NL Charcha

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  • एनएल चर्चा 84: एनआरसी, एक देश, एक भाषा और अन्य
    एनएल टीमइस सप्ताह एनएल चर्चा में जो विषय शामिल हुए उनमें हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिया गया ‘एक देश एक भाषा’ वाला बयान प्रमुखता से चर्चा में रहा. इसके अलावा सरकार द्वारा ई-सिगरेट पर प्रतिबंध, जीडीपी में आई गिरावट और देश में फैली आर्थिक मंदी और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन इस हफ्ते की प्रमुख सुर्खियां रहीं. ‘‘एनएल चर्चा’’ में इस बार पत्रकार लेखक व पत्रकार अनिल यादव के साथ ही वरिष्ट पत्रकार प्रशांत टंडन ने शिरकत किया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    59 min
  • एनएल चर्चा 83 : हिंदी दिवस, स्वामी चिन्मयानंद, मीडिया उद्योग में संकट और अन्य
    इस सप्ताह एनएल चर्चा में जो विषय शामिल हुए उनमें सबसे महत्वपूर्ण रहा हिंदी दिवस के बहाने भाषाओं की राजनीति पर चर्चा. मीडिया उद्योग में मंदी का दौर और लगातार नौकरियों से हाथ धो रहे पत्रकार भी इस बार चर्चा का विषय बने. वहीं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक लड़की ने बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द पर बलात्कार का आरोप लगाया है. रेल मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने हाल में अर्थव्यवस्था को लेकर जो बयान दिए वह सवाल खड़ा करता है कि देश की अर्थव्यवस्था का बागड़ोर जिनके हाथों में हैं वे कितने गंभीर और योग्य लोग हैं. चरंचा के अंत में अनिल यादव ने मशहूर हिंदी लेखक मुक्तिबोध की कविता का पाठ किया.‘’एनएल चर्चा’’ में इस बार के मेहमान थे पत्रकार-लेखक अनिल यादव और डोचे वैले के संपादक चारू कार्तिकेय. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    56 min
  • एनएल चर्चा 82 : कश्मीर मुद्दा, मिर्जापुर के पत्रकार पर एफआईआर और अन्य
    इस हफ्ते जो विषय एनएल चर्चा में शामिल हुए उनमें डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति के उम्मीदवारी की होड़ में शामिल अमेरिकी सीनेटर बर्नी सांडर्स द्वारा कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने जाने की फैसले पर नाराजगी जताई है. कश्मीरी पत्रकार गौहर गिलानी को दिल्ली स्थिति आईजीआई एयरपोर्ट पर अंतिम क्षणों में विदेश जाने से रोक दिया गया. इसके अलावा हाल ही में एनआरसी का लिस्ट जारी हुई जिसमें 19 लाख लोगों की भारतीय नागरिकता खतरे में बताई जा रही है. इसके अलावा आईएनएक्स मीडिया के मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चितंबरम को न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय कोर्ट ने दिया है. चिदंबरम फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में मिडडे मील में नमक रोटी दिए जाने की घटना उजागर करने वाले पत्रकार पवन जायसवाल पर पुलिस ने साजिश का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज किया है. इस हफ्ते इन्हीं विषयों के इर्द गिर्द चर्चा हुई.'एनएल चर्चा' में इस बार दो खास मेहमान शामिल हुए. कार्यक्रम में पत्रकार मोहम्मद सैफ और लेखक व वरिष्ठ पत्रकार अनिल यादव बतौर पैनलिस्ट मौजूद रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    1 hr
  • एनएल चर्चा 81 : पी चिदंबरम, अमेजॉन में लगी आग, कश्मीर और अन्य
