पू स्वामिनी समतानन्द जी एक सत्य और प्रेरक घटना का प्रसंग सुना रही हैं, जहाँ एक युवक समुद्र तट पर बैठे एक व्यक्ति, जो की गीता पढ़ रहा था, कहता है की आज के आधुनिक युग में वो गीता आदि ग्रन्थ क्यों पढ़ रहा है। पूछने पर उसने बड़े स्वाभिमान से बताया की वो विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र को ज्वाइन कर रहा है। बाद में पता चला की वो व्यक्ति खुद विक्रम साराभाई खुद थे। उस युवक को आश्चर्य ही नहीं लेकिन अपार संकोच हुआ की अपने अभिमान और दुराग्रह के कारण उसने किस्से क्या कह दिया। लेकिन इसी से उस दिन के बाद उसके अंदर गीता के प्रति अपार श्रद्धा और जिज्ञासा हो गयी। वो युवक आगे चल के देश का महान वैज्ञानिक अब्दुल कलाम बना। एक सत्य और प्रेरक घटना का प्रसंग सुना रही हैं, जहाँ एक युवक समुद्र तट पर बैठे एक व्यक्ति, जो की गीता पढ़ रहा था, कहता है की आज के आधुनिक युग में वो गीता आदि ग्रन्थ क्यों पढ़ रहा है। पूछने पर उसने बड़े स्वाभिमान से बताया की वो विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र को ज्वाइन कर रहा है। बाद में पता चला की वो व्यक्ति खुद विक्रम साराभाई खुद थे। उस युवक को आश्चर्य ही नहीं लेकिन अपार संकोच हुआ की अपने अभिमान और दुराग्रह के कारण उसने किस्से क्या कह दिया। लेकिन इसी से उस दिन के बाद उसके अंदर गीता के प्रति अपार श्रद्धा और जिज्ञासा हो गयी। वो युवक आगे चल के देश का महान वैज्ञानिक अब्दुल कलाम बना।