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पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - पिता और पुत्र।
पू स्वामिनी अमितानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - जैसा बोएंगे वैसा पायेंगे।
पू स्वामिनी समतानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - रणछोड़ श्री कृष्ण।
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - आधा किलो आटा।
पू स्वामिनी अमितानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - अपना अपना दृष्टिकोण।
पू स्वामिनी समतानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - जयंत का अभिमान।
पू स्वामिनी पूर्णानंद जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुने जिसका शीर्षक है - चुनौतियों का सामना।
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 60वें अर्थात अंतिम दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब समुद्र देवता प्रकट हुए तो उन्होंने राम जी से क्षमा मांगी और कहा की महाराज हम सहज रूप से जड़ हैं, आप ने उचित ही किया जो हमें अपना गुस्सा दिखाया। रामजी उनकी विनम्रता से प्रसन्न हो गए और पुछा की ठीक है अब बताओ ही हम कैसे उस पार जाएं। तो उन्होंने ने बताया की महाराज, आप की वानर सेना में नल और नील नाम की दो वानर हैं जिनके पास यह आशीर्वाद है की वे जिस पत्थर अथवा पहाड़ को स्पर्श कर देंगे वो तैरने लगेगा। बस आप उनको काम में लगा दें पुल बनजायेगा, हम भी यथा संभव मदद करेंगे।
इस तरह से सुन्दरकाण्ड का समापन हो गया. गोस्वामीजी कहते हैं की जो कोई भी रामजी का यह गुणों का स्मरण और भजन करेगा वो बिना प्रयास भाव सागर से बिना किसी नौका के तर जायेगा। इसके साथ ही यह ६० दिवसीय सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ का भी अत्यंत सुखपूर्वक समापन हो गया। जय श्री राम।
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 59वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब भगवन राम सौदर्य देवता पर क्रोधित और अपना धनुष बाण उठाया तब वे प्रकट हुए, और भगवान् के चरण पकड़ लिए और बोले - कि हे प्रभु हमें क्षमा करें, हम सभी पंच महाभूत के देवता स्वाभाविक रूप से जड़ होते हैं क्यूंकि ये महाभूत ही जड़ होते हैं। जड़ता के कारण केवल ताडन की भाषा ही समझ में आती है। लेकिन प्रभु हम आप की ही बनाई सृष्टि की मर्यादा का पालन कर रहे हैं। आप चाहें तो समुद्र को सुखा दीजिये और सभी जीव-जंतुओं को समाप्त कर दीजिये - आप की इच्छा। लेकिन इसमें आप के द्वारा बनाई गई समुद्र की मर्यादा कुछ नहीं रह पायेगी। आप की जैसी आज्ञा हो आप बताइये। भगवान् उनकी विनम्रता और विचार देख कर प्रसन्न हुए और मुस्कराये। फिर सौदर्य देवता से ही पुछा की आप ही हमें बतायें की हमारी वानर सेना उस पार कैसे जाए।
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