    इस सप्ताह की चर्चा के केंद्र में पी चिदंबरम की आईएनएक्स मीडिया के मामलेमें हुई गिरफ्तारी है, जिसने देश की राजनीति में काफी बवाल पैदा किया है.साथ ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर के जो हालातसामने आ रहे है, पाकिस्तान का जो रवैया अब तक रहा है वह भी बहस काविषय रहा. साथ ही पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता अरुण जेटली केनिधन के बाद भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति में एक अहम बदलाव देखनेको मिल सकता है. इसके अलावा अमेज़ॉन के जंगलों में लगी भयानक आगपैनल के बीच एक औऱ चिंता के तौर पर शामिल हुआ. भारत सरकार की नईडिजिटल मीडिया नीति, बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा भीमा कोरेगांव मामले के एकआरोपी वर्नोन गोंजाल्विस की जमानत पर सुनवाई के दौरान ‘वॉर एन्ड पीस’उपन्यास पर की गई आदि विषय इस हफ्ते सुर्खियों में रहे.इस हफ्ते के पॉडकास्ट में उपरोक्त सभी मसलों पर चर्चा करने के लिए दोख़ास मेहमान मौजूद रहे. न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया केसंचालन ने चर्चा का संचालन किया जबकि न्यूज़लॉन्ड्री के मेघनाद और भारतीयजनसंचार संस्थान के महानिदेशक रह चुके प्रोफेसर केजी सुरेश बतौर मेहमानमौजूद रहे.अतुल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए मेघनाद से आईएनएक्स मामले के बारे मेंविस्तार में जानकारी चाही. मेघनाद कहते हैं, "2007 में आईएनएक्स मीडियाकरके एक कंपनी थी जिनके मालिक इन्द्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी थे.उनको विदेशी फंडिंग चाहिए थी. वो उस समय विदेश मंत्रालय के पासएफआईपीबी क्लीयरेंस के लिए गए. उन्होंने वादा किया कि उनका एक शेयरदस रुपये कीमत का होगा और इसमें तीन विदेशी इन्वेस्टर्स से पैसा आएगा.तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने उन्हें मंज़ूरी दे दी पर उन्होंने एक शर्त रखीकि वो आईएनएक्स न्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड के लिए इन्वेस्ट नहीं कर सकते हैं.पर हुआ ये कि उन्होंने मंज़ूरी मिलने के बाद आईएनएक्स ने अपने शेयर्स कादाम 86 गुना बढ़ा दिया यानि 860 रुपए कर दिया और 305 करोड़ रुपये काइन्वेस्टमेंट कंपनी में मॉरिशस के जरिए हुआ. साथ ही उन्होंने डाउनस्ट्रीमइन्वेस्टमेंट यानि न्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड में भी कर दिया जो क्लीयरेंस केखिलाफ था. यहां कथित तौर पर दो गड़बड़ी सामने आती है, एक तो निवेश कीसीमा से ज्यादा पैसा लिया गया और दूसरा उसे न्यूज़ वेंचर में डाला गया.इसके बाद एफआईपीबी ने और इनकम टैक्स ने उनके खिलाफ चांज शुरू की.उन्हें लगा कि अब वो फंस गए है तो उन्होंने चेस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेडकंपनी को हायर किया ताकि वो उनकी तरफ से वित्त मंत्रालय से उनके लिएबात करें. इस कंपनी के फाउंडर पी चिंदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम हैं. इसीमामले में ईडी और सीबीआई को लगता है कि कार्ति चिदंबरम को पैसा मिला हैऔर ये मामला फिर पी चिदंबरम से भी जुड़ता है.”इस पर अतुल कहते हैं, "इसमें एक बात सामने आई कि सीबीआई की मूलएफआईआर में पी चिदंबरम का नाम तक नहीं है, तो इस लिहाज़ से जो कहाजा रहा है कि ये एक राजनीतिक कार्रवाई है. कहीं न कहीं ये नहीं लगता है किसरकार ने जल्दबाज़ी की है?”इस पर केजी सुरेश कहते है, ‘‘मुझे लगता है. इसके कई पहलू हैं. एक पहलू है किइस देश में जब कभी भी जो गाज गिरती है तो वो छोटे लोगों पर गिरती हैं.छोटे कर्मचारियों पर गिरती हैं. बड़े लोग अक्सर बचकर निकल जाते हैं.चिदंबरम की गिरफ्तारी ने या इससे पहले जो लालू प्रसाद यादव के साथ हुआहै या चौटाला के साथ हुआ, सुखराम के साथ हुआ तो एक मैसेज ये जाता है किआप कितने ताकतवर क्यों न हो कानून आपको बख्शेगा नहीं. पर जिस तरीकेसे चिदंबरम के घर पर घटनाक्रम हुआ, सीबीआई के लोग उनके घर में दीवारफांद कर घुसे, उससे अच्छा संदेश नहीं गया.”इसी प्रकार बाकी विषयों पर भी दिलचस्प औऱ गंभीर चर्चा हुई. पूरी चर्चा सुननेके लिए ‘एनएल चर्चा’ का यह ख़ास पॉडकास्ट सुनें.

