एक बार एक संस्कारी महिला अपने पुत्र के साथ कहीं जा रही थी, तभी एक नीच और झगड़ालु औरत उसको रस्ते में मिली और किसी विषय पर उसको भला-बुरा बोलने लगी, जिसमे अनेको गाली-गलौज भी शामिल था, लेकिन पहली औरत ने उसकी उपेक्षा कर दी और कुछ भी नहीं बोली। घर पहुंचते उसके पुत्र ने उससे उसकी चुप्पी का रहस्य पूछा तो उस महिला ने अपने अंदाज़ में लडके को कैसे समझाया - यह इस सुन्दर सी प्रेरक कहानी में आप पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से सुनिए। अच्छी शिक्षा और संस्कारों से व्यक्ति अपने मन को सभी परिस्थितियों में शांत और सुन्दर बनाये रखने में समर्थ हो जाता है। यह ही अच्छे संस्कारों का एक बहुत ही बड़ा व्यावहारिक महत्त्व है।