
Sign up to save your podcasts
Or


एक बार सत्यभामा, गरुड़ और सुदर्शन-चक्र को बहुत अभिमान हो गया की हमारे बगैर तो भगवान् का भी काम नहीं चलता है, तो भगवान् श्रीकृष्ण ने हनुमानजी के माध्यम से इन सब का अभिमान एक ही झटके में कैसे दूर करवा दिया - यह इस सुन्दर और रोचक कहानी में पूज्य स्वामिनी पूर्णानन्दजी से सुनिए।
आज की सुन्दर सी, प्रेरक और शिक्षाप्रद कहानी में पू स्वामिनी समतानन्द जी जीवन में जड़ों का महत्त्व बता रही हैं। एक सफल व्यापारी जब बड़े नुकसान के चलते रोड पर आ गया तो वो निराश हो कर सब छोड़-छाड़ कर जंगल चला गया। उसको कुछ दिशा नहीं मिल रही थी और वो जीवन को समाप्त करने का भी सोच रहा था, तभी उसे वहां एक महात्माजी मिले। जब उनको सब बात पता लगी तो उन्होंने उसे जंगल में लगे बांस और घास की कहानी सुनाई जिससे उसको जीवन का एक बहुत बड़ा रहस्य समझ आया और उसको अपनी असफलता को धैर्य के साथ सामना करने का साहस मिल गया।
राजा नहुष एक पुण्यात्मा राजा थे और एक बार संयोगवशात जब इंद्र को किसी कारणवशात अपना पद छोड़ना पड़ा तब नहुष को इन्द्रपद पर बैठाया गया। कुछ समय तो सब अच्छा रहा, फिर स्वर्ग के भोग-विलास देखकर उनकी बुद्धि भृष्ट होने लगी। उनकी कुदृष्टि इंद्र की पत्नी, जो की सतिरूपा थीं उस पर पड़ी। विकृत मन कैसे नीचे गिरता चला जाता है - और अंततः वो अगस्त्य ऋषि के श्राप के भागी बन गए - यह पूरी शिक्षाप्रद पौराणिक कहानी आप पू स्वामिनी अमितानंदजी से हमारी प्रेरक कहानियों के इस अंक में सुनिए। भोग वृत्ति मनुष्य को कैसे दीन और पतित बना देती है - यह इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है।
आज की प्रेरक कहानी में पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी एक सरल से प्रसंग से जीवन में नियमों का महत्त्व बता रही हैं। नियम हमारी संकल्प शक्ति को दृढ़ करता है और तभी हम जीवन में कुछ भी करने में सफल हो पाते हैं। एक व्यक्ति को एक महात्माजी ने प्रेरणा दी की वो एक छोटा सा भी नियम लेले, उसने उनकी बात मानली और उसको अनायास ऐसा लाभ हुआ की उसके बाद उसको नियम रखने का महत्त्व दृढ़ता से समझ आ गया।
आज की कहानी में पू स्वामिनी समतानन्द जी नारद जी के बारे में एक प्रसिद्द एवं शिक्षाप्रद कथा सुना रही हैं। नारदजी भगवान के बहुत ही अच्छे भक्त थे और उनका आदर सभी लोग किया करते थे। एक बार जब पार्वतीजी भी उनकी स्तुति कर रही थीं तब शिवजी ने नारदजी के जीवन का उन्हें वह प्रसंग सुनाया जब वे अभिमान से ग्रसित हो गए थे। इसका प्रयोजन यह था की सभी भक्तों को, चाहे वो देवऋषि ही क्यों न हो, अभिमान से बचे रहना चाहिए। यह प्रसंग क्या है इसे प्रेरक कहानियों के इस अंक में सुनिए।
प्रेरक कहानियों के इस अंक में पू स्वामिनी अमितानन्दजी महाभारत का एक सुन्दर प्रसंग सुना रही हैं। महाराज युधिष्ठिर अपनी धर्म-निष्ठा के लिए बहुत प्रसिद्द थे। एक बार वे सभा में बैठे थे और एक ब्राह्मण भिक्षुक उनके पास आया और दान के लिए निवेदन किया। ब्राह्मण को दान देना एक अत्यंत पुण्यकारी एवं सौभाग्य की बात होती है। ब्राह्मणों का संरक्षण और संवर्धन वस्तुतः ज्ञान के संवर्धन का पर्याय होता है अतः ऐसे कार्य को अविलम्ब करना चाहिए। महाराज ने व्यस्तता