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    49 min
  • एनएल चर्चा 80: प्रधानमंत्री का लाल क़िले से भाषण, अनुच्छेद 370, पहलु खान और अन्य
    कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद अभी भी वहां संचार के सारे माध्यम बन्द है. सेना की बड़े पैमाने पर तैनाती जारी है. इसी बीच कश्मीर के सौरा इलाके में हुए एक प्रदर्शन का वीडियो जारी करने के कारण बीबीसी न्यूज़ कुछ लोगों के निशाने पर है. वहीं राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने अपना नया अध्यक्ष चुन लिया है. एक बार फिर से सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बन गई हैं. राजस्थान के अलवर में दो साल पहले पहलू खान की भीड़ द्वारा की गई हत्या के मामले में निचली कोर्ट ने हत्या के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. वहीं 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित किया. इन तमाम मुद्दों के इर्दगिर्द इस बार की एनएल चर्चा केंद्रित रही. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. वरिष्ठ पत्रकार शांतनु गुप्ता और न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनन्द वर्धन इस बार चर्चा में शामिल हुए.

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    59 min
  • एनएल चर्चा 79: धारा 370, राम मंदिर विवाद, स्वराज का निधन और अन्य
    तमाम सियासी उठापटक के कारण ये सप्ताह बेहद चर्चित रहा. इस सप्ताह संसद में जो फैसले लिए गए उनमें से कुछ भारत में और कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का कारण बने. संसद द्वारा कश्मीर की स्वायत्ता से जुड़े अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त करने का फैसला लिया गया है. इस फैसले के बाद जम्मू और कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो गया और उस पर केंद्र सरकार के निर्णय सीधे तौर पर लागू होंगे. इसी के साथ जम्मू और कश्मीर के पुनर्गठन सम्बन्धी बिल भी पास किया गया है. जम्मू और कश्मीर का विभाजन दो हिस्सों में किया गया है. जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश होगा इसके साथ ही लद्दाख़ भी विधानसभा रहित केन्द्रशासित प्रदेश होगा. इसके अतिरिक्त 6 अगस्त से राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई शुरू कर दी गई है. लोकसभा द्वारा पोस्को एक्ट से सम्बंधित एक बिल पास किया गया ही जिसके बाद अब बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए जाने पर आरोपी को मृत्युदंड देने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा एक और दुखद खबर दिल्ली से आई जहां बीते मंगलवार 6 अगस्त को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का हार्ट अटैक से निधन हो गया.हमारे इस ख़ास पॉडकास्ट ‘एनएल चर्चा’ में उपर्युक्त सभी मसलों पर चर्चा करने के लिए तीन ख़ास मेहमान मौजूद रहे. न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया के संचालन में वरिष्ठ पत्रकार अनिल यादव, न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और ‘कश्मीरनामा’ के लेखक अशोक कुमार पाण्डेय की उपस्थिति में चर्चा की गई.

