Shatdalradio Sahitya

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By Pragya MishraArtsPerforming Arts
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Shatdalradio Sahitya episodes

  • चौरचन पाबैन केर विधान - मैथिली गीत| written by Manikant Jha|Voice - Pragya Mishra
    चौरचन गीत
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    मेघ दोग सँ हुल्की देथिन
    रोहणि संगहि चान
    चौरचन पाबनि केर विधान।
    भरि मिथिला के पाबनि नामी
    हाथ उठाबथि काकी मामी
    अरिपन कलश और कुमुदिनी
    माँड़ड़ के ओरियान
    चौरचन पाबनि केर विधान।
    भोगक खुब सनगर विन्यासे
    खजुर पिरिकिया एक्कर खासे
    ओलक चटनी भुजिया झिमनी
    दही तकर प्रमाण
    चौरचन पाबनि केर विधान।
    देह समांग दियौ हे देवता
    फल हाथे मणिकांतो देखता
    अँगने अँगने सबतरि होबय
    अपने के सम्मान
    चौरचन पाबनि के विधान।
    -मणिकांत झा, दरभंगा, १९-८-२० ---this is a maithili folk song written by maithil poet Manikant Jha. He lives in Dharbhanga, Bihar, India. I have given my voice to the song and tune developed by Shri Manikant Jha. Image used in this podcast thumbnail is taken during Chaurchan Festival in Rosra, Bihar. Photo has been clicked by my niece Aradhna Jha. In this photo my sister in law Smt. Kiran Devi is worshipping the tarnished moon for well being of progeny there by ensuring that no bad name ever comes on anybody in the family due to effects of tarnished moon ....its based on indian mythological stories.
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    10 min
  • Kumar Vishwas ji ki shayri
    किसी के दिल की मायूसी जहाँ से हो के गुजरी हैं
    हमारी सारी चालाकी वही पे खो के गुजरी हैं
    तुम्हारी और हमारी रात में बस फर्क इतना हैं
    तुम्हारी सो के गुजरी हैं , हमारी रो के गुजरी है
    अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे
    मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मन लूँ कैसे
    तुम्हारी याद के आदिम अँधेरे मुझको घेरे हैं
    तुम्हारे बिन जो बीते दिन उन्हें दिन मान लू कैसे
    ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं
    जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं
    कशिश जिन्दा है अपनी चाहतो में जानेजां क्यूंकि
    हमें तुम कम समझते हो, तुम्हें हम कम समझते हैं
    मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया
    अमरता चाहते थे पर, जहर पीना नहीं आया
    तुम्हारी और मेरी दास्ताँ में फर्क इतना हैं
    मुझे मरना नहीं आया तुम्हे जीना नहीं आया
    ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी
    कोई दरिया न ये समझे की मेरी प्यास टूटेगी
    तेरे वादे का तू जाने मेरा वो ही इरादा है
    की जिस दिन सांस टूटेगी उसी दिन आस टूटेगी
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    5 min
  • जीवन में अनुशासन का महत्त्व
    जीवन में अनुशासन का महत्त्व विषय हिंदी निबन्ध के रूप में एक प्रचलित विषय है। प्रस्तुत पोडकास्ट में वक्ता प्रज्ञा मिश्र और आज के विशेष अतिथि गणित के प्राध्यापक श्री आलोक मिश्र के विचार आप सुन सकेंगे जो कोविड, वरचुअल डिजिटल दुनिया के इर्द गिर्द सोच कर रखे गए हैं। हमने ट्रेडिशनल निबंध से बाहर निकल आपके लिए नए एंगल प्रस्तुत किये हैं जो आज के समय की मांग के अनुसार है।
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    16 min

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सुनिए हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में रुचिकर कंटेंट का पाठ।