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पू स्वामिनी समतानन्द जी आज एक सुन्दर और प्रेरक कहानी सुना रही हैं जहाँ पर एक पिताजी ने अपने बालक को व्यस्त रखने के लिए एक कठिन सा कार्य दिया लेकिन उनके आश्चर्य की सीमा नहीं रही जब उनके बालक ने उस कार्य को कुछ मिनटों में ही पूरा कर दिया - क्या चुनौती थी और उस बालक ने उसे कैसे पूरा किया यह सब आप इस कहानी में सुनिए।
पू स्वामिनी पूर्णानन्दजी से एक छोटी लेकिन सुन्दर और शिक्षाप्रद कहानी सुने, इसका विषय है - शरणागति। कहानी एक तालाब में दो मछलियों की है। कैसे एक बलवान मछली, मछवारे के जाल में फस गई और दूसरी मछली बच गयी?
अपनी पसंद की पत्नी को खोजने के लिए एक व्यक्ति ने एक दुकान खोली और अत्यंत व्यवस्थित तरीके से अपनी पसंद की पत्नी में आवश्यक गुणों की जानकारी मांगी। सुन्दर चाहिए अथवा सामान्य चलेगी - सामने दो दरवाज़े मिलते थे, जिसे खोल के आगे जाना होता था। अंदर पुनः दो दरवाजे - पड़ी लिखी चाहिए अथवा बगैर पड़ी-लिखी चलेगी - फिर दो दरवाज़े। ऐसे अनेकानेक दरवाजे आते गए और लड़के की उत्सुकता बढ़ती गयी। फिर आगे क्या हुआ - यह रोचक और शिक्षाप्रद कहानी आप पू स्वामिनी अमितानन्द जी से सुनिए।
पू स्वामिनी समतानन्द जी एक प्रेरक कहानी सुना रही हैं जिसमे वे बता रही हैं की जन्म और मरण दोनों जीवन की अभिन्न अंग हैं अतः हमें जीना भी आये और मृत्यु को भी स्वीकारना सीखें। इस सन्दर्भ में वे हनुमनजी की एक सुन्दर, शिक्षाप्रद और रोचक कथा सुना रही हैं। ध्यान पूर्वक सुने।
पू स्वामिनी पूर्णानन्दजी एक सुन्दर सी प्रेरक कहानी सुना रही हैं जिसमे क्रोध के प्रवाह में नहीं बहने की प्रेरणा मिलती है। कहानी एक किसान की है जो अपने परिवार की बहुत प्रेम से सेवा करता था, लेकिन कुछ ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसके वज़ह से उसे अपने छोटे भाई के उपर बहुत क्रोध आया और उसपर केस करने की ठान ली। लेकिन ईश्वर कृपा से उसे एक ऐसा वकील मिला जिसने उसे सही राह दिखाई और उसका और उसके परिवार का पुनः कल्याण हो गया, अन्यथा वो क्लेश और अंताप के गर्त में गिर कर और फस जाता।
कई बार किसी विषम और पीड़ा-दायक परिस्थिति भी अत्यंत कृपा वाली बन जाती है - इस तथ्य के बारे में पू स्वामिनी अमितानन्द जी एक सुन्दर सा प्रसंग सुना रही हैं। ध्यान पूर्वक सुने और मुसीबतों में जल्दी विक्षिप्त होना बंद करें और वहां पर भी कुछ कृपा ढूडने की चेष्टा करें।
एक बार एक आदमी ने बैंक से कुछ पैसे निकलवाए, लेकिन गलती से केशियर ने कुछ पैसे ज्यादा दे दिए। इसके बाद उस आदमी के मन में कुछ उथल-पुथल होने लगी। एक मन बोल रहा था की रख लो, और दूसरा मन कह रहा था की नहीं हमें वे ज्यादा वाले पैसे वापस दे देने चाहिए। फिर आगे क्या हुआ - इस सुन्दर प्रेरक कहानी में पू स्वामिनी समतानंदजी से सुनिए।
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी, स्वतंत्र सेनानी श्री गोपाल कृष्ण गोखले जी के जीवन का एक सुन्दर और प्रेरक प्रसंग सुना रही हैं। एक बार जब वे स्कूल में पढ़ते थे और उन सब को उनके शिक्षक ने कुछ होम-वर्क दिया। उनको जितना आता था उन्होंने लिखा, शेष अपने एक मित्र से पूछा और होम-वर्क पूरा कर दिया। शिक्षक उनके उत्तर से प्रसन्न हुए और उन्हें पुरुस्कृत करने का निर्णय लिया। जब पुरूस्कार-समारोह में उनकी वे प्रशंसा कर रहे थे तब गोखले जी प्रसन्न होने के बजाय कुछ दुखी दिख रहे थे। शिक्षक के द्वारा पूछने पर उन्होंने ने बताया की वे इस पुरूस्कार के सच्चे हकदार नहीं हैं और अपने उत्तर का पूरा रहस्य बताया, जिसे सुनकर शिक्षक और ज्यादा प्रसन्न हुए - की उन्होंने सब के सामने सक बोलने का साहस किया है। जो सच का आश्रय लेने का साहस करता है उसका अवश्य बहुत कल्याण होता है।
पू. स्वामिनी अमितानन्द जी से 'श्रद्धा की महिमा' के विषय के बारे में एक उपनिषद् के अंतर्गत की प्रेरक कहानी सुने - ये प्रसंग है प्रश्नोपनिषद का जहाँ पिप्पलाद ऋषि जी के प्रति अपार श्रद्धा के कारण अनेको विद्वानों ने वर्ष भर धीरज से रुकना उचित समझा, तभी उनको मंगलकारी ज्ञान मिला।
रक्षा बंधन की पौराणिक कथा - सुनिए पू स्वामिनी समतानंदजीके द्वारा।
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