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    53 min
  • एनएल चर्चा 78: डोनाल्ड ट्रंप का कश्मीर समस्या में दखल, सोनभद्र में कत्लेआम और अन्य
    देश और दुनिया में चल रही तमाम अस्थिरताओं के कारण बीता हफ्ता ख़बरों से भरा रहा. केरल हाईकोर्ट के जज जस्टिस चितम्बरेश ने विवादित बयान देते हुए कहा कि “आरक्षण जातिगत नहीं आर्थिक आधार पर होना चाहिए,” साथ ही उन्होंने कुछ गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन गुणों के कारण ब्राह्मणों को ही उच्च पदों में होना चाहिए. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से बात करते हुए यह दावा किया की भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर विवाद में अमेरिका को मध्यस्थता करने की अपील की है. हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को ख़ारिज किया है. इसके साथ ही बीते हफ्ते लोकसभा में आरटीआई अमेंडमेंट बिल पास किया गया. इस बिल पर काफी विवाद मचा हुआ है. एक अन्य खबर उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले से आई, जहां जमीनी विवाद में 10 आदिवासियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई. बीते दिनों दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का देहांत हो गया. इसके अलावा भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ‘इसरो’ ने चंद्रयान-2 का लौंच सफलतापूर्वक पूरा करके अपने खाते में एक और उपलब्धि बढ़ा ली है.इन सभी मुद्दों पर दो ख़ास मेहमानों के साथ न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा की. न्यूज़लॉन्ड्री के ख़ास कार्यक्रम ‘एनएल चर्चा’ में उपरोक्त मुद्दों पर बात करने के लिए वरिष्ठ पत्रकार अनिल यादव और राज्यसभा टीवी के एंकर अनुराग पुनेठा मौजूद थे. चर्चा का संचालन अतुल चौरसिया द्वारा किया गया.चर्चा की शुरुआत में अतुल ने कहा कि “चर्चा की शुरुआत केरल हाईकोर्ट के जज जस्टिस चितम्बरेश के उस बयान से करते हैं जो उन्होंने कोच्चि में ग्लोबल ब्राह्मण सम्मेलन में दिया है. अपने बयान में उन्होंने कहा कि- “ब्राह्मण अपने कर्मों से इतना पुण्य कमाता है कि वह द्विज होता है, यानि उसका दो बार जन्म होता है.” दरअसल सारे सवर्ण ही द्विज कहलाते हैं यानि ऐसा कहा जाता है कि उनका दो बार जन्म होता है जबकी शूद्र को उसके कर्मों का फल एक ही जन्म में मिल जाता है. इस प्रकार यह जो पुनर्जन्म की धारणा को समर्थन करती हुई बात उन्होंने कही है वह आज़ादी के बाद जो एक बहस चली जिसमें कहा गया कि वैज्ञानिक सोच वाले लोग ऐसे पदों पर पहुंचने चाहिए, से टकराती हुई दिखती है. मेरा सवाल यह है कि क्या किसी जज का ऐसे किसी कार्यक्रम जो किसी धर्म,संप्रदाय या जाती विशेष के लिए हो, में शामिल होना जायज़ है.”इसी विषय से संबंधित अतुल के सवाल का जवाब देते हुए अनिल यादव कहते हैं कि “मुझे लगता है कि एक बेहतर मनुष्य होने, प्रोग्रेसिव होने और जज या वैज्ञानिक होने के बीच कोई रिश्ता है नहीं. यह सारे संस्थान लकीर के फ़कीर हैं. सभी किसी ख़ास विषय में पारंगत लोगों का चयन करते हैं, बिना इस बात की परवाह किये कि वह निजी जीवन में कैसा है. मसलन यदि कोई व्यक्ति भौतिकी के नियम जानता है तो वह निजी ज़िन्दगी में भले ही झाड़-फूंक में विश्वास करता हो, वह वैज्ञानिक कहलाएगा. तो मुझे यह मामला ज्यूडिसरी का मामला नहीं लगता. मुझे लगता है कि सिर्फ़ ब्राम्हणों में ही नहीं, बल्कि हर जाति में रिवाईवलिज्म का फेस चल रहा है. ये जो ग्लोबल तमिल सम्मलेन चल रहा था ऐसे ही कई सम्मेलन कुर्मियों के, यादवों के, ठाकुरों के चल रहे हैं. और देखने वाली बात यह है कि जो लोग इसका आयोजन करते हैं उनकी इतिहास दृष्टि बेहद घटिया है. जैसे वह कहेंगे कि सम्राट अशोक इसलिए महान थे, क्योंकि वह मौर्य थे. इसका कारण यह है कि हमारे यहां 70 साल सिर्फ और सिर्फ जाति की राजनीति हुई है.”इस विषय के साथ ही हफ्ते की अन्य ख़बरों पर ख़ास मेहमानों के साथ अतुल चौरसिया के संचालन में चर्चा की गई. कार्यक्रम के अंत में अनिल यादव द्वारा अज़गर वजाहत के आत्मकथात्मक उपन्यास ‘सात आसमान’ के अंश का पाठ किया गया.

