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व्यंग्य एक ऐसा साहित्य है जिसकी मौलिक ज़िम्मेदारी है समाज में ठहरी बुराइयों और खोखलेपन को उजाकर करना। व्यंग्कार इसी माध्यम से आम लोगों की उस पीड़ा, उन भावनाओ को शब्दों के रूप में सामने ले आता है जिसे आमलोग व्यक्त कर पाने मे स्वयम् को असमर्थ पाते हैं और हालात से समझोता कर लेते हैं। भारत के एक जानेमाने व्यंग्यकार श्री ओम वर्मा की रचनायें सुनते हुये एक परिचय वार्ता कि आज के दौर में व्यंग्य कितना सार्थक है।
By SBS4.2
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व्यंग्य एक ऐसा साहित्य है जिसकी मौलिक ज़िम्मेदारी है समाज में ठहरी बुराइयों और खोखलेपन को उजाकर करना। व्यंग्कार इसी माध्यम से आम लोगों की उस पीड़ा, उन भावनाओ को शब्दों के रूप में सामने ले आता है जिसे आमलोग व्यक्त कर पाने मे स्वयम् को असमर्थ पाते हैं और हालात से समझोता कर लेते हैं। भारत के एक जानेमाने व्यंग्यकार श्री ओम वर्मा की रचनायें सुनते हुये एक परिचय वार्ता कि आज के दौर में व्यंग्य कितना सार्थक है।

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