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शेर मोहम्मद खान एक पाकिस्तानी शायर हुए. जो जालंधर में पैदा हुए और उनकी मृत्यु कराची पाकिस्तान में हुई. शेर मोहम्मद खान पंजाबी, हिंदी, उर्दू में कविताएँ लिखते रहें हैं, गीत लिखते रहे, ट्रेवल ब्लॉग लिखते रहे और वो न्यूज पेपर काँलमनिस्ट भी थे. शेर मोहम्मद खान को लोग उनके नाम से नहीं बल्कि “इब्ने इंशा” के नाम से जानते हैं, जी वही ‘इब्ने इंशा’ जिनकी मशहूर नज्म है “कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा, कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा” विचारबिंदु के पॉडकास्ट में सुनिए इब्ने इंशा की एक कविता “इंशाजी बहूत दिन बीत चुके” सुनिए प्रवीण झा जी के स्वर में.
इस कवि के पास 'उम्मीद अब भी बाकी है' यह बड़े सूकून की बात है
जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएँगे
हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले
सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!
सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो ,
प्रस्तुति: विचारबिंदु
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