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    47 min
  • एनएल चर्चा 77: कुलभूषण जाधव पर फैसला, एनआईए बिल, असम में कवियों पर एफआईआर और अन्य
    पिछले हफ़्ते में देश से लेकर विदेश तक कई ऐसी घटनाएं घटित हुई हैं जो अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण होने के कारण चर्चा का विषय रहीं. बीते दिनों पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जादव पर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने फैसला सुनाया है. बीते लोकसभा चुनाव से पहले शुरू हुए 'तिरंगा टीवी' के बंद हो जाने के कारण वहां के कर्मचारियों पर बेरोज़गारी का संकट गहरा गया है. तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भाषण चोरी करने के झूठे आरोप को लेकर ज़ी टीवी के एडिटर इन चीफ़ सुधीर चौधरी पर मानहानि का मुकदमा दायर किया है. हाल ही में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा एनआईए बिल पारित किया गया. एक मामले के संबंध में अपना फैसला सुनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि अब कोर्ट में आने वाले व्यक्ति को जज के नाम के आगे 'मे लॉर्ड' जैसे शब्दों का प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, एक अन्य ख़बर असम से आयी जहां स्थानीय भाषा के 10 कवियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गयी है.उपरोक्त सभी मसलों पर न्यूज़लॉन्ड्री के खास पॉडकास्ट प्रोग्राम 'एनएल चर्चा' में 3 खास मेहमानों के साथ चर्चा की गयी. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी, न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और लेखक व वरिष्ठ पत्रकार अनिल यादव बतौर पैनलिस्ट मौजूद रहे.चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने कहा कि "अंतरराष्ट्रीय कोर्ट द्वारा कुलभूषण जादव की फांसी पर रोक लगा दी गयी है. कोर्ट द्वारा उन्हें काउंसलर मुहैया कराने का आदेश दिया गया है. दूसरी ओर पाकिस्तान द्वारा कहा जा रहा है कि चूंकि कोर्ट ने उन्हें उनके नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है, इसलिए भारत की अपेक्षा अनुसार वह उनकी रिहाई करने को बाध्य नहीं है. तो ऐसे में देखा जाये तो क्या ये दोनों में से किसी पक्ष की जीत है, या फिर न्याय के तहत देखा जाये तो कुलभूषण जादव का जो फांसी का फैसला था वह टल गया है और यह एक राहत की बात है?"इस विषय पर बात को आगे बढ़ाते हुए आनंद वर्धन ने कहा कि "इसमें बहुत सारी आशंकाएं हैं. दो साल पहले जब पाकिस्तान की कोर्ट में मुकदमा शुरू हुआ तो एक आशंका थी कि सच में यही कुलभूषण जादव हैं या नहीं. यह आशंका अभी भी बनी हुई है. दूसरी बात है कि जो 1961 का वियना कंवेंशन है उसके कई अनुच्छेदों का यहां साफ तौर पर उल्लंघन है. उसमें यह कहा गया कि जो गिरफ्तारी की गयी, उनके काउंसलेट को तुरंत सूचित किया जायेगा, जबकि इन्होंने 21 दिन लगाये. दूसरी बात है कि जिन देशों से कूटनीतिक संबंध हैं उनके दूतावास को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए, जो इन्होंने नहीं किया. तो यह ख़ारिज नहीं हुआ है कि वह जासूस हैं, लेकिन जासूसों के अदालती कार्रवाइयों में भी इस कन्वेंशन के नियम प्रभावी होंगे. मेरा मानना है कि 2017 में भारत और पाकिस्तान के जो कूटनीतिक संबंध तनावपूर्ण हुए थे, वह न हुए होते तो इसका रास्ता कूटनीति से ही निकल जाता."विषय के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए अनिल यादव ने कहा कि "मुझे लगता है कि इस संबंध में जो फैसला आया है वह चीन और अमेरिका के पाकिस्तान के प्रति बदले रवैये से प्रभावित है. आप देखेंगे कि इस बार चीन ने भी मसूद अज़हर के मामले में उसे आतंकवादी घोषित करने के पक्ष में वोट किया था. यह दवाब का ही नतीजा है कि इमरान खान को यह कहना पड़ा है कि वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ हैं और प्रो-पीपल गवर्नमेंट चलाना चाहते हैं. मुझे इस फैसले की बड़ी बात यह लगती है कि एक तो कुलभूषण की जान बच जायेगी और दूसरा चूंकि उन्हें काउंसलेट से मिलने दिया जायेगा, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया ठीक से चल सकेगी. साथ ही जहां तक आतंकवाद का मसला है, तो यह तनाव तो चलता ही रहेगा इसके सुलझने के आसार दिखते नहीं है."इसके अतिरिक्त अन्य सभी मसलों पर भी अतुल चौरसिया के संचालन में पैनलिस्टों के साथ न्यूज़लॉन्ड्री के खास पॉडकास्ट 'एनएल चर्चा' में विस्तार से बातचीत की गयी. साथ ही कार्यक्रम के अंत में अनिल यादव द्वारा डॉक्टर संजय चतुर्वेदी की कविता 'वह साधारण सिपाही जो कानून और व्यवस्था के काम आये' का पाठ किया गया. पूरी चर्चा सुनने के लिए 'एनएल चर्चा' का पूरा पॉडकास्ट सुनें.

