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नूतनता और परिवर्तन का चोली दामन का सम्बन्ध है। वास्तव में परिवर्तन और नूतनता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आज जो नवीन है कल प्राचीन होगा और प्राचीन भी कल ही रूपांतरित होकर अर्वाचीन हो जाता है। हम हर पल भविष्य को तलाशते रहते हैं किन्तु अगले ही क्षण भूत के गर्त में चले जाते हैं। आइए इस क्षण भंगुर संसार में पल में प्रलय और सृजन को पल में हमारी कविता "नूतनता" से महसूस करते हैं।
हमारे नेता जी जनमानस के डाक्टर हैं।वे जनता की नब्ज को बड़ी बारीकी से पहचानते हैं। भोले भाले लोगों का इलाज करना अच्छे से जानते हैं। चुनाव के मौसम में किसको कौन सी दवा देनी है, उसके तो वे विशेषज्ञ हैं ही, तदनुसार किसको मीठी गोली देनी है और किसको कड़वी उन्हें अच्छे से आता है। आइये हमारे नेता जी की विशेषज्ञता को जानते हैं हमारी कविता " मुफ्त की रेवड़ी" से।
जीवन में रिश्तों का अपना महत्व है। समय के साथ इनमें गर्मी आती है और कालांतर में ये ठंडे पड़ जाते हैं।
राजनीति में उपनाम और जुमले खूब प्रचलित है। ये नाम राजनीतिज्ञों के व्यक्तित्व और कृतित्व को सटीक दर्शाते हैं।
मनुष्य के जीवन में कुछ विषय ऐसे हैं जिन पर उसका वश नहीं चलता जैसे व्यक्ति का जन्म, उसकी धड़कन, साँसो की संख्या, कंठ से उत्पन्न ध्वनियों की संख्या , शारीरिक संरचना, मृत्यु इत्यादि। इन गतिविधियों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है और यही गतिविधियाँ जीवन आधार हैं। इन्हीं गतिविधियों के सहारे जीवन प्रवाह के पक्षों को सुनते और समझते हैं हमारी कविता " प्रारब्ध " से।
सोते हुए स्वप्न देखना आम बात है। सपनों में हम कभी परेशान होते हैं तो कभी प्रशन्न होते हैं। कभी डरते हैं तो कभी साहस के साथ लड़ते हैं।
सैनिकों के त्याग, बलिदान और बहादुरी के अनेक किस्से और कहानियाँ आप लोगों नें सुना होगा। क्या कभी उनके व्यक्तिगत जीवन में झाँकने का प्रयास कभी किसी ने किया है। आइए आज हम एक सैनिक के मन की बात, उसकी पत्नी की पीड़ा को अपनी कविता " मन की बात " से व्यक्त करने का प्रयास करते हैं।
बेसिक शिक्षा में नित नये प्रयोग होते रहते हैं। इसी प्रयोग की कड़ी में एक नया नाम सामने आया है, जिसका नाम है टास्क फोर्स। इस टास्क फोर्स का नाम सुनते ही
स्वतंत्रता दिवस के खुशनुमा, शरीर में सिहरन पैदा करने वाले प्रभात की बधाई और शुभकामनायें। आजादी के इस अमृत महोत्सव में आज हम उन अमर बलिदानियों को याद करेंगे जिनका देश के किसी भी अभिलेख में नामोनिशान नहीं है। वे गुमनाम हैं। उन्होंनें निष्काम भाव से हमें स्वतंत्रता दिलाई पर खुद काल के गाल में समा गये। आइए उन्हीं मतवालों को स्मरण करते हैं हमारी कविता "गुमनाम परिंदे" से।
भाई-बहन के अटूट विश्वास और प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हम सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत, अभिनन्दन और वंदन करते हैं। वैसे तो इस प्रेम को शब्दों में व्यक्त करना सम्भव नहीं है फिर भी उसके कुछ अंशों को हमारी कविता "स्नेह सूत्र" के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास किया गया है।
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