के कारण यह कहलवा दिया की ब्राह्मणदेवता से कहो की वे कृपया कल आ जाएँ तो वे दान अवश्य देंगे। इतना कहना था की भीम खड़े हो गए और शंखनाद करने लगे की "महाराज युधिष्ठिर की जय हो, उन्होंने काल पर विजय प्राप्त कर ली है"। युधिष्ठिरजी ने जब पुछवाया तो उन्होंने कहा की आप ने ब्राह्मण को कल आने को कहा है अतः आप को पता है की कल तक काल भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है अर्थात आपने काल पर विजय प्राप्त कर ली है। महाराज को अपनी गलती समझ आ गयी और उन्होंने दान जैसे पुण्य कार्य को बिना विलम्ब पूरा किया।
एक बार एक संस्कारी महिला अपने पुत्र के साथ कहीं जा रही थी, तभी एक नीच और झगड़ालु औरत उसको रस्ते में मिली और किसी विषय पर उसको भला-बुरा बोलने लगी, जिसमे अनेको गाली-गलौज भी शामिल था, लेकिन पहली औरत ने उसकी उपेक्षा कर दी और कुछ भी नहीं बोली। घर पहुंचते उसके पुत्र ने उससे उसकी चुप्पी का रहस्य पूछा तो उस महिला ने अपने अंदाज़ में लडके को कैसे समझाया - यह इस सुन्दर सी प्रेरक कहानी में आप पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से सुनिए। अच्छी शिक्षा और संस्कारों से व्यक्ति अपने मन को सभी परिस्थितियों में शांत और सुन्दर बनाये रखने में समर्थ हो जाता है। यह ही अच्छे संस्कारों का एक बहुत ही बड़ा व्यावहारिक महत्त्व है।
एक बार एक राजा को किसी ने दो अत्यंत विशिष्ट नस्ल के बाज़ उपहार में दिए ; और उन्होंने एक पक्षियों के जानकार को बुलाकर उन्हें दिए और उससे कहा कि वह उन्हें प्रशिक्षित करे। कुछ समय बाद जब वो राजा उससे मिला तो पता लगा कि एक बाज़ तो बहुत अच्छी तरह से उड़ता है, लेकिन किसी अज्ञात कारणों से दूसरा बाज़ नहीं उड़ता है। तो राजा ने चारों तरफ़ ढिंढोरा पिटवा दिया की जो भी हमारे बाज़ की समस्या का समाधान कर उसको उड़ने की शिक्षा देगा वो उसे बहुत इनाम देगा। एक व्यक्ति सामने आया और उसने दो दिन में ही उस बाज़ को उड़ना सिखा दिया। उसने क्या करा यह इस सुन्दर और प्रेरक कहानी में पू स्वामिन समतानन्द जी से सुनिए। वह शिक्षा केवल बाज़ के लिए ही नहीं बल्कि अनेकों उन इंसानों के लिए भी अत्यंत लाभकारी थी, जो अपने जीवन में ऊँची उड़ाने नहीं ले पाते हैं।
प्रेरक कहानी: एक बार एक शिक्षिका ने एक बच्चे को कुछ गिनती आदि सिखाई, फिर उन्होंने उसकी परीक्षा लेना चाही, लेकिन एक जगह वो बार-बार गलती करता हुआ दिखता था। उसका क्या रहस्य था वो बाद में जानकार वो शिक्षिका भी आश्चर्य चकित रह गयी। बच्चे के मन में क्या था वो इस सुन्दर सी प्रेरक कहानी में पू स्वामिनी अमितानन्द जी से सुनें। उस शिक्षिका को एक बहुत बड़ा ज्ञान प्राप्त हुआ की हमको अनायास किसी पर आरोपण नहीं लगाना चाहिए, बल्कि दूसरे की दृष्टी से देखना सीखना चाहिए।
एक व्यक्ति किसी महात्माजी के पास गया और कहा की वो बहुत दुखी है उसका कुछ मार्ग-निर्देशन करें। तो महात्माजी ने उससे कहा की जाओ और अपने से भी नीच और तुच्छ व्यक्ति या वस्तु दिखे उसको ले आओ। वो व्यक्ति जाता है लेकिन उसका क्या अनुभव रहा जिससे वो महात्माजी प्रसन्न हो गए और उसे अपना शिष्य बना लिया, ये सब रहस्य इस सुन्दर सी प्रेरक कहानी में पू स्वामिनी पूर्णानन्दजी से सुनें।
From the publisher's feed