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    54 min
  • एनएल चर्चा 76: वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट, कर्नाटक में सियासी संकट, कांग्रेस में मचा घमासान और अन्य
    बीता हफ़्ता तमाम उतार-चढ़ाव की ख़बरों से भरा हफ़्ता रहा. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पहली बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किया गया. कर्नाटक में पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) की संयुक्त सरकार पर खतरा मंडरा रहा है. दिल्ली सरकार ने सीसीटीवी लगाने की योजना को दिल्ली के सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में लागू करने का फैसला लिया है. राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस पार्टी के दो बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और मिलिंद देवड़ा द्वारा भी अपने-अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया गया. मिलिंद देवड़ा ने अपनी चिट्ठी में राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में उतरने के संकेत दिये, जिससे राजनितिक गलियारों में गहमा-गहमी बढ़ गयी है. बीते दिनों यूएन द्वारा कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित रिपोर्ट जारी की गयी, जो काफी चर्चा का विषय रही. नोबल पुरस्कार के विजेता अमृत्य सेन ने अपने एक बयान में कहा कि जय श्री राम का नारा बंगाल में नया आया है, बंगाल की मूल संस्कृति से इसका लेना-देना नहीं है.एन एल चर्चा के इस पॉडकास्ट में लेखक और पत्रकार अनिल यादव मौजूद रहे. साथ ही माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी में अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षाविद राकेश योगी भी चर्चा का हिस्सा बने. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा की शुरुआत करने से पहले संचालक अतुल चौरसिया द्वारा ‘टीम वर्क्स आर्ट’ और ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रम ‘मीडिया रम्बल’ के रजिस्ट्रेशन और शैड्यूल के बारे में दर्शकों को सूचित किया गया. साथ ही अतुल ने ‘एनएल चर्चा’ के फ़ॉर्मेट में हुए बदलाव के बारे में भी बताया.चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने कहा कि “बजट में काफी सारी चीज़ों पर पहले भी बात हो चुकी है, मगर पत्रकारिता के लिहाज़ से इसमें दो चीज़ें महत्वपूर्ण रहीं. पहला यह कि अखबार और पत्रिकाओं के कागज़ पर सरकार द्वारा पहली बार कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला लिया गया है. सरकार द्वारा इस पर यह कहा गया कि इससे भारतीय कंपनियों को बाज़ार में विदेशी कंपनियों के मुकाबले ज़्यादा मुनाफा कमाने का अवसर मिलेगा. मगर इसका दूसरा और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ज़्यादातर अखबार कागज़ की आपूर्ति के लिए विदेशी कागज़ पर निर्भर होते हैं. ऐसे में इसका दबाव उन पर भी पड़ेगा और वह अपने दामों में इजाफ़ा कर सकते हैं. यह बढ़ी हुई कीमत आम जन द्वारा जल्दी स्वीकार नहीं की जाती है, जिससे उनकी बिक्री पर असर पड़ता है. चूंकि निजी विज्ञापनों की संख्या निश्चित है, इसलिए आय के लिए  अख़बारों को सरकारी विज्ञापन पर निर्भर होना पड़ेगा. तो क्या यह माना जाये कि इस तरह से सरकार अप्रत्यक्ष रूप से अख़बारों पर नियंत्रण लगाने की कोशिश कर रही है.”इसका जवाब देते हुए राकेश योगी कहते हैं कि “देखिये किसी भी अख़बार की आय निकालने का साधन आज तक भी, कभी भी पाठकों द्वारा दी जाने वाली की नहीं रही है, वह विज्ञापन पर ही निर्भर रहते आये हैं. उसमें भी सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता ज़्यादा रही है. इस सरकार पर विज्ञापनों के वितरण में घूसखोरी का आरोप भी लगता आया है. तो इस कदम को सुधार की दृष्टि से उठाया गया कदम माना जाना चाहिए कि सरकार यह चाहती है कि अखबार कम निकलें, मगर उन्हें आय के लिए किसी ऐसे सोर्स पर निर्भर न रहना पड़े, बल्कि बाज़ार के मुनाफे से ही वह आय निकाल सकें.”राकेश योगी की इस बात पर अपनी राय रखते हुए अनिल यादव कहते हैं कि “मुझे लगता है, इससे कोई ख़ास फ़र्क़ न्यूज़ पेपर इंडस्ट्री पर पड़ने वाला है नहीं. उनकी निर्भरता विज्ञापनों पर ही ज़्यादा रही है. आप देखते हैं कि जब कोई त्यौहार का मौसम होता है तो अख़बारों के शुरूआती पन्ने विज्ञापनों से ही पटे पड़े होते हैं. मुझे लगता है कि जब सरकार ने मीडिया को नियंत्रित करने के लिए कहीं ज़्यादा प्रत्यक्ष तरीका अपना रखा है तो वह उसे इन तरीकों से क्यों नियंत्रित करेगी? आज मीडिया की मुख्यधारा न्यूज़ पेपर हैं नहीं, बल्कि वह चैनल हैं जिसको सरकार सीधा रेवेंयू दे रही है और उसके बदले वह विपक्ष की लगातार आलोचना करते हैं, उन्हें ट्रोल करते हैं.”इस विषय के और भी तमाम पहलुओं पर पैनालिस्टों द्वारा चर्चा की गयी. पोडकास्ट में अनिल यादव द्वारा भवानी प्रसाद मिश्र की रचना ‘चार कौवे’ का पाठ किया गया. इसके साथ ही पॉडकास्ट में हफ़्ते के अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गयी, जिन्हें सुनने के लिए पूरी चर्चा सुनें.पत्रकारों की राय क्या देखा जाये, सुना जाये, पढ़ा जाये.अनिल यादव:फिल्म - ‘तितली’राकेश योगी:शार्ट फिल्म – ‘गीली’अतुल चौरसिया:विश्रामपुर का संत : श्रीलाल शुक्ल[hindi_support] [hindi_tag]

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    58 min
  • एनएल चर्चा 75: राहुल गांधी का इस्तीफा, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन और अन्य
    बीता हफ़्ता बहुत सारी बहसें लेकर आया. राहुल गांधी ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हैं और उन्होंने पांच पेज का एक लेख भी लिखा, जिसकी काफी चर्चा भी हो रही है. इसके अलावा, मुंबई के महाराष्ट्र में बारिश ने प्रकोप दिखाया है और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, जिसमें काफी लोगों की मौतें भी हुई हैं. जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए एक बार फिर बढ़ा दिया गया है. दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में एक सांप्रदायिक वारदात दिखने को मिली, जिसमें एक मंदिर में भी तोड़फोड़ हुई. इसके अलावा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुरादाबाद दौरे के वक़्त वहां पर पत्रकारों को एक कमरे में करीब 35 मिनट तक बंद कर दिया गया ताकि वो सवाल न कर सकें मुख्यमंत्री से. कश्मीर की आदाकारा ज़ायरा वसीम, जिन्होंने दंगल फिल्म में अमीर खान के साथ अपना डेब्यू किया था बाल कलाकार के तौर पर, अब उन्होंने अपने एक्टिंग करियर को छोड़ने का फैसला किया है और उनका तर्क ये है कि  उनका एक्टिंग करियर उनके ईश्वर से मिलने की राह में बड़ा रोड़ा बन रहा था.