़ना है. इतना ही हमारे लिए काफी है.”इस तरह महंत नृत्य गोपाल दास के साथ भी राम जन्मभूमि से जुड़े कई सारे रोचक पहलुओं पर बात हुई. इस पूरी चर्चा को सुनने के लिए पूरा पॉडकास्ट सुनें. और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और गर्व से कहें- ‘मेरे खर्च पर आज़ाद हैं ख़बरें.’

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    31 min
  • एनएल चर्चा 98: जेएनयू हिंसा, अमेरिका-ईरान तनाव और अन्य
    न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के इस संस्करण में मुख्यतः चर्चा का विषय रहा पिछले रविवार को जेएनयू में हुई हिंसा, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुआ तनाव, पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हुई पत्थरबाजी और आगामी दिल्ली चुनाव. बीते रविवार की शाम तक़रीबन 50-60 की संख्या में नकाबपोश हमलावरों ने जेएनयू कैंपस में घुस कर छात्रों, अध्यापकों एवं कर्मचारियों के साथ बेरहमी से मारपीट की. इस हिंसा में जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष समेत 36 लोगों को गंभीर चोट लगी है. आइशी के सर पर 16 टांके लगे हैं. दिल्ली पुलिस ने यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है.इस बीच चुनाव आयोग ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी है. फ़रवरी 8, 2019 को दिल्ली में मतदान होगा और परिणामों की घोषणा 11 फ़रवरी को होगी. बीते शुक्रवार को इराक में अमरीकी ड्रोन हमले में ईरान के सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत होने के बाद से अमेरिका और इरान के बीच तनाव और गहराता दिख रहा है. पिछले हफ्ते पाकिस्तान स्तिथ ननकाना साहिब पर भी कुछ लोगों के समूह ने पत्थरबाज़ी की. उस समूह का नेतृत्व करने वाले इमरान नामक व्यक्ति ने धमकी दी थी की हम ननकाना साहिब का नाम बदल कर गुलाम-ए-मुस्तफा कर देंगे.इस सप्ताह चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार मयंक मिश्रा और द वायर की सलाहकार संपादक अरफ़ा ख़ानम शेरवानी बतौर मेहमान शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा की शुरुआत अतुल ने मयंक मिश्र से जेएनयू में हुई हिंसा पर सवाल करते हुए शुरू की कि, “जिस तरह से जेएनयू में हमले को अंजाम दिया गया, बहुत सारे हथियारबंद लोग कैंपस में घुस गए, पुलिस गेट के बाहर खड़ा रहकर उनको बाहर जाते देखती रही, पूरे इलाके में बिजली काट कर अंधेरी किया गया, पत्रकारों को पुलिस के सामने पीटा गया लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही. यह सब एक सुनियोजित साजिश का इशारा करता है. मयंक आप पुलिस और प्रसाशन की इस भूमिका को किस तरह देखते हैं?”मयंक ने अपने जवाब में कहा, “मेरा एक ही इमोशन है जिसे में एक ही शब्द में कहूंगा शर्म, मुझे शर्म आती है. जेएनयू में जो कुछ भी हुआ उसे शर्मनाक के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता. अगर कोई लड़का या लड़की बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा के किसी गांव में जेएनयू या डीयू में पढ़ने का सपना देख रहा होगा तो उसके सपने मिट्टी में मिल गए होंगे. दूरदराज के परिजन इस भयावह नजारे के बाद अफने बच्चों को जेएनयू में भेजने से डरेंगे. अगर दिल्ली में विश्वविद्यालय सुरक्षित नही हैं तो सोचिये की लाखों बच्चों का क्या होगा.”इस मसले पर अपनी टिप्पणी करते हुए अरफा खानम शेरवानी ने दिल्ली पुलिस पर तंज कसा, “जेएनयू में जो हुआ उसे समझने के लिए कोई राकेट साइंटिस्ट होने की ज़रुरत नहीं है. हो सकता है पुलिस को न पता हो की हमलावर कौन थे. जिन्होंने नकाब पहना था, उनका नकाब क्यों नही उतारा गया. लेकिन उनके नकाब अब उतर चुके हैं. जो लोग नकाब पहने थे उनके नकाब काले ज़रूर नज़र आ रहे थे लेकिन वो भगवा नकाब थे.”पूरी चर्चा का मुख्य बिंदु जेएनयू हिंसा बना रहा साथ में ईरान अमेरिका तनाव का भारत पर किस रूप से प्रभाव पड़ेगा इस पर विस्तार से चर्चा हुई. पाकिस्तान में ननकाना साहिब पर पत्थरबाज़ी से जो नया विवाद उत्पन्न हुआ है उस पर भी पैनलिस्टों ने अपने अपने विचार रखे.इस पूरी चर्चा को सुनने के लिए पूरा पॉडकास्ट सुनें. और हां न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और गर्व से कहें- ‘मेरे खर्च पर आज़ाद हैं ख़बरें.’

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