चर्चा में इस बार शामिल हुए लेखक और पत्रकार अनिल यादव. न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन ने भी शिरकत की. इसके अलावा युवा पत्रकार राहुल कोटियाल भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.अतुल ने बातचीत की शुरुआत करते हुए बताया कि "पिछले हफ़्ते न्यूज़लॉन्ड्री के लिए बड़ी ख़बर आयी, जिसमें न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी को और असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल को 'रेड इंक' अवार्ड मिला है. यह अवार्ड  2018 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुए एक फेक एनकाउंटर पर आधारित एक स्टोरी के लिए दिया गया. राहुल ने करीब एक हफ़्ते तक दंडकारण्य के जंगलों में दौरा करके, लोगों के बीच रह कर तथ्य जुटाये, तमाम लोगों से बातचीत की, जिसमें ये पता चला कि आम ग्रामीण उस एनकाउंटर में मारे गये थे."प्रतिक्रिया में राहुल ने पुरस्कृत स्टोरी की पृष्ठभूमि के बारे में बताया कि "ये स्टोरी वहीं शुरु हुई जब 15 लोगों की मौत दंडकारण्य के जंगलों में हुई थी और राज्य प्रबंधन के हवाले से कहा गया कि यह एक बहुत बड़ी सफलता है.  ऑपरेशन मानसून वहां पर चलाया जा रहा था और उसमें ये कार्रवाई की गयी, जिसमें 15 नक्सलियों को मार गिराया गया. लेकिन कुछ सबूत हमें मिले जिसमें सामने आया कि इस एनकाउंटर में नक्सली नहीं, बल्कि आम ग्रामीण मारे गये थे. उसमें 12-13 साल के छोटे बच्चे भी शमिल थे. जब हम लोग गांव में पहुंचे पाया कि दंडकारण्य बहुत विस्तृत और दुर्गम है. स्टोरी के लिए कम से कम हम 24 घंटे और 55 किलोमीटर तक पैदल चले थे. बरसात के दौर में तो गाड़ियों और पुलिस टीम के लिए भी काफी मुश्किल होता उतने अंदर तक पहुंच पाना. वह इलाके ऐसे हैं कि वहां पर खेती शहरों जैसी नहीं होती है. जंगल के बीच में ही खेत होते हैं और वो खेत कम से कम गांव से 5 या 10 किलोमीटर भी दूर होते हैं. तो गांव के लोग पास ही एक लाडी बना लिया करते हैं; एक झोपड़ी जैसी चीज़ होती हैं जिसे लाडी कहां जाता हैं. अक्सर जब वह खेती के लिए इतनी दूर जाया करते हैं, तो वहीं रुक जाया करते हैं. वे साथ में खाना ले जाते हैं और एक-दो दिन वहीं रुक जाते हैं और फिर वापस अपने घरों को लौटते हैं. घटना के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ कि गांव के लोग लाडी में मौजूद थे, जिनको सुरक्षा बलों ने नक्सली समझ लिया, उसके बाद एनकाउंटर हुआ और ये बोल दिया गया कि 15 नक्सली मारे गये. ये स्टोरी जो हमने की वो इसलिए कि पुलिस ने नक्सलियों को नहीं मारा, बल्कि मरने वालों को नक्सली साबित करने का काम किया. उनमें कई लोग ऐसे थे जो चश्मदीद थे, जिन्हें सेना बलों द्वारा की गयी गोलीबारी में गोलियां लगीं, वो गोलियां उनके शरीर में मौजूद थी, लेकिन बाद में वह अस्पताल नहीं जा सकते थे. क्योंकि पुलिस का ये कहना था कि वहां जितने लोग मौजूद थे वह नक्सली थे और हमने सिर्फ नक्सलियों को मारा है तो इस डर से वो वहां भी नहीं जा सकते थे. लेकिन हमने उनकी पहचान के साथ ये स्टोरी की थी कि ये लोग वहां मौजूद थे और कोई नक्सली नहीं बल्कि आम ग्रामीण लोग थे."इस मसले के साथ-साथ बाक़ी विषयों पर भी चर्चा के दौरान विस्तार से बातचीत हुई. बाकी विषयों पर पैनल की राय जानने-सुनने के लिए पूरी चर्चा